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समाचार प्लस के शो 'वांटेड' को मिली 12वीं सफलता, 50 हजार का इनामी बदमाश 'विनोद उर्फ़ गदऊ पासी' गिरफ्तार

कौशाम्बी- इलाहाबाद पुलिस की पकड़ में आया खूंखार अपराधी 'विनोद उर्फ़ गदऊ पासी' सबूत है समाचार प्लस की उस मुहिम का, जो उत्तर प्रदेश सहित भारत के सभी राज्यों को अपराध-मु्क्त बनाना है। तीन दिन पहले ही समाचार प्लस ने अपने मेगा शो 'वांटेड' में गदऊ पासी की क्राइम कुंडली दिखाई थी, और आज वह इलाहाबाद पुलिस की गिरफ्त में है।

मुंडेरा में जूता कारोबारी बंधुओं आकाशदीप केसरवानी और आशीष केसरवानी की हत्या के आरोपी गदऊ को कौशाम्बी से गिरफ्तार किया गया। इलाहाबाद में मुंडेरा थाना इलाके के धूमनगंज की मुंडेरा बस्ती के इस खतरनाक अपराधी पर पहले 15000 हजार रुपए का इनाम था, लेकिन जिस तेजी से गदऊ का क्राइम ग्राफ रफ्तार पकड़ रहा था, उसको देखते हुए पुलिस ने इस पर 50000 हजार कर इनाम घोषित कर दिया। वाबजूद इसके क़ानून के लम्बे हाथ इसकी गार्डन तक नहीं पहुँच सके। महज 25 साल के इस मुल्ज़िम की हिश्त्री शीट में अब तक हत्या यानि धारा 302 के 4 मामले और ह्त्या के प्रयास यानि धारा 307 के 2 मामले दर्ज है। इसके अलावा आई पी सी के तहत दर्जनभर गंभीर मामले दर्ज हैं।

विजय कुमार, जय प्रकाश राय, विजय कुमार यादव, हेमू पटेल, जीतेन्द्र सिंह, शक्ति सिंह, अरुण कुमार पाण्डेय की इलाहाबाद पुलिस टीम ने आज इस खौफनाक अपराधी को हिरासत में लिया। सीओ चतुर्थ वीरेंद्र कुमार भी टीम में शामिल थे।

दरअसल, विनोद उर्फ़ गोदऊ के परिवार का जुर्म और जरायम की दुनिया से पुराना रिश्ता है। छोटी उम्र में ही गदऊ की मां का स्वर्गवास हो गया था। और फिर गदऊ का पालन-पोषण पिता छोटेलाल ने किया। जो खुद गदऊ के मामा कल्लू के साथ अवैध शराब बेचने का काम करता था। इसके अलावा अपराध की दुनिया में भी छोटेलाल का दबदबा था। छोटेलाल दूसरे मामलों में कई बार जेल भी जा चुका था। गदऊ का बड़ा भाई हरीशचंद भी अपराध की दुनिया का जाना-माना नाम था। जिससे गदऊ काफी प्रभावित रहता था। गदऊ बचपन से ही अपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने लगा। यहीं वजह रहीं कि गदऊ ने छोटी उम्र में लड़ाई करना, धमकी देना, चोरी, झगड़ें जैसे क्राइम में अपनी पैठ बनानी शुरु कर दी। बड़ें भाई के जेल जाते ही गदऊ ने अपराध का गंदा धंधा संभाल लिया। और बस फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। और अपराध की दुनिया का बादशाह बन गया।

गौरतलब है समाचार प्लस के एक्जीक्यूटिव एडिटर प्रवीण साहनी ने अपराधियों के खिलाफ एक मुहिम छेड़ रखी है और भारत को क्राइम-मुक्त राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से चैनल पर 'वांटेड' नाम से एक प्रोग्राम प्रस्तुत करते है। इस प्रोग्राम के जरिए अभी तक कई खूंखार और मोस्ट वांटेड अपराधी सलाखों के पीछे पहुंच चुके है। प्रवीण 'वांटेड' प्रोग्राम के प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और एंकर है।

समाचार प्लस की मुहिम के कारण पुलिस 50 हजार के इनामी मोनू पहाड़ी, 12 लाख के इनामी भूरा, 85 हजार के इनामी सुरेंद्र सिंह उर्फ धारा, 50 हजार के ईनामी बदमाश जुगेंद्र उर्फ जुगला, 2 लाख के इनामी सुक्रमपाल तक पहुंची सकीं और उनको सलाखों के पीछे डाला। इनके अलावा "WANTED" प्रोग्राम में दिखाए गए 2 लाख के खूंखार अपराधी राहुल खट्टा और 2 लाख के इनामी बदमाश अनिल केहरा को पुलिस ने एनकांउटर में मार गिराया। अपनी 12वीं सफलता के तहत 50 हजार रुपए का ईनामी विनोद उर्फ़ गदऊ आज सलाखों के पीछे है।

