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सही कहा तुमने डियर कन्हैया....कि तुम शायद विश्व के इकलौते ऐसे घर्म में पैदा हुए हो जिसके बारे में कटाक्ष भरे इस अंदाज में तुम कुछ भी बोल सकते हो...काश यही बात तुमने थोड़े से गर्व के साथ कही होती तो अच्छा लगता..लेकिन इसमें शायद तुम्हारा कोई दोष नहीं है..क्योंकि तुम तो ऐसी विचारधारा के प्रतीक हो जहां अगर खुद को हिन्दू कहने वाला व्यक्ति दिन को दिन कहेगा तो तुम लोग उसे रात ही कहोगे.... हर चीज को उल्टा करके देखने की आदत जो है तुम लोगों की....

अच्छा लगा जब तुमने देश के विश्वविद्यालय के प्रांगन में खड़े होकर किसी विद्यार्धी संगठन के किसी नेता को चुनौती नहीं दी..सीधे देश के प्रधानमंत्री को ही कठघरें में खड़ा कर दिया....तुम्हे सुनते हुए मेरे जैसे अल्पज्ञानी को भी एक बार यही अहसास होने लगा कि इस देश में सारी समस्याओं – गरीबी, बेरोजगारी , आतंकवाद , नक्सलवाद जैसी समस्याओं...अरे अरे...सबसे महत्वपूर्ण तो भूल ही गया आपातकाल ....का शुभारम्भ भी मई 2014 से ही हुआ है । शुक्र है क्रांतिकारी भाषण देते-देते तुमने यह दावा नहीं किया कि मई 2014 से पहले भारत स्वर्ग का अंग था..लेकिन नई सरकार ने उसे धरती के नर्क पर ला दिया है..गनीमत है.....।

यह भी ज्ञान प्राप्त हुआ कि देश की 69 फीसदी आबादी ने मोदी के खिलाफ वोट दिया है। गोया ईवीएम मशीन पर केवल मोदी के साथ और मोदी के खिलाफ दो ही ऑप्शन दिया गया था...। उसी समय अहसास हुआ कि देश का चुनाव आयोग भी तुम्हारे साथ षडयंत्र कर रहा है । क्योंकि चुनाव आयोग की वेबसाइट तो यही बताती है भई कि  अब तक देश में बनने वाले हर प्रधानमंत्री के खिलाफ उस समय देश की 50 फीसदी  से ज्यादा जनता ने वोट दिया था।  थोड़ा साफ कर दूं कि किसी भी सरकार को देश की आधी आबादी का भी वोट अपने लोकप्रियता के चरम काल में भी नहीं मिला है ..और हां सबसे ज्यादा वोट लोगों ने उस सरकार के खिलाफ दिया था जिसमें अंदर-बाहर से तुम्हारी विचारधारा के लोग भी शामिल थे...छेड़ो जंग ऐसे चुनाव आयोग के खिलाफ....

तुम जातिवाद से लड़ने की बात करते हो लेकिन रोहित की जाति बताना नहीं भूलते..ब्राहम्ण को गरियाना नहीं भूलते। तुम संविधान की बात करते हो लेकिन अफजल की फांसी को न्यायिक हत्या बताने वाले अपने साथियों की आलोचना नहीं करते । तुम गरीबी , भूखमरी , बेरोजगारी , असमानता से आजादी की बात करते हो लेकिन कभी भी अपने वरिष्ठ लोगों से यह नहीं पूछते कि भई आपने पश्चिम बंगाल की क्या हालत कर दी । आपने बिहार में उसी पार्टी की सरकार को क्यों बचाया जिसके नेता ने हमारे ही विश्वविद्यालय के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष की हत्या करवाई थी ।  यूपी में बार बार उसी दल की चौखट पर क्यों जाते है जिसने अनगिणत बार तुम्हारी विचारधारा वाली पार्टी  में तोड़ –फोड़ की  भ्रष्टाचार की बात तो मैं करूंगा नहीं...

