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जेएनयू विवाद के बाद से देश में 'देशभक्ति बनाम राष्ट्रवाद' की बहस शुरू हो गई। जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगे, जो वाकई में गलत हैं। हम भारतवासियों के लिए हमारा देश उतना ही प्यारा है जितना किसी अमेरिकी, इंग्लिश या पाकिस्तानी के लिए उनके देश होंगे। और युवा होने के नाते मैं ये बात कह सकता हूं कि हम अपने देश को, यहां के सिस्टम को कितना भी भला बुरा कहें, लेकिन बात जब देशप्रेम की आती है तो हम ये बताने से कभी पीछे नहीं हटते कि हम देशप्रेमी हैं। और ये सिर्फ हमारे साथ ही नहीं है। दुनिया के सभी देशों में ऐसे युवा मिलेंगे जो अपने यहां की सरकार, शासन प्रणाली से भले ही खुश ना हों, लेकिन अपने देश को वे प्यार करते हैं।

 लेकिन ये राष्ट्रवाद क्या है ? सच कहूं तो मेरे लिए ये नया शब्द है। क्योंकि अब से पहले मैं सिर्फ देशभक्ति के बारे में ही सुनता था। कुछ लोग कहते हैं कि देशभक्ति का पर्यायवाची राष्ट्रवाद है। जबकि ज्यादातर कहते हैं कि कट्टर देशभक्ति वास्तव में राष्ट्रवाद है। अगर ऐसा ही है तो माफ कीजिएगा, लेकिन मैं इसे खारिज करता हूं। फिर मैं राष्ट्रवादी नहीं हूं। क्योंकि कट्टर शब्द मुझे पसंद नहीं

'अगर कोई भारत में रहकर भारत माता की जय नहीं बोल सकता तो उसे यहां रहने का अधिकार नहीं है, वो पाकिस्तान चला जाए'। यार पाकिस्तान क्यों चला जाए ? भारत माता के जय ना बोलने से कोई पाकिस्तान समर्थक हो जाता है क्या ? मुझे याद नहीं मैंने आखिरी बार भारत माता की जय कब बोला था। शायद स्कूली दिनों में बोला होगा। उसके बाद से कभी नहीं बोला। तो ? आप मुझे पाकिस्तान भेज देंगे ? आप कौन होते हैं ? और आपने ये कैसे तय कर दिया कि अगर मैं भारत माता की जय नहीं बोल रहा हूं तो मैं पाकिस्तान समर्थक ही हूं ? आप मेरे मन के अंदर झांक चुके हैं क्या ? नहीं। अभी तक नही। क्योंकि अभी तक ऐसी कोई तकनीक नहीं आई है कि किसी इंसान का मन पढ़ लिया जाए। और अगर कोई ऐसी तकनीक होगी भी तो आप पाएंगे कि मैं देशभक्त हूं। और ये भी पाएंगे कि मैं राष्ट्रवादी नहीं हूं। क्योंकि मैं कट्टर नहीं हूं।

मैं कहीं पढ़ रहा था कि कुछ साल पहले एक थिएटर में फिल्म प्रसारण के दौरान राष्ट्रगान बजा तो थिएटर हॉल में सिर्फ तीन लड़कियां खड़ी हुईं। लेखक और उनका परिवार बैठा रहा। लेखक के पिता ने जब ये देखा तो उन्हें महसूस हुआ। उन्होंने लेखक को बताया कि देखो, सिर्फ तीन लड़कियां खड़ी हुईं। उस परिवार को ये बात इतनी छू गयी कि उसके बाद से गणतंत्र दिवस की परेड के बाद बजने वाले राष्ट्रगान पर घर में भी वो लोग खड़े हो जाते थे। 3 लड़कियों ने सिर्फ अपना फ़र्ज़ निभाकर दूसरों को फर्ज़ निभाने के लिए प्रेरित कर दिया। और यही मैं भी करता अगर मैं वहां होता। प्रेम कोई भी हो, महसूस होने की चीज़ है। मार-पीट कर महसूस नहीं करवाया जा सकता। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप किसी कुंठा के शिकार हैं जिसके बारे में शायद आप ही पता लगा पाएं।

