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महाराजगंजः बीती रात घुघली थाना क्षेत्र के गिदहा गांव के पास सिसवा नहर के पास पति पत्नी एवं मासूम बच्चे पर जानलेवा हमला किया गया। लहूलुहान हालत में तीनों पडे़ थे।

इस हमले में घायल पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई। जबकि घायल पति मेडिकल कालेज में जिंदगी मौत से जूझ रहा है। मासूम भी वहीं पिता के साथ भर्ती है। पुलिस के मुताबिक लाठी डंडे, कुल्हाडी से हमला किया गया है। आरोपी ससुर को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

एक शख्स को पहली पत्नी छोड़कर दूसरी शादी करके अपनी दुनिया बसाना महंगा पड़ गया। कोठीभार थाना क्षेत्र के रत्नपुर निवासी दीपक पांडेय की पहली शादी घुघली थाना के सोनबरसा गांव में हुई थी।

मगर किसी बात को लेकर दोनों में सबकुछ विवाद चल रहा था। दीपक ने दूसरी शादी करके अपनी दुनिया अलग बसा ली लेकिन यह बात दीपक की पहली पत्नी को नागवार लगी और उसने अपने मायके पक्ष के साथ मिलकर दूसरी पत्नी और बच्चों के साथ आ रहे दीपक पर रास्ते में ही हमला कर दिया।

इस हमले में दीपक की दूसरी पत्नी रुक्मिणी की मौके पर ही मौत हो गई और दीपक हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। बच्चे को हल्की चोटे आई है। 

जानकारी के मुताबिक यह मामला शादी से जुड़ा है। दीपक पांडेय निवासी रतनपुर थाना कोठीभार की दूसरी शादी पूजा से हुई थी। पहली शादी हरखपुरा टोला सोनबरसा में अर्चना पुत्री रामलखन से हुई थी। शादी के बाद रिश्तों में दरार आई तो मामला न्यायालय तक पहुंचा। दोनो के बीच संबंध विच्छेद हो गया।

और दीपक ने दूसरी शादी कर ली। इससे नाराज ससुर परिवार के अन्य सदस्यों को साथ लेकर बीती रात मौका देखकर हमला बोल दिया। दीपक पांडेय 28, अपनी दूसरी पत्नी पूजा 24 और डेढ़ साल के मासूम बेटे के साथ बाइक से लेहडा दुर्गा मंदिर दर्शन को गए थे। वापस लौटते वक्त देर हो गई।

रात में सिसवां नहर के पास गिदहां गांव के करीब पहुंचे तो उन लोगों पर हमला कर दिया। लाठी डंडे से मारने के साथ ही कुल्हाडी से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें पत्नी की मौत हो गई। दीपक और बच्चा बेहोश पड़ा था। होश में आने पर दीपक ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो घायलों को जिला अस्पताल ले आई। 

रुद्रपुर ऊधमसिंहनगरः रुद्रपुर नगर निगम चुनाव में फर्जी शपथ पत्र देने के मामले में अब बीजेपी मेयर की कुर्सी पाने वाली सोनी कोली व 16 पार्षदों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। सरकार ने सही समय पर यदि निर्णय लिया होता तो मेयर समेत सभी पार्षदों को कुर्सी गंवानी नहीं पड़ती। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार जानबूझ कर इस मामले को लटकाए रही। सरकार ने भले ही निवर्तमान मेयर व 16 पार्षदों के चुनाव लडने पर रोक लगा दी हो लेकिन याचिकाकर्ता अभी भी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। 

याचिकाकर्ता के अनुसार कोर्ट के आदेशों के बाद भी बीजेपी की सरकार ने इन लोगों का कार्यकाल पूरा होने दिया जब कोर्ट के आदेशों की अवमानना की अर्जी हाई कोर्ट में लगाई तब जाकर अधिकारियों ने 16 पार्षदों पर 4 साल जबकि निवर्तमान मेयर के चुनाव लड़ने के लिए अगले 5 सालों तक रोक लगा दी है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में मेरे द्वारा हाईकोर्ट में पीआईएल दायर करते हुए कहा गया था कि नगर निगम में मेयर सोनी कोली व अन्य पार्षद द्वारा गलत शपथ पत्र चुनाव आयोग के समक्ष पेश किया गया। जिसमें सभी ने ये कबूल किया था कि उन लोगों द्वारा किसी भी सरकारी संपत्ति पर कब्जा नहीं है जबकि 16 पार्षदों सहित मेयर खुद नजूल भूमि में रह रहे थे जिसके बाद कोर्ट ने उक्त मेयर व 16 पार्षदों की सदस्यता रद्द करते हुए कानूनी कार्यवाही करने को कहा था।

लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार और बाद में बीजेपी सरकार ने मामले को ठंडे बस्ते में डाले रखा और सभी का कार्यकाल पूरा होने दिया। कोर्ट के आदेशों की अवमानना के मामले में जब अधिकारियों पर गाज गिरती दिखी तो तब जा कर अधिकारियों ने सभी 17 लोगों पर चुनाव लड़ने में रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि न्याय तो मिला है लेकिन इतने लेट में न्याय मिलने का औचित्य नहीं रहता।

