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   सुरेन्द्र कोली की फांसी पर 22 दिसंबर तक लगी रोक

नोएडा- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के चर्चित निठारी कांड में दोषी करार दिए गए सुरेन्द्र कोली की फांसी पर लगी रोक को 22 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। कोली को यह राहत केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में अभी तक केस से जुड़े रिकाॅर्ड व अपना जवाब पेश नहीं कर पाने की वजह से मिली है। अदालत सबूतों की देरी पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उसे हर हाल में दस दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा है। इस बीच सुरेन्द्र कोली ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक क्रिमिनल रिट दाखिल कर फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील किये जाने की मांग की है।  कोली की इस अर्जी को इस मामले में पहले से ही दाखिल पीयूडीआर (पीपुल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राइट्स) की पीआईएल के साथ जोड़ दिया जाएगा।

गौरतलब है कि सामाजिक संस्था पीयूडीआर (पीपुल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राइट्स) ने अक्टूबर महीने में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक पीआईएल दाखिल कर कोली की फांसी की सजा को मानवीय आधार पर उम्र कैद में तब्दील किये जाने की मांग की थी। पीयूडीआर की अर्जी में कोली की दया याचिका राज्यपाल और राष्ट्रपति के यहां सवा तीन साल से ज्यादा वक्त तक लटके रहने को सबसे बड़ा आधार बनाया गया था। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में केंद्र और यूपी सरकार से जवाब मांगते हुए केस से जुड़े सभी रिकार्ड तलब कर लिए थे और कोली की फांसी पर रोक लगा दी थी। दो बार वक्त दिए जाने के बावजूद केंद्र सरकार आज तक न तो इस मामले से जुड़े रिकार्ड पेश कर सकी है और न ही अपना जवाब। अदालत ने आज इस पर गहरी नाराज़गी जताते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई और सारे रिकार्ड व जवाब हर हाल में बारह दिसंबर तक पेश करने को कहा है।

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पीयूडीआर की पीआईएल में कहा गया था कि दया याचिका पर अधिकतम दो साल में फैसला सुनाए जाने का नियम है, लेकिन सुरेन्द्र कोली की दया याचिका पर फैसला लेने में राष्ट्रपति और यूपी के गवर्नर को सवा तीन साल से ज्यादा का वक्त लग गया। दया याचिका के फैसले में देरी की वजह से उसका मानसिक उत्पीड़न और मानव अधिकारों का हनन हुआ है, ऐसे में उसकी फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर देना चाहिए। पीयूडीआर संस्था ने इस तरह के कुछ पुराने मामलों की नजीर भी पेश की, जिसमे दया याचिका के फैसले में देरी होने पर फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया गया था। इनमे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने वाले शत्रुघ्न का चर्चित मामला भी शामिल है, जिसमे दया याचिका चार साल तक लटकने की वजह से उसे राहत मिली थी। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीकेएस बघेल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई अब बाइस दिसंबर को करेगी। बाइस की सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि सुरेन्द्र कोली की फांसी की सजा बरकरार रहेगी या कोर्ट उसे राहत देते हुए उसकी सजा को उम्र कैद में तब्दील कर देगी।

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