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कारोबारी ललित वर्मा के क़त्ल के मामले में बीएसपी की महिला विधायक को मिली क्लीन चिट

इलाहाबाद: इलाहाबाद में तीन फरवरी को हