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कानपुर के जिला अस्पताल में नहीं है दवाएं, बाहर से मेडिसिन लाने को मजबूर मरीज 

 कानपूर देहात. जिले के जिला अस्पताल में इन दिनों दवाईयां गायब हो गई है। जिन दवाओं की इस समय ज्यादा जरुरत है, वो ही इन दिनों जिला अस्पताल के स्टोक में नजर नहीं आ रही है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने वर्तमान प्रक्रिया यानी आनलाइन सिस्टम के माध्यम से दवाओं की डिमांड मई में ही कर दी थी और स्टोक अबतक नहीं आया तो क्या किया जाए, लेकिन इस सरकारी आनलाइन सिस्टम के कारण जहां अबतक जिला अस्पताल में दवाओं का स्टोक नहीं पंहुचा है। वहीं यहां एडमिट मरीज जरुरी दवाओं की जगह अब उनके सब्टीटयूट के भरोशे इलाज कराने को मजबूर नजर आ रहा है।  

 

बाहर से दवाएं लेने को मजबूर मरीज 

-किसी भी बीमारी पर उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल की तरफ दौड़ने वाली आम जनता को कानपूर देहात का जिला अस्पताल भी मायूस कर रहा है। 

-यहां दर्द में प्रयोग होने वाला डायक्लोफेनिक, बुखार में लगने वाला पैरासिटामाल इंजेक्शन व डायरिया में जरूरी आरएल फ्ल्यूड (रिंगल लैक्टेट) तक जिला अस्पताल में नहीं है।

-अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदारों को मजबूरन बाहर से जीवनरक्षक दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। 

-बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं तो दूर जिला अस्पताल में दर्द और बुखार की दवा तक नहीं है।

 

 

रेबीज के इंजेक्शन जमाने से नहीं है

-मौसम बदलने की वजह से जगह जगह डायरिया और उल्टी दस्त के मरीज आ रहे हैं।

-इन मरीजों को नसों के जरिए चढ़या जाने वाले आरएल (रिंगल लेक्टेट) का भी जिला अस्पताल में टोंटा है।

-वहीं कुत्तों व बंदरों के काटने पर लगने वाले एन्टी रेबीज इंजेक्शन तो जमाने से नहीं आये है।

-जरूरतमंद मरीजों के तीमारदारों को पर्चा लिख कर बाहर से दवा लाने के लिए थमा दिया जाता है।

 

क्या कहें मुख्य चिकित्साधिकारी?

-दरअसल यूपी के स्वास्थ्य विभागों द्वारा दवा खरीद को पारदर्शी बनाने की आन लाइन व्यवस्था की गई है। 

-विभागीय सूत्र बताते हैं कि इसके लिए प्रदेश में 10 कंपनियों को ठेका दिया गया। 

-लगभग डेढ़ माह से आरएल समाप्त होने के बाद कई बार रिमाइंडर भेजा गया है पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। 

-वहीं जिम्मेदार अधिकारयों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था के अनुसार हमने दवा मंगाने के लिए डिमांड भेजी है।

-दवा आपूर्ति न हो पाने की दशा में रिमांडर भेजा जाएगा। 

-जो दवाए स्टोक में नहीं है उनकी जगह हम दुसरी दवाए आरएल की जगह पर प्रयोग करने के लिए एनएस (नार्मल सलाइन) का पर्याप्त स्टाक है। 

-कंपनियों के दवा आपूर्ति करते ही स्टाक में पर्याप्त दवा होगी।

 

दूसरी दवाओं के सहार चल रहा इलाज 

-वही जब जिला अस्पताल के हालात ऐसे है तो अंदाजा लगाना मुस्किल नहीं होगा कि आखिर यहां की सीएचसी और पीएचसी में दवाओं के हालात क्या होंगे? 

-दरअसल जबसे दवाओं की खरीद के लिए पिछली सरकार ने यूपी में ऑनलाइन डिमांड सिस्टम की शुरुआत की थी तब से दवा खरीद भले ही पारदर्शी हो गई हो।

-लेकिन जिन कंपनियों को डिमांड पूरी करने के लिए टेंडर दिए गए उनके द्वारा स्टोक पूरा नहीं दिए जाने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न किये जाने के कारण इस तरह की समस्याए कमोवेश पूरे प्रदेश में सामने आ रही है।

-जिसकी वजह से दवाओं का स्टोक जिलों में समाप्त हो चूका है।

-ऐसे में जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी भी इस बात को मान रहे है कि उनके पास दवाओं का स्टोक नहीं है और इलाज दूसरी दवाओं के सहारे किया जा रहा है।

 

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