प्राइम टाइम में देश के तमाम बड़े चैनल ने अपने प्रोग्राम को तोड़कर तुम्हे पूरा का पूरा लाइव दिखाया....अपने क्रांतिकारी विचारों से ओत –प्रोत भाषण में तुमने देश की जनता द्वारा चुने गये ( भले ही 31 फीसदी हो ) प्रधानमंत्री पर हर तरह का हमला बोला...लेकिन तुन्हे किसी ने नहीं रोका...तुम मीडिया की आलोचना करते रहे लेकिन फिर भी हमारी बिरादरी तुम्हे दिखाती रही.. इसके बावजूद तुम यह कहते रहे कि देश में आपातकाल लगाया जा रहा है । विरोध करने की आजादी छीनी जा रही है ।  गजब है भई..यह तुम्ही कह सकते हो...

अब दावा किया जा रहा है कि कन्हैया के रूप में देश को भविष्य का एक बड़ा नेता मिल गया है भई ..मेरी भी दुआ तुम्हारे साथ है तुम बड़े नेता जरूर बनो...जानते हो यह दुआ मेरे दिल से कब निकली ..जब तुमने अपनी मॉं का जिक्र किया..जब तुमने गरीबी का जिक्र करते हुए यह बताया कि तुम्हारा परिवार केवल 3 हजार रूपये में चलता है..तभी मेरे दिल से दुआ निकली की तुम बड़े नेता तो बन ही जाओं भले ही देश की गरीबी दूर ना कर पाओ लेकिन अपनी तो कर ही लोगो..उसमें भी तुम्हारा कोई कसूर नहीं होगा क्योंकि इस देश में गरीबों की लड़ाई लड़ते-लड़ते नेता कब अमीर बन जाता है..पता ही नहीं चलता..खैर तुम इसी तरह आबाद रहो..बुलंद रहों....

अंत में सबसे खास....तुम्हे सुनते सुनते अचानक दिमाग में यह आया कि आखिर तुम्हारे पीछे कौन सी ताकत है...आखिर यह हिम्मत कहां से आती है कि तुम 282 ( पूर्ण बहुमत ) सीट अपने दम पर लाने वाले पीएम की भी हर तरह के लफ्जों में आलोचना कर सकते हो...वास्तव में यह तुम्हारी ताकत से ज्यादा बीजेपी की कमजोरी है।  आखिर क्या कारण है कि अपने दम पर कभी भी देश की सत्ता में नहीं आने वाले वामपंथी विचारों के लोंगो ने देश के तमाम विश्वविद्यालयों पर अपना कब्जा कर रखा है । साहित्य , कला , खेल , पत्रकारिता से लेकर देश के हर क्षेत्र में तुम्हारी विचारधारा के लोग भरे पड़े है...कुछ खुल कर क्रांति कर रहे है तो कुछ...। यही वजह है कि अवार्ड वापसी के विवाद में बीजेपी बड़ी मुश्किल से एक-आध साहित्यकारों का ही इंतजाम अपने पक्ष में कर पाई । उन्हे अनुपम खेर और मालिनी अवस्थी जैसे कलाकारों को ही साहित्यकारों के सामने उतारना पड़ा । यह बीजेपी कभी समझ ही नहीं पाई कि लोकसभा की ताकत से सरकार बनती है लेकिन माहौल वो लोग बनाते है जो समाज के अलग-अलग क्षेत्र में काम करते है..और बीजेपी ऐसे लोगों को कभी अपना बना ही नहीं पाती है। वरना कोई वजह नहीं थी कि अटल बिहारी वाजपेयी को अपना सुरक्षा सलाहकार बनाने के लिए कांग्रेसी परिवार की तरफ जाना पड़ता...वर्तमान पीएम को भी बहुमत हासिल करने के लिए अलग अलग दलों से लोगों को आयात करना पड़ता । हालत यह है कि इस देश में अगर आप किसी को वामपंथी कहे , कांग्रेसी कहें ( किसी भी भाषा में ) तो वह गर्व से अपना सीना चौड़ा कर लेता है..जुमां..जुमां...चार दिन की पार्टी ( आप ) भी समाज के हर क्षेत्र में अपने लोग बना रही है लेकिन ऐसे लोगों की तादाद आज भी बहुत कम है जो खुल कर अपने आपकों दक्षिणपंथी कह सके..यही है बीजेपी की कमजोरी..जिससे तुम जैसे लोगों को ताकत मिलती है ।

लेखक- संतोष पाठक, डिप्टी ब्यूरो चीफ, दिल्ली (समाचार प्लस)

 

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