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देखें परंपरागत रीति रिवाज से हुई कुत्ते की शादी, 5 हजार बाराती हुए शामिल

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले का पवारा गाँव एक ऐसे एतिहासिक शादी का गवाह बना जिसे लोग कई सालों तक नहीं भूल पाएंगे। यह शादी किसी इंसान की नहीं बल्कि एक कुत्ता व कुतिया की थी। शादी पूरी तरह हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार संपन्न कराई गई। इस अनोखी शादी में रिश्तेदारों के आलावा लगभग दर्जन भर गाँव के पांच हजार से अधिक बाराती शामिल हुए।

पवारा गाँव में बारतियों का पुरे जोश के साथ स्वागत किया गया। डीजे की धुन पर डांस करते बाराती दुल्हन के घर पहुंचे। जहाँ जयमाल की रस्म निभाई गई।

इस शादी के दुल्हा-दुल्हान यानी कुत्ते का नाम शुगन है और उसकी पत्नी का नाम शगुनिया। दोनों की शादी का कार्ड भी छपा था। कार्ड पर दुल्हे के नाम की जगह चिरंजीवी शगुन लिखा था, वहीं दुल्हन के नाम की जगह आयुष्मती कुमारी शगुनिया लिखाया गया था।

शगुन को शादी से नहलाया गया, गुलाबी रंग के कपड़े पहनाए गए। फिर दुल्हे शगुन अपनी दुल्हिनयां को लेने के लिए फूलों से सजी कामर में सवार होकर निकल पड़े। शुगन की कार के पीछे गानों की धुन पर थिरकते करीब 5 हजार बाराती भी थे।

शगुनिया के घर के बाहर जयमाल स्टेज बना हुआ है। जयमाल स्टेज पर रखी कुर्सी पर दुल्हे राजा बठे तो दुल्हन बनी शगुनिया जयमाल लिए सामने जा पहुंची। स्टेज पर दोनों ने एक दुसरे के गले में जयमाला डाला तो वहां मौजूद हजारों लोगों ने फुलों की वर्षा कर उनके नए जीवन में प्रवेश करने पर ख़ुशी जताया। जयमाल के बाद घर के अन्दर बने मंडप के नीचे कुत्ता व कुतिया की रीति रिवाज के साथ शादी संपन्न कराइ गई।

शगुनिया के संरक्षक जंग बहादुर का कहना है कि उन्होंने शगुनिया को अपनी बेटी की तरह पाला है, जिसकी वह आज पूरे रीति रिवाज से शादी कर रहे हैं।

शगुन व शगुनिया की शादी में शामिल हुए रिश्तेदारों व बारातियों के लिए लजीज पकवान की भी व्यवस्था की गई थी। दूल्हे व दुल्हन के लिए बकरे का मीट बनाया गयाए तो वहीं बरातियों के लिए सादे पनीर व पूड़ी बनाई गई थी।

विवाह के बाद गहनों व श्रंगार से सजी शगुनिया की विदाई के समय उसके जंग बहादुर अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए और नम आंखों से शगुनिया की विदाई की। इस तरह शगुन और शगुनिया की शादी पूरे परंपरागत तरीके से संपन्न हुइ।

 

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