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इलाहबाद विवि छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह को यूपी सरकार देगी लक्ष्मीबाई पुरस्कार

इलाहाबाद- इलाहबाद यूनिवर्सिटी छात्र संघ की विवादित अध्यक्ष ऋचा सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार के लक्ष्मीबाई पुरस्कार के लिए चुना है। गौरतलब है राज्य सरकार ने पिछले महीने पुरस्कार प्राप्त करने वाली 86 महिलाओं की सूची का एलान किया था लेकिन उस वक्त उसमें ऋचा सिंह का नाम नहीं था ऋचा को भगवा ब्रिगेड (भाजपा के छात्र संघ) से लगातार लोहा लेने और बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ को कैम्पस में आमंत्रित किए जाने का विरोध करने के लिए जाना जाता है।

ऋचा ने सोमवार को एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि उन्हें इस पुरस्कार क्री प्राप्ति की सूचना इलाहबाद जिला प्राधिकरण से मिली। उन्होंने लखनऊ में महिला दिवस पर यह सम्मान पाने की सूचना एक प्रेस रिलीज जारी कर की है। अखबार को दिए बयान के मुताबिक, डिस्ट्रिक्ट प्रोबेशनरी ऑफिसर पुनीत कुमार मिश्रा ने बताया, 'पुरस्कार प्राप्त करने वाले लोगों की फेहरिस्त में ऋचा का नाम हाल ही में जोड़ा गया और मंगलवार को ही हमने उन्हें यह सूचना दी।' इसके साथ ही ऋचा को यह भी बताया गया कि अखिलेश यादव की सरकार ने विशेषकर यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए 5 बसें चलाने की उनकी मांग स्वीकार कर ली हैं। 

आपको बता दें, कि ऋचा ने पिछले साल अक्टूबर में फ्रेंड्स क्लब की टिकट पर यूनिवर्सिटी छात्र संघ का चुनाव जीता था। इस पार्टी को समाजवादी युवजन सभा का समर्थन प्राप्त था। अन्य 4 प्रमुख पद बीजेपी की छात्र इकाई एबीवीपी के उम्मीदवारों ने जीती थीं। तभी से, ऋचा के कैम्पस के परिषद लीडर्स के साथ विवाद बने रहते हैं।

हाल ही में ऋचा के पीएचडी एडमिशन को लेकर भी काफी विवाद हुआ है और उन्होंने इसके लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन को दोषी ठहराया। साल 2015 अक्टूबर में योगी आदित्यनाथ के कैम्पस में आने का उन्होंने पुरजोर विरोध किया था जिससे एबीवीपी के कार्यकर्ता व अधिकारी उनसे खासे नाराज थे।

इलाहाबाद यूनिर्सिटी की पहली महिला छात्रसंघ अध्यक्ष का प्रवेश फर्जी!

इलाहाबाद: जेएनयू के बाद अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय चर्चा में है। इलाहाबाद यूनिर्सिटी में आजादी के बाद पहली बार महिला छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर ऋचा सिंह ने जितना बड़ा इतिहास रचा। अब उतने ही बड़े विवादों में भी घिर गई हैं। ऋचा सिंह पर फर्जी तरीके से दाखिला लेने का आरोप है। छात्रनेता रजनीश द्वारा ऋचा सिंह पर लगाए गए आरोपों की जांच हुई है।

प्रोफेसर ए सत्यनारायण की जांच में ये खुलासा हुआ कि आरक्षण नियमों की अनदेखी कर शोधछात्रा को प्रवेश दिया गया। फिलहाल प्रोफेसर ने कुलपति को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। अब अगर रिचा सिंह का प्रवेश निरस्त हुआ तो उसे अध्यक्ष की कुर्सी गंवानी पड़ेगी।