प्रवीण साहनी ने सफलता के लिए यूपी पुलिस को भी बधाई दी। और अपराधियों के खिलाफ अपनी इस मुहिम को और तेज करने की बात कहीं।

"मैं इलाहाबाद पुलिस टीम को बधाई देना चाहूंगा, जिन्होने इस खूंखार अपराधी को गिरफ्तार किया। समाचार प्लस की इस सफलता से हमारा मनोबल और बढ़ा है। हम ऐसे ही काम करते रहेंगे और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुचाएंगे," प्रवीण साहनी ने कहा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को दिया बड़ा झटका, 1 लाख 75 हजार शिक्षामित्रों की नियुक्ति की रद्द

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में बिना योग्यता परीक्षा पास किए ही भर्ती किए गए करीब 1 लाख 75 हजार शिक्षकों की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। बता दें कि, शनिवार की छुट्टि होने के बावजूद भी जस्टिस डीवाई चंद्रचुड़, जस्टिस दिलीप गुप्ता और जस्टिस यशवंत वर्मा की बेंच ने इस मामले में कड़ा फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा मित्रों की भर्ती बरकारा रखने और उन्हें असिस्टेंट टीचर के रूप में समायोजित करने के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के वकीलों की दलीले सुनीं। हालांकि, शिक्षामित्रों की इससे पहले की नियुक्ति को लेकर वकीलों ने कहा था कि 'इनकी भर्ती अवैध रूप से हुई है।'

हाईकोर्ट ने आज कहा कि 'चूंकि ये टीईटी पास नहीं हैं, इसलि‍ए असिस्टेंट टीचर के पदों पर इनकी नियुक्ति नहीं की जा सकती।'

शिक्षामित्रों की ओर से वकीलों ने कोर्ट को बताया कि, शिक्षकों की भर्ती नियम बनाकर की गई है, इसलिए इनकी नियुक्ति में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। वकीलों की तरफ से ये भी दलील दी गई कि, शिक्षामित्रों की नियुक्ति प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों की कमी के कारण की गई थी।

बहरहाल, हाईकोर्ट ने वकीलों की सभी दलीलों को खारिज करते हुए आज अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट के इस फैसले से शिक्षामित्रों की मुश्किलें जरूरी बढ़ गई हैं।

सरकारी स्कूलों में पढ़ें अफसरों के बच्चे, नहीं तो निजी स्कूलों की फीस के बराबर दें पैसा: हाईकोर्ट

इलाहाबाद- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपने एक अहम फैसले में कहा है कि नौकरशाहों, नेताओं और सरकारी खजाने से वेतन या मानदेय पाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के बच्चों को सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य होगा। साथ ही ऐसा न करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान किया जाए। जिन अधिकारियों के बच्चे कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ें, वहां की फीस के बराबर रकम उनके वेतन से काट ली जाए। साथ ही ऐसे लोगों का कुछ समय के लिए इन्क्रीमेंट व प्रमोशन भी रोक लिया जाए। हाईकोर्ट का यह आदेश अगले शिक्षा सत्र से लागू किया जाएगा।

कोर्ट ने साफ किया कि जब तक इन लोगों के बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, वहां के हालात नहीं सुधरेंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार को छह माह के भीतर यह व्यवस्था करने का आदेश देते हुए कृत कार्यवाही की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने जूनियर हाईस्कूलों में गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापकों की चयन प्रक्रिया को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकारी स्कूलों की दुर्दशा सामने आने पर यह आदेश दिया है।

इसी के साथ कोर्ट ने जूनियर हाईस्कूलों में गणित व विज्ञान के सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए 1981 की नियमावली के नियम 14 के मुताबिक नए सिरे से चयन सूची तैयार करने का निर्देश भी दिया है।

गौरतलब है प्रदेश में तीन तरह की शिक्षा व्यवस्था है, अंग्रेजी माध्यम के कॉन्वेंट स्कूल, प्राइवेट स्कूल और बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित स्कूल। कोर्ट का यह फैसला, गणित-विज्ञान के सहायक अध्यापकों की भर्ती को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया। जिसमें बताया गया कि प्रदेश के एक लाख 40 हजार जूनियर व सीनियर बेसिक स्कूल है जिनमें टीचर्स के दो लाख 70 हजार पद रिक्त हैं। सैकड़ों स्कूलों में पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है तो कइयों में छत भी नहीं है। सरकार, नेता व अफसर इस बदहाली के बावजूद बेसिक शिक्षा के प्रति संजीदा नहीं हैं क्योंकि उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं बल्कि कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ते हैं।

