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सावधान! ये चेतावनी वैधानिक तो नहीं है लेकिन अत्यंत गंभीर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है और इसे खाक करने को आमादा अपराधी हाथ में माचिस लिए घूम रहे हैं। सबसे पहले चलते हैं मथुरा...अभी हाल ही में यहां जेल से लेकर सड़क तक गैंगवार हुआ, जिसमें कथित रूप से बृजेश मावी के गुर्गों ने कुख्यात अपराधी राजेश शर्मा उर्फ टोंटा को मौत के घाट उतार दिया। मथुरा जेल में हुई गैंगवार दोस्ती से बदली दुश्मनी और इंतकाम का नतीजा है। जेल में बंद राजेश टोटा, ब्रजेश मावी और बबलू गौतम की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी धमक थी। जरायम की दुनिया में यह तिकड़ी बड़ी खतरनाक मानी जाती थी। इसी वजह से इन लोगों ने करोड़ों की जायदाद बना ली। इस बीच राजेश शर्मा उर्फ टोटा ने ब्रजेश मावी के कान भरे और बबलू गौतम का कत्ल करा दिया। इसके बाद पूरे गैंग और प्रापर्टी पर काबिज होने की नीयत से राजेश टोटा ने अपने दोस्त ब्रजेश मावी को दस सितम्बर 2013 को अपने घर पर बुलाया। ब्रजेश के साथ बीजेपी लीडर प्रमोद चैधरी और गोपाल यादव भी थे। राजेश ने ब्रजेश को कत्ल करके इन दोनों को बंद कर दिया था। तीन दिन बाद जब उसने इन दोनों को छोड़ा तब जाकर ब्रजेश के कत्ल की बात सामने आई थी। जिस तरीके से राजेश शर्मा ने ब्रजेश मावी को धोखे से अपने घर बुलाकर कत्ल कर दिया था उससे ब्रजेश मावी के गिरोह के लोग बहुत नाराज थे और राजेश टोटा और उसके साथियों से बदला लेने की फिराक में थे। ब्रजेश के कत्ल के बाद 28 सितम्बर 2013 को राजेश टोटा अपने दो साथियों के साथ सरेंडर करके जेल चला गया था। ब्रजेश के कत्ल में राजेश के गिरोह के अट्ठारह लोग सामने आए थे। उसी के बाद ब्रजेश के गिरोह के लोग जेल के अंदर पहुंचने लगे और जेल के अंदर गैंगवार होने का खतरा पैदा हो गया मगर जेल प्रशासन ने उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की, जिसका नतीजा सत्रह जनवरी को गैंगवार की शक्ल में सामने आया। अब राजेश टोटा, ब्रजेश मावी और बबलू गौतम तीनों जिंदा नहीं हैं लेकिन इनके द्वारा खड़े किए गए साम्राज्य और अकूत संपत्ति पर कब्जा किसका होगा..यही सवाल मथुरा के मन को दहला रहा है। टोटा के साथी मोना ठाकुर, संजू प्रधान, लारेंस बॉस अब इसी ताक में हैं कि ब्रजेश गैंग की ताकत पूरी तरह खत्म करके मथुरा से नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक फैले साम्राज्य को जल्दी कब्जा लिया जाए। तो दूसरी तरफ टोटा को निपटाने के बाद ब्रजेश के गुर्गे अब टोटा गैंग के लिए कुछ भी नहीं छोड़ना चाहते। और सबसे संदिग्ध सच ये कि इस साम्राज्य को कब्जाने के लिए कुछ बड़े पुलिसवालों ने ही टोटा को खत्म करवा दिया। सूत्रों की मानें तो कुछ पुलिसवालों ने 50 लाख रुपये लेकर टोटा को खत्म करवा दिया। मतलब साफ है, मथुरा गैंगवार के मुहाने पर खड़ा है। 

