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भैंस, मुर्गी के बाद अब 'चुड़ैल’ की तलाश करेगी यूपी पुलिस

इलाहाबाद: यूपी पुलिस अपने अजीबो गरीब कारनामों के कारण सुर्खियों में छाई रहती है।कैबिनेट मंत्री आजम खान की भैंस और सपा नेता की फरहानउल्ला खां की 12 मुर्गियों की तलाश के बाद अब यूपी पुलिस को ‘चुड़ैल’ की तलाश है।

 दरअसल, इलाहाबाद के संत निरंकारी रेलवे क्रॉसिंग के पास 'चुड़ैल' की अफवाह पिछले कई दिनों से सुनने को मिल रही है। जिसके बाद एक बेतुका ‘चुड़ैल’ से संबंधित मैसेज वाट्सएप पर भी वायरल हो गया है।

तेजी से बढ़ रहे ‘चुड़ैल’ के मैसेज से लोग डर गए हैं। इतना ही नहीं लोगों ने अपना रास्ता तक बदल लिया है। मामला जब प्रकाश में आया तब इलाहाबाद के एसएसपी ने पुलिस को ‘चुड़ैल’ से जुड़ी अफवाह का खुलासा करने के निर्देश दिए हैं।

इलाहाबाद में जगुआर फाइटर प्लेन दुर्घटनाग्रस्त, दोनों पायलट बचे

एयरफोर्स का जगुआर फाइटर प्लेन बम्हरौली एयरबेस के उड़ान भरने के कुछ देर बाद नैनी के मुंडी चक इलाके में दुर्घनाग्रस्त हो गया। उसमें सवार पायलट और सह पायलट दोनों कूदकर बच गए। हादसे की कोर्ट ऑफ इनक्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं।

हादसा शहर से 18 किमी दूर मुंडी चक में हुआ। सुबह लगभग 8 बजे फाइटर ट्रेनिंग विमान जेटी-0606 ने एयरबेस से उड़ान भरी। विमान रूटीन उड़ान पर बताया गया है। प्लेन में पायलट गुरजीत और उनके सह पायलट सवार थे।

दस मिनट बाद प्लेन में तकनीकी खराबी का अंदेशा होने पर दोनों पायलट कंट्रोल को सूचना देकर पैराशूट की मदद से एक-एक कर कूद गए। सह पायलट छिवकी के पास पैराशूट के बिजली के तार में फंसने से मामूली रूप से घायल हो गया। जबकि बाद में कूदे पायलट गुरजीत नैनी के मुंडी चक में सुरक्षित उतर गए।

इसके बाद प्लेन आबादी क्षेत्र के बीच रेलकर्मी रमेश यादव के मकान के बारजे से टकराया, जिससे धमाके के साथ उसमें आग लग गई। मकानों के बीच में एक बड़े खाली भूखंड में जलते प्लेन का मलबा गिरा।

जगुआर हादसे की सूचना मिलते ही एयरफोर्स, सेना, सिविल पुलिस, दमकल और एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गईं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। इस बारे में एयरफोर्स की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली है।

इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर देशी बम धमाका

इलाहाबाद: इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के बाहर मंगलवार को देशी बम फटने से हंड़कंप मच गया। यह देशी बम कूढ़े की ढेर में फटा। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। देशी बम सिविल लाइंस साइड में साइकिल स्टैंड के पास कूड़े के ढेर में सुबह करीब साढ़े नौ बजे फटा। बम की चपेट में आने से कुत्ते की मौत हो गई। धमाके के बाद रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है।

 
खबर मिलने के बाद रेलवे और सिविल पुलिस ने खोजी कुत्तों और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ जांच की। पुलिस फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी है। अफसरों ने भी आशंका जताई है कि यह लो इंटेंसिटी का देशी बम हो सकता है। इस घटना ने जहाँ रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, वहीं घटना के बाद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. धमाके के बाद रेलवे स्टेशन पर अफरा तफरी मच गई थी।

 
जानकारों का मानना है कि अगर धमाके में साइकिल स्टैंड पर खड़े किसी वाहन को अपनी चपेट में लिया होता तो ज़बरदस्त नुकसान हो सकता था, क्योंकि वहां सैकड़ों की तादात में दो पहिया व चार पहिया वाहन खड़े थे।

इलाहाबाद में महज चार रूपये के लिए डबल मर्डर

इलाहाबाद: यूपी के इलाहाबाद में नैनी से सटे घूरपुर के मोहिद्दीनपुर गांव में शुक्रवार को गेहूं पिसाई के चार रुपये के लेनदेन को लेकर बात इतनी बिगड़ गई कि लोग एक दूसरे की जान के दुश्मन हो गए। दो गुटों के बीच महज चार रूपए को लेकर कहासुनी इतनी बढ़ गई एक पक्ष ने फायरिंग कर दी। इससे दूसरे पक्ष के दो लोगों की मौत हो गई जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला ने उस समय तूल पकड़ा जब चक्की वाला प्रति किलो गेहूं की पिसाई के एवज में चार रुपए मांग रहा थाए जबकि ग्राहक का कहना था कि गेहूं की पिसाई दो रुपए प्रति किलो है। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ाए जिसके बाद गोली चली और दो लोगों की हत्या हो गई।

इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल हो गया। आक्रोशित लोग सड़कों पर उतर आए और जाम लगाकर प्रदर्शन करने लगे। कई जगहों पर आगजनी भी की गई। पुलिस ने चक्की के मालिक सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहींए सीएम अखिलेश यादव ने इलाहाबाद में डबल मर्डर की वारदात को संज्ञान में लिया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो- दो लाख का मुआवजा देने का एलान किया है।

स्वामी वासुदेवानन्द शंकराचार्य के योग्य नहीं, नियुक्ति अवैध: कोर्ट

इलाहाबाद- सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) गोपाल उपाध्याय ने मंगलवार को 308 पेज के फैसले में 28 साल तक चले मुकदमे में यह आदेश दिया है, कि ‘स्वामी वासुदेवानन्द ‘शंकराचार्य’ पद के योग्य नहीं है। इनकी नियुक्ति अवैध है। इन्हें आजीवन शंकराचार्य का प्रतीक चिन्ह, छात्र एवं दंड धारण करने पर रोका जाता है तथा शंकराचार्य के रूप में कोई कार्य न करें।’

कोर्ट ने स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती की 7 दिसम्बर, 1973 को की गई नियुक्ति को वैध व नियमों के अनुरूप माना है। कोर्ट ने कहा कि स्वामी स्वरूपानन्द ही शंकराचार्य पद पर की गई नियुक्ति के योग्य है तथा स्वामी वासुदेवानन्द आवश्यक अर्हता न होने के कारण योग्य नहीं है क्योंकि महानुशासन तथा मठ नियमावली में दी गई आवश्यक योग्यताओं को पूरा नहीं करते है। कोर्ट ने 14 नवम्बर 1989 को वासुदेवानन्द की शंकराचार्य पर हुई नियुक्ति को अवैध और अविधिपूर्ण माना और कहा कि इनके द्वारा जिस वसीयत को आधार बनाकर दावा किया गया है। वह कूटरचित है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वासुदेवानन्द दंडी स्वामी नहीं हैं। क्योंकि 13 नवम्बर 1989 तक संन्यास के बाद सोमनाथ द्विवेदी नाम से नौकरी करते रहे हैं। इसलिए आवश्यक अर्हता एवं योग्यता नहीं रखते। कोर्ट ने स्वरूपानन्द द्वारा दाखिल मुकदमे को स्वीकार करके 1987 से चली आ रही कानूनी लड़ाई को निस्तारण कर दिया।

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