 प्रदेशभर के नगर निगमों और जल संस्थानों में लगेगा एस्मा

इलाहाबाद: सरकार ने प्रदेशभर के नगर निगमों और जल संस्थानों में आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) को लागू करने का निर्णय किया है। ऐसे में अब निगम व जल संस्थान कर्मियों की हड़ताल अवैध व दंडनीय होगी। संविदा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर कई दिनों तक संविदा सफाईकर्मियों हड़ताल पर रहते है  साथ ही अन्य निगमों में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन करते है इस तरह की हड़ताल से निपटने के लिए सरकार ने सभी नगर निगमों और जल संस्थानों में छह माह के लिए एस्मा लगाया है।

सरकार का मानना है कि एस्मा लगाए जाने से निगम व जलसंस्थान के कर्मी हड़ताल नहीं करेंगे क्योंकि अब छह माह तक उनके द्वारा किसी तरह की हड़ताल अवैध होगी। एस्मा लगा होने पर हड़ताली निगम कर्मियों को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकेगा। आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के लिए ही सरकार एस्मा लगाती है। एस्मा लगाए जाने पर कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते हैं। एस्मा का नियम अधिकतम छह माह के लिए लगाया जा सकता है। एस्मा लगाए जाने के बाद भी हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को छह माह तक की कैद व दंड हो सकता है।

बीयर बार मालिक सचिन दत्ता के महामंडलेश्वर बनने पर खड़ा हुआ विवाद

इलाहाबाद- निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर सच्चिदानंद महाराज गिरि की नियुक्ती विवादों में घिर गई हैं। संत समाज ने एक ऐसे व्यक्ति को महामंडलेश्वर की पदवी पर विराजमान कर दिया है जो एक बिल्डर और बीयर बार मालिक रह चुका है। संन्यास लेने से पहले सचिन दत्ता उर्फ सच्चिदानंद नोएडा-दिल्ली एनसीआर में रियल स्टेट कारोबार से जुड़े थे, साथ ही उनका बीयर बार और डिस्को चलता था। इसलिए महामंडलेश्वर पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े हो गए है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि सच्चिदानंद ने संन्यास लेने के बाद घर-परिवार और बीयर बार के कारोबार से नाता तोड़ लिया था। इसलिए उनकी नियुक्ति को गलत नहीं ठहराया जा सकता। फिलहाल परिषद ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है। सच्चिदानंद के बारे में आरोप साबित होने पर उनसे महामंडलेश्वर की पदवी वापस ली जा सकती हैं।

इलाहाबाद में गुरु पूर्णिमा पर सच्चिदानंद गिरी को प्रयाग में महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई। यूपी के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव और पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह यादव ने उनका पट्टाभिषेक किया था। गौरतलब है गाजियाबाद के रहने वाले सचिन दत्ता अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्वर कैलाशानंद से पिछले 22 साल से जुड़े हैं। कैलाशानंद के सानिध्य में संन्यास लेने के बाद उनका नाम सच्चिदानंद महाराज गिरी हो गया।

संन्यास लेने से पहले सचिन दत्ता बालाजी कंस्ट्रक्शन के नाम से रियल स्टेट कारोबार से जुड़े थे। नोएडा के सेक्टर-18 में उनका बीयर बार और डिस्को भी चलता था। ये डिस्को दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा डिस्को है। 22 साल की उम्र में ही उन्होंने घर-परिवार त्याग दिया और संन्यासी हो गए। 

वहीं मामले पर सफाई देते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा, कि मामले की जांच कराई जाएगी और अगर शराब कारोबार चलाने की बात सही पाई जाती है तो सच्चिदानंद महाराज गिरि की पदवी रद्द कर दी जाएगी। निरंजनी अखाड़ा के नवनियुक्त महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि पर लगे आरोपों की जांच के लिए महंतों की चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। यह टीम उनके व्यावसायिक व परिवारिक रिश्तों की पड़ताल करेगी।

जांच निष्पक्ष एवं पूरी गहराई से हो, उसके लिए छह माह का समय तय किया गया है। जांच टीम अपनी रिपोर्ट निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर व अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को सौंपेगी। दोष साबित होने पर उनके महामंडलेश्वर बने रहने या पदमुक्त करने का फैसला अखाड़ा परिषद व निरंजनी अखाड़ा के पदाधिकारी मिलकर करेंगे।

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  • उमेश कुमार

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    उमेश कुमार समाचार प्लस के एडिटर इन चीफ हैं।

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