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इलाहाबाद यूनिर्सिटी की पहली महिला छात्रसंघ अध्यक्ष का प्रवेश फर्जी!

इलाहाबाद: जेएनयू के बाद अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय चर्चा में है। इलाहाबाद यूनिर्सिटी में आजादी के बाद पहली बार महिला छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर ऋचा सिंह ने जितना बड़ा इतिहास रचा। अब उतने ही बड़े विवादों में भी घिर गई हैं। ऋचा सिंह पर फर्जी तरीके से दाखिला लेने का आरोप है। छात्रनेता रजनीश द्वारा ऋचा सिंह पर लगाए गए आरोपों की जांच हुई है।

प्रोफेसर ए सत्यनारायण की जांच में ये खुलासा हुआ कि आरक्षण नियमों की अनदेखी कर शोधछात्रा को प्रवेश दिया गया। फिलहाल प्रोफेसर ने कुलपति को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। अब अगर रिचा सिंह का प्रवेश निरस्त हुआ तो उसे अध्यक्ष की कुर्सी गंवानी पड़ेगी।

बता दें कि, ऋचा सिंह ग्लोबलाइजेशन एण्ड डेवपलपमेंट स्टडीज में शोध छात्रा हैं। शोध में प्रवेश की दो सीटें थी। जिसमें एक सामान्य और एक ओबीसी कोटे के लिए थी। परन्तु नियमों व आरक्षण नीति की अनदेखी कर दोनों सीट सामान्य कर 27 मार्च 2014 को प्रवेश दे दिया गया। इस शिकयत पर कुलपति ने इसकी जांच डीन कला संकाय प्रो ए सत्यनारायण और प्रो वी पी सिंह को सौप दी।  अब जांच में यह बात सामने आई है की ऋचा सिंह का प्रवेश फर्जी था। 

वहीं, ऋचा सिंह का कहना है केंद्र सरकार और भाजपा के इशारे पर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।

उधर, JNU के कन्हैया और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की अध्यक्ष ऋचा को भाजपा के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ ने भटकी हुई आत्मा बताया है। योगी आदित्यनाथ ने तीखे शब्दों में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में जिन्ना पैदा नहीं होने दिया जाएगा। योगी ने एक बार फिर दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गलत फायदा न उठाया जाए। साथ ही कन्हैया का समर्थन करने वालों को भी चेताया है। योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर भी जोर दिया कि कन्हैया को अंतरिम जमानत मिली है और किन शर्तों पर यह न भूलें।

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