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अखिलेश सरकार ने तीन साल का कार्यकाल किया पूरा 

लखनऊ- सीएम अखिलेश यादव की सरकार के आज तीन साल पूरे हो गए हैं। अखिलेश सरकार का तीन साल का सफर काफी उतार चढ़ाव से भरा रहा है। इन तीन सालों में सरकार ने कई घोषणाएं कीं। इसमें कई पूरी हुईं, तो कई अभी भी अधूरी हैं। इन तीन सालों में राज्य सरकार ने अल्पसंख्यकों को कई सौगातें दीं। फिर चाहे बात 'हमारी बेटी, उसका कल' योजना की हो या फिर मदरसों के आधुनिकीकरण योजना हो। वहीं, कुछ अल्‍पसंख्‍यकों का कहना है कि सरकार ने अपने वादे नहीं पूरे किएए तो कुछ सरकार की योजनाओं से खुश हैं।

वहीं, अखिलेश सरकार के लिए बिजली आपूर्ति  सबसे बढ़ी चुनौती रही। ये चुनौती सिर्फ अखिलेश सरकार के ही सामने नहीं आई बल्कि यूपी की हर सरकार के सामने आई है।

वर्तमान समय में प्रदेश बिजली मांग का आधा भी उत्‍पादन नहीं कर रहा है। ऐसे में बिजली की खपत कम करने से लेकर चोरी रोकना सरकार और विभाग दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई बार इसके लिए अभियान भी चलाया गयाए लेकिन पिछले तीन साल में न तो लाइन लॉस में कमी आई और न ही बिजली चोरी रुकी। नतीजाए अखिलेश सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद भी लोगों को महंगी बिजली के साथ कटौती की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। 

अखिलेश सरकार ने बिजली आपूर्ति की समस्या को दूर करने के लिए प्रदेश में ऊर्जा विभाग के निर्देश पर पॉवर कॉरपोरेशन ने दो बार बिजली चोरी रोको अभियान चलाया। इसका उद्देश्‍य बिजली चोरी रोकने के साथ ही लाइन लॉस कम करना और उपभोक्‍ताओं की संख्‍या बढ़ाना था। दो बार चले इस अभियान में करीब चालीस लाख नए उपभोक्‍ता जोड़े गए। दावा किया गया कि जो लोग बिजली चोरी कर रहे थे। वह अब उपभोक्‍ता बन गए है। इन सबके बावजूद आंकड़ों को देखें तो बिजली चोरी और लाइन लास 27 फीसदी से सिर्फ दो फीसद ही कम हुआ।

इसके अलावा अखिलेश सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश के अंदर स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार और बुनियादी जरूरतों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जिसका असर देखने को भी मिला है, इतने कम समय में यूपी सरकार बेहतर चिकित्सा सुविधा की श्रेणी में काफी ऊपर आ गया है। मुफ्त दवाएं, कम दाम पर एक्स-रे और पैथोलॉजी जांच की व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। 

आपको बता दें कि, यूपी की आबादी तकरीबन 20 करोड़ है। इसे देखते हुए सरकार ने 2015.16 के बजट में दवाओं के लिए 587 करोड़ए उपकरणों की खरीद के लिए 225 करोड़ए निर्माण कार्यों के लिए 394 करोड़ और जिलों में 100 बेड अस्पताल के लिए 50 करोड़ आवंटन हुए हैं। वहीं, ऐसे मंडल मुख्यालय जहां, मेडिकल कॉलेज नहीं है वहां 300 बेड के अस्पताल के लिए 25 करोड़ और परिवार कल्याण के लिए 5840 करोड़ के बजट का आवंटन हुआ है।

अखिलेश सरकार के तीन साल के रिपोर्ट कार्ड में प्रदेश में महिला सुरक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण में महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। पीछले साल बालिका आशीर्वाद योजना के तहत 20-20 हजार रुपए की एफडी भी सौंपी गई। तो इस बार सरकार ने साईकिल सहायता योजना, रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्‍मान कोष, रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार, रानी लक्ष्मीबाई आशा ज्योति केंद्रों की स्थापना, कन्‍या विद्या धन और लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने में मदद के लिये 'हमारी बेटी, उसका कल' योजना के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। सीएम हमेशा दावे करते नजर आए कि प्रदेश में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन, मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान रेप, बदायूं कांड, मोहनलालगंज कांड, आशियाना कांड समेंत कई घटनाएं है जो सरकार के दावों की पोल खोलती है।

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