बता दें कि, ऋचा सिंह ग्लोबलाइजेशन एण्ड डेवपलपमेंट स्टडीज में शोध छात्रा हैं। शोध में प्रवेश की दो सीटें थी। जिसमें एक सामान्य और एक ओबीसी कोटे के लिए थी। परन्तु नियमों व आरक्षण नीति की अनदेखी कर दोनों सीट सामान्य कर 27 मार्च 2014 को प्रवेश दे दिया गया। इस शिकयत पर कुलपति ने इसकी जांच डीन कला संकाय प्रो ए सत्यनारायण और प्रो वी पी सिंह को सौप दी।  अब जांच में यह बात सामने आई है की ऋचा सिंह का प्रवेश फर्जी था। 

वहीं, ऋचा सिंह का कहना है केंद्र सरकार और भाजपा के इशारे पर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।

उधर, JNU के कन्हैया और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की अध्यक्ष ऋचा को भाजपा के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ ने भटकी हुई आत्मा बताया है। योगी आदित्यनाथ ने तीखे शब्दों में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में जिन्ना पैदा नहीं होने दिया जाएगा। योगी ने एक बार फिर दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गलत फायदा न उठाया जाए। साथ ही कन्हैया का समर्थन करने वालों को भी चेताया है। योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर भी जोर दिया कि कन्हैया को अंतरिम जमानत मिली है और किन शर्तों पर यह न भूलें।

जेएनयू विवाद: राहुल गांधी के खिलाफ इलाहाबाद के सीजेएम कोर्ट में देशद्रोह का मामला दर्ज

इलाहाबाद: जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाले छात्रों का समर्थन करने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ इलाहाबाद के सीजेएम कोर्ट में देशद्रोह को मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ 1 मार्च तक सबूत पेश करने को कहा है। बुधवार को सीजेएम कोर्ट में राहुल के खिलाफ पीआईएल दायर की गई है।

बता दें कि, राहुल गांधी के खिलाफ इलाहाबाद के वकील और बीजेपी नेता सुशील मिश्र ने मंगलवार को कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। अर्जी में कहा गया है कि, राहुल ने जेएनयू में देशद्रोही नारेबाजी करने वालों के समर्थन में बयान देकर खुद भी देशद्रोही का काम किया है। अर्जी में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

सीजेएम कोर्ट ने जेएनयू मामले में राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा, 124, 124ए, 500 और 511 धारा लगाई है।

जेएनयू मसले पर सीजेएम कोर्ट के जज सुनील कुमार ने कहा कि, पहली नजर में राहुल गांधी के खिलाफ देशद्रोह को केस बनता है। इसलिए केस दर्ज किया गया है।

राहुल गांधी ने जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी के मामले में कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी को गलत बताकर उसकी निंदा की थी। उन्होंने जेएनयू कैंपस में जाकर भाषण भी दिया था। इसलिए कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ 124ए के तहत देशद्रोह का केस दर्ज किया है।

 राहुल गांधी के खिलाफ दायर अर्जी पर लखनऊ की सीजेएम कोर्ट में 27 फरवरी को सुनवाई होगी।

आला अधिकारी की शर्मनाक करतूत, संगम किनारे पेशाब करते कैमरे में हुए कैद

इलाहाबाद: एक ओर जहाँ भारत सरकार ने गंगा यमुना की सफाई के लिए अलग मंत्रालय बनाया है और उसी के तहत नामामि गंगे प्रोजेक्ट के जरिये उसकी सफाई के लिए करोड़ों रूपए खर्च कर रही है। वहीं उनके ही अफसर गंगा यमुना सरस्वती के त्रिवेणी संगम इलाहाबाद में खुलेआम पेशाब करते दिखाई दे रहे हैं। यमुना नदी में पेशाब करने वाले कोई मामूली अफसर नहीं है बल्कि इलाहाबाद के एडीएम नजूल ओपी श्रीवास्तव साहब हैं।

यमुना किनारे पेशाब करने के आरोपी इलाहाबाद के एडीएम नजूल ओपी श्रीवास्तव ने मीडिया में ख़बरें आने के बाद अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने पेशाब करने से साफ़ इंकार करते हुए कहा है कि प्रेस कांफ्रेंस में नाश्ता करने के बाद वह मंच से उतरकर नीचे हाथ धोने के लिए गए थे।