अब जरा बागपत चलते हैं। जनवरी के तीसरे हफ्ते खबर आई कि दोघट थाना क्षेत्र के गांगनौली गांव के जंगल में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई और एक लाख के इनामी प्रमोद गांगनौली का दाहिना हाथ और 5 हजार इनामी प्रवीण उर्फ भगत ढेर हो गया, जबकि प्रमोद गांगनौली के भाई रवि को भी गोली लगी। लेकिन अंदरखाने से कुछ और ही खबर मिली। दरअसल गांव में प्रमोद के साथी रहे कुख्यात अमित उर्फ सद्दाम के मां की तेरहवीं थी और धनौरा गैंग को ये खबर मिल चुकी थी। धनौरा गैंग ने कुख्यात प्रमोद गांगनौली को यहीं पर निपटाने की प्लानिंग की लेकिन एक लाख का इनामी प्रमोद बच निकला। अब सद्दाम की मौत के बाद से शांत बैठे प्रमोद गांगनौली की खूनी नजर धनौरा गैंग पर है। दोनों गैंग से अब कितनी लाशें गिरेंगी पता नहीं लेकिन इस खौफ के पीछे भी पुलिसिया चूक साफ दिखती है। यहां तक कि 24 घंटे पुलिस सुरक्षा में रहने वाले इसी गांव के एक फौजी के परिवार पर प्रमोद की मुखबिरी के शक से पूरा गांव भी खौफजदा है। और इस परिवार के किसी भी सदस्य की हत्या से आशंकित ये परिवार सदमे में है।   

और आगे चलते हैं गाजियाबाद, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर तक खौफ का पर्याय बना राहुल खट्टा अकेले ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश को खूनी जंग में झोंकने पर आमादा है। अंदर की खबर है कि 2 लाख के इनामी राहुल खट्टा का रौला अब उसके गुरु आकाश को ही खटकने लगा है। इसे शुभ संकेत कतई नहीं कहा जा सकता। इस आशंका के पीछे एक वजह भी है, दोनों वांटेड अपनी-अपनी जाति के नए लड़कों की अपने गैंग में भर्ती की मानो होड़ लगाए बैठे हैं। आकाश इसलिए भी चुप नहीं बैठ सकता क्योंकि खट्टा अब फिरौती किंग बन बैठा है, जो व्यापारियों का डाटा बैंक बनाकर रोज की फिरौती का लक्ष्य निर्धारित करता है। और रोज कम से कम एक वारदात को अंजाम देता है। गौरतलब तो ये है कि खट्टा पीएसी से घिरे अपने ही गांव में डेरा जमाए बैठा है। अब ऐसा क्यों है खुद तय कीजिए, बस ये जान लीजिए कि अंदरूनी खबर के मुताबिक अभी हाल ही वसूले गए 3 करोड़ की फिरौती में से खट्टा ने 1 करोड़ पुलिस की जेब में डाल दिए।   

इससे भी डरावनी एक खबर कि 4 राज्यों का मोस्टवांटेड और 7 लाख का इनामी अमित उर्फ भूरा फिलहाल राहुल खट्टा के ही किसी ठिकाने पर छिपा हुआ है। और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ये दो सबसे खूंखार अपराधी किसी बड़े खूनी खेल की बिसात बिछा रहे हैं। आप जरा रुड़की गैंगवार भी याद कर लीजिए। एक चीज और हम आपको याद दिलाते हैं वो है भूरा का इतिहास। अब तक भूरा 3 बार जेल से फरार हुआ है और हर बार किसी बड़े हत्याकांड को अंजाम दिया है।

इधर भाटी बनाम दुजाना का कभी न सोने वाला जिन्न अब फिर दहशत के मिशन पर है। गौर करने वाली बात है कि कुख्यात सुंदर भाटी जेल गया, तो पीछे उसका भाई सिंहराज भाटी भी सलाखों के पीछे पहुंच गया। अभी दोनों माफिया बंधु जेल पहुंचे ही थे कि अनिल दुजाना के और दुजाना गांव के ही निवासी हरेंद्र का कत्ल हो गया। लेकिन पुलिस ने अनिल दुजाना को ही अपने साथी के कत्ल का आरोपी बना दिया। मतलब साफ है कि जेल से खूनी खेल....अब ये गिरोह कभी भी कहीं भी गैंगवार को अंजाम दे सकते हैं। यह गैंगवार अब लंबे समय तक चल सकता है। कितनी हत्याएं होंगी और इन गैंगों के निशाने पर कौन लोग होंगे। कुछ पता नहीं! (लेखक प्रवीण साहनी समाचार प्लस के कार्यकारी संपादक हैं)

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