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उत्तर प्रदेश में...बच्चों को ऐसे नकल करवाई जा रही है परीक्षाओं में...जैसे ये उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो...कोई खिड़की से लटककर...कोई छत पर चढ़कर...कोई खेत से भागकर...कोई मैदान में दौड़कर...विद्यार्थियों तक चिट पहुंचा रहा है...

नकल ने हमेशा से अकल पर ही चोट की है...बावजूद इसके नकल करवाने के लिए...विद्यार्थियों के अभिभावक...स्पाइडर मैन बनने से भी चूक नहीं रहे हैं...

एक-दूसरे से ज्यादा ईमानदार दिखने की होड़...इस स्थान तक आते-आते दम तोड़ देती है...परीक्षा में नकल को कोई अभिभावक अगर अपराध नहीं माने...तो ये सिर्फ सवाल ही नहीं है...सच है...उस भविष्य की जिसकी तस्वीर सुनहरी तो कहीं से नहीं....स्याह जरूर है...

हो सकता है...इस तस्वीर को देखकर आप पहले हंसें...लेकिन यकीन मानिए...हंसते-हंसते रोने लगेंगे आप...रोज़-रोज़ नए-नए तरीके सामने आते हैं...नकल में अकल लगाने वालों के...

ये हर कोई जानता है कि...नकल करना गलत है...लेकिन यह है बहुत आसान...क्योंकि जब अभिभावक ही बच्चों को चोरी करवाने पर उतारु हो और प्रशासन लाचार तो...फिर दिक्कत ही क्या है और कहां है...

लाख कोशिशों के बाद भी...सरकार इस पर रोक नहीं लगा पा रही है उत्तर प्रदेश में...इसलिए सवाल तो सरकार से भी है...लेकिन जवाब देगा कौन...इधर मेहनत करने वाले छात्रों के लिए नकल करने वाले...स्पीड ब्रेकर की तरह होते हैं...

वैसे भी सचमुच की समझदारी...बगैर मेहनत हासिल तो नहीं ही की जा सकती...और अगर कोई मेहनत करे तो...नकल की क्या जरूरत...जिसे सामाजिक मान्यता तो कतई नहीं...मिलनी चाहिए...

फिलहाल उत्तर प्रदेश में...अपने-अपने गार्जियन के भरोसे ही...परीक्षार्थी अपने हूनर का कमाल दिखा रहे हैं...इस देश में हर साल अनेकों परीक्षाएं होती है...सूई में धागे डालने से लेकर...दसवीं, बारहवीं, ग्रेजुएशन, मास्टर तक के...लेकिन नकल की जो ये कवायद है...रघुकुल रीत सदा चली आई...टाइप से उस पर रोक लगाना जरूरी है...वरना...दसवीं-बारहवीं की परीक्षा हमेशा पारिवारिक प्रयास बनकर रह जाएगी...

लेखक- आकाश वत्स

 

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