आरोपी एडीएम का कहना है कि उन्होंने वहां सिर्फ हाथ धोया था और पैंट ठीक करने के बाद वापस चले आए थे। उन्होंने पेशाब कर गंदगी फ़ैलाने से साफ़ इंकार किया है।

एडीएम ओपी श्रीवास्तव के मुताबिक़ वह सनातनधर्मी हैं और उन्हें गंगा-यमुना के धार्मिक महत्व का बखूबी अंदाज़ा है। उनके मुताबिक़ उन पर लगे आरोप निराधार हैं।

कारोबारी ललित वर्मा के क़त्ल के मामले में बीएसपी की महिला विधायक को मिली क्लीन चिट

इलाहाबाद: इलाहाबाद में तीन फरवरी को हुए कारोबारी ललित वर्मा के क़त्ल के मामले में बीएसपी की महिला विधायक पूजा पाल को क्लीन चिट मिल गई है। इलाहाबाद पुलिस ने क़त्ल की इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा करते हुए कहा है कि विधायक पूजा पाल और उनके भाई समेत नामजद कराए गए सभी सात लोगों को फर्जी फंसाया गया था और इस मामले से इन सभी लोगों का कोई लेना - देना नहीं था। पुलिस के मुताबिक़ कारोबारी को उसके चचेरे भाइयों ने ही बेइज़्ज़ती का बदला लेने और बीएसपी विधायक पूजा पाल को फर्जी फंसाने के लिए मौत के घाट उतारा था।

इलाहाबाद में ज्वेलरी का कारोबार करने वाले चालीस साल के ललित वर्मा ने कुछ दिनों पहले अपने चचेरे भाई विक्रम के साथ मिलकर रियल स्टेट का काम भी शुरू किया। शहर के धूमनगंज इलाके में पार्टी का दफ्तर बनाने के लिए बीएसपी विधायक पूजा पाल ने जो ज़मीन ली थी, उसके कुछ हिस्से पर ललित और विक्रम भी अपना हक़ जता रहे थे। दूसरी तरफ पैसों को लेकर ललित और विक्रम में पिछले कुछ दिनों से खटपट होने लगी थी। ललित ने विक्रम के भाई सुशील की पिटाई भी की थी।

पुलिस के मुताबिक़ विक्रम और उसका परिवार पिछले तीन महीने से ललित के क़त्ल की साजिश रच रहा था और उन्होंने तीन फरवरी की रात पाश इलाके सिविल लाइंस में रेलवे के आईजी के बंगले के बाहर ललित पर गोलियां बरसाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस वारदात के दौरान विक्रम खुद भी मामूली तौर पर ज़ख़्मी होकर अस्पताल में भर्ती हो गया। विक्रम ने इस केस का चश्मदीद गवाह होने का दावा करते हुए बीएसपी विधायक पूजा पाल, उनके छोटे भाई राहुल व पांच समर्थकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने तफ्तीश शुरू की तो पांच दिन बाद ही सच्चाई सामने आ गई। घटनास्थल के पास से मिले सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस का काम आसान कर दिया।

पुलिस ने साफ़ कर दिया है कि इस मामले में विधायक पूजा पाल समेत नामजद कराए गए सातों आरोपी बेगुनाह हैं और इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है। पुलिस ने ज़ख़्मी विक्रम को भी अस्पताल से निकालकर गिरफ्तार कर लिया है, जबकि वारदात में शामिल उसका बड़ा भाई सुशील व करीबी राजपाल अभी फरार हैं।

दरअसल विधायक पूजा पाल और उनके भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद यह मामला सुर्ख़ियों में आ गया है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विधायक ने खुद को सियासी वजहों से फंसाये जाने का आरोप लगाया था। पुलिस के खुलासे के बाद विधायक और उनके समर्थकों ने अब राहत की सांस ली है।

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