वहीं पूर्व मेयर सोनी कोली व भाजपा नेता सुरेश कोली ने अपनी सरकार के खिलाफ प्रेस वार्ता करके सरकार पर गलत निर्णय लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पूर्व मेयर पर इसलिए रोक लगाई गई है कि रम्पुरा में उनके पति सुरेश कोली नजूल पर स्कूल चला रहे हैं जो सोसायटी का है। जिसकी मान्यता भी ली गई है।

स्कूल के प्रबंधक होने के नाते उन्हें स्कूल परिसर में रहने को आवास दिया गया था। उन्होंने कहा कि आज रुद्रपुर की 80 फीसदी जनता नजूल भूमि पर रह रही है। ऐसे में जब उस क्षेत्र का व्यक्ति चुनाव नही लड़ सकता है तो क्या अब क्षेत्र में देहरादून से चुनाव लड़ने को आएंगे। उन्होंने कहा कि जो डिसीजन सरकार ने लिया है उसका खामियाजा आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।  

इलाहाबाद. भारतीय जनसंघ के सहसंस्थापक पं. दीन दयाल उपाध्याय की हत्या के 50 साल पुराने मामले की सरकार सीबीआई जांच करा सकती है। अंबेडकर के एक बीजेपी कार्यकर्ता के पत्र पर गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। इसी पत्र के आधार पर इलाहाबाद के एसपी रेलवे ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट आईजी रेलवे को सौंप दी है।यह रिपोर्ट अगले एक-दो दिनों में यूपी शासन को भेज दी जाएगी।

-रिपोर्ट में यह बताया गया है कि हत्या से जुड़े दस्तावेज एफआईआर, केस डायरी लापता हैं। थाने में मिले एक रजिस्टर के आधार पर यह भी पता चला है कि, इस मामले में तीन आरोपित गिरफ्तार किए गए थे जिनमें एक को चार साल की सजा हुई थी।

-अधिकारी अब इस पांच दशक पुराने मामले में किसी ऐसे पुलिस कर्मी की तलाश कर रहे हैं, जो वहां घटना के समय तैनात रहा हो।

-जानकार सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने जिस तरह से रिपोर्ट मांगी है, यह किसी मामले की सीबीआई जांच के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया हो सकती है।

 

क्या है मामला

-अम्बेडकरनगर के बीजेपी कार्यकर्ता राकेश गुप्ता ने 2017 में केन्द्र सरकार को एक पत्र भेजा था। जिसमें पंडित दीन दयाल उपाध्याय की हत्या को साजिश बताते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग की थी।

-पत्र में कहा गया है कि, 11 फरवरी 1968 मुगलसराय स्टेशन पर हुई उनकी हत्या विरोधी दलों की साजिश थी और इस हत्या के तार पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली और बिहार से जुड़े थे।

-इसी पत्र के आधार पर नवंबर 2017 में गृह मंत्रालय ने यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। 6 अगस्त 2018 को डीजीपी ने इस मामले की रिपोर्ट आईजी रेलवे बीआर मीणा से मांगी। आईजी ने इसी पत्र के आधार पर एसपी रेलवे को रिपोर्ट देने को कहा।

-बुधवार को एसपी रेलवे हिमांशु कुमार ने अपनी रिपोर्ट आईजी को सौंप दी है। जिसमें कहा गया है कि, 11 फरवरी 1968 को हुई इस घटना की रिपोर्ट अपराध संख्या 67/1968 पर आईपीसी 302 के तहत अज्ञात पर मुगलसराय थाने में दर्ज है। थाने के रजिस्टर संख्या 4 से जानकारी मिली है कि, इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों वाराणसी निवासी रामअवध, लालता और भरतराम को गिरफ्तार किया था।

-जून 1969 में भरतलाल को कोर्ट ने आईपीसी की धारा 379/411 के तहत चार साल की सजा सुनाई थी जबकि दो अन्य बरी कर दिए गए।

-आईजी रेलवे के मुताबिक शिकायतकर्ता को बुलाकर उनका बयान दर्ज किया जायेगा और उनके पास यदि कोई साक्ष्य है तो मांगा जायेगा। पंडित दीन दयाल उपाध्याय की हत्या में आरोपित किए गए तीनों व्यक्तियों  के बारे में भी पता लगाया जा रहा है कि वे जीवित हैं या नहीं। 

फर्रुखाबादः यौमे आशूरा के दिन कर्बला की ओर बढ़ते हर कदम के साथ लोगों में हुसैन की कुर्बानी का दर्द और यजीद के खिलाफ गुस्सा साफ झलकता दिखा।

गमजदा माहौल में सैकड़ों ताजिये कर्बला में सुपुर्दे खाक कर दिये गये। मातम करते सोगवारों के सीने छलनी हो गये पर फिर भी वह फक्र से कहते रहे- खूने कर्बला रंग लायेगा, जुल्म की दीवार को ढहा दिया जायेगा।

लोग नारे लगाते रहे- हुसैन का दामन न छोड़ेंगे। काले लिबासों में महिलायें भी अली असगर का हिंडोला लेकर नंगे पांव कर्बला पहुंचीं। अली असगर हुसैन के परिवार का सबसे छोटा सदस्य था जिसकी पानी न मिलने पर तड़प तड़प कर मौत हो गयी थी।

शहर ने एक बार फिर अपनी गंगा जमुनी तहजीब की रंगत को पुख्ता किया। गणेश विसर्जन यात्री भी निकलीं और मुहर्रम के ताजिये जलूस भी।

यौमे आशूरा के दिन लगा कि जैसे शहर के सभी रास्ते कर्बला की ओर मुड़ गये। नखास और गढ़ी अब्दुल मजीद से लोग जरी का ताजिया लेकर कर्बला पहुंचे। भीकमपुरा और तकिया नशरत शाह से लाजवंती का ताजिया आया। मेंहदी बाग से आये सोंगवारों ने सीनाजनी करते हुए मातम किया।

हुसैन के दीवाने पूरे जोश से या अली, या हुसैन की सदायें बुलंद करते रहे। जगह- जगह हुए मातम में नौहे दोहराये गये- कर्बला का वाक्या यह कहता है, जुल्म के आगे कभी झुकना नहीं ... घुमना, मित्तूकूंचा और टाउन हाल तिराहे पर सोगवारों ने दिल दहलाने वाला मातम किया।

 

मौलाना गुलशेर ईरानी का कहना है कि हुसैन उस शख्सियत का नाम है जिसका पूरी कायनात पर सिक्का है। यजीद का नाम मिट गया। आज कोई अपने बच्चों का नाम यजीद के नाम पर नहीं रखता। जबकि हुसैन और अब्बास के नाम पर अधिकांश बच्चों के नाम रखे जाते हैं।

मौलाना फरहत अली जैदी ने कहा कि हमारे शहर का यह गंगा जमुनी मिजाज है कि हम सभी त्यौहार मिल जल कर मनाते हैं। जैसा इस बार हुआ है। गणेशोत्सव और मुहर्रम साथ साथ सद्भाव के साथ चला है।

रानीखेतः यहां भारत और अमेरिकी सैनिकों ने किसी आतंकवादी घटना से निपटने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास किया। खड़ी चट्टानों के ऊपर कब्ज़ा किये आतंवादियों पर किस तरह काबू पाया जाए, ये भारतीय सैनिकों ने अमेरिका से आए 350 प्रशिक्षित फौजियों को सिखाया।

वहीं अपने हाईटेक उपकरणों के लिए मशहूर अमेरिकी फ़ौज ने भी भारतीय फ़ौज को लेटेस्ट तकनीक से रु-ब-रु कराया। फौजियों ने तीखी चट्टान में रस्सियों के बल लटककर अपने साहस और कला का सुन्दर नमूना पेश किया। गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच आतंकियों पर भारी पड़ी फ़ौज।    

गुरुवार सवेरे से ही भारतीय और अमेरिकी फौजी सड़कों पर मार्च करते दिखे। ये सब 15 गढ़वाल रेजिमेंट के माउंटेन क्लाइम्बिंग एरिया की तरफ कूच कर रहे थे। यहां शुरू हुआ वो प्रशिक्षण जिसमें भारत वर्षों से जूझते हुए अब निपुण हो चुका है, यानि आतंवादी वारदात से निबटना।

रविवार 16 सितंबर से शुरू हुए इण्डो -यूएस संयुक्त सैन्य अभ्यास 2018 का आयोजन अल्मोड़ा जिले के रानीखेत स्थित चैबटिया आर्मी एरिया में किया गया।

ये युद्धाभ्यास 29 सितम्बर तक चलेगा जिसमें वैश्विक और घरेलू आतंकवाद से निबटने के लिए दोनों देश अपने अनुभव और तैयारी साझा कर रहे हैं। युद्धाभ्यास में अमेरिका के लगभग 350 सैनिकों और इतने ही भारतीय सैनिक भाग ले रहे हैं। 

दोनों सेनाओं ने आपस मे तकनीक को साझा किया । हिंदुस्तान के बाद आतंकवाद से जूझते अमेरिका ने काउंटर आतंकवाद और काउंटर विद्रोह की थीम पर युद्धाभ्यास शुरू किया।

इसमें भारत और यू.एस. रक्षा सहयोग के हिस्से के रूप में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण युद्धाभ्यास का यह 14वां संस्करण है। दोनों देशों की सेनाएं वैश्विक और घरेलू आतंकवाद पर काबू पाने के लिए अपनी कोशिशों को पंख लगा रही हैं। दोनों ही फौजों के उच्चाधिकारी इस एक्सरसाइज से संतुष्ट दिखे।  

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    उमेश कुमार समाचार प्लस के एडिटर इन चीफ हैं।

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