हमारे संविधान में ये साफ-साफ लिखा है कि हम लोकतांत्रिक देश हैं। हम धर्मनिरपेक्ष समाज हैं। तो जान लीजिए आप लोग अगर आप इनमें से किसी भी बात को चुनौती देते हैं तो आप देश के संविधान को गाली दे रहे हैं। फिर आप देशप्रेमी कैसे हो सकते हैं ? और इस तरह राष्ट्रवादी होना अपने आप ही गलत हो जाता है।

अगर आप भारत माता की जय बोलने के लिए किसी पर दबाव बना रहे हैं, मारपीट कर रहे हैं तो आप संविधान का अपमान ही कर रहे हैं। ये ठीक वैसा ही है जैसे आप लड़कियों को कपड़े पहनने की तमीज सिखा रहे हैं।

आप ये साबित करने पर तुले हुए हैं कि आप जहां पैदा हुए हैं सिर्फ वही देश अच्छा है, दुनिया के बाकि देश घटिया या आपके देश से कमतर हैं। तो आपको ये भी सोचना चाहिए कि आपकी तरह दुनिया के हर देश का नागरिक ये सोच सकता है। और फिर उसकी नजर में आपका देश भी उसके देश से कम ही है।

भारत के सभी नागरिक अपने देश से प्यार करते हैं। हमारे खिलाड़ी जब अच्छा खेलते हैं तो हम उन पर, खुद पर, गर्व करते हैं। यही तो देशप्रेम है। लेकिन अगर खिलाड़ी खराब खेले, तो हम उसके घर पर पत्थर फेंकने लगें तो ये देशभक्ति नहीं है। अगर राष्ट्रवाद हो तो मुझे पता नहीं।

राष्ट्रवाद नाम का झंडा बुलंद करने वालों से पूछना चाहूंगा कि क्या कभी आपने किसी को टैक्स चोरी ना करने की सलाह दी है ? क्या आपने लोगों को ईमानदारी से अपना काम करने की सलाह दी है ? आपने कभी खुद को सड़क पर गंदगी फैलाने से रोका है ? आपने कभी दूसरों को ऐसा करने से रोका है ? आपने कभी रिश्वत लेने या देने के बाद ये सोचा है कि आप देश के साथ न्याय कर रहे हैं या नहीं ?

एनआरई भी देश से लगाव रखते हैं। उनकी राष्ट्रभक्ति पर आप कभी संदेह नहीं करते। यहां रहने वाले भी देश से प्यार करते हैं। उनको शक की निगाह से क्यों देख रहे हैं ? देश से प्यार वो लोग भी करते हैं जो देश के बारे में ज्यादा बात नहीं करते। और वो भी जो देश में मौजूद कमियों के बारे में बात करते हैं।

उनके बारे में सोचिए जो लोग भारतीय भी हैं और दूसरे देशों की नागरिकता भी उनके पास है। आपने कभी सुना है कि दक्षिण अफ्रीका से क्रिकेट मैच में भारत की जीत पर ताली बजाने पर वहां रह रहे भारतीयों पर देशद्रोह का मुकदमा किया गया है ? नहीं सुना होगा। लेकिन अगर भारत में भारतीय टीम अफ्रीका से हार जाए और कोई टीवी चैनल कुछ भारत में रह रहे अफ्रीकियों को अफ्रीका की जय जयकार करते दिखा दे तो जरूर तथाकथित राष्ट्रवादियों की भावनाएं आहत हो जाएंगी। ये डबल स्टैंडर्ड क्यों भाई ? हम क्यों पाकिस्तान की तरह जबरदस्ती चीजें लोगों पर थोपना चाहते हैं ?

कमियां हर जगह हैं। बाकि देशों की तरह हमारे यहां भी तमाम कमियां हैं। लेकिन क्या हम सवा सौ करोड़ भारतीयों के चीखने से कि हम महान हैं, दुनिया इसे मान लेगी ?

अपने देश में न्याय और बराबरी के लिए लड़िये और अच्छे नागरिक के फर्ज पूरे करिये। संविधान में लिखे गए कर्तव्यों को निभाइए। संविधान में लिखे कर्त्तव्य भी थोपे नहीं जा सकते हैं। कोई भारत की जय नहीं बोले तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है लेकिन किसी के साथ मार-पीट करने पर आप कानून की नजर में दोषी जरूर होते हैं। आप ऐसी मानसिकता रखते हैं या ऐसा काम करते हैं तो आप बिलकुल राष्ट्र का अपमान कर रहे हैं।

 

लेखक- नाहिद

 



 

 

 



 



 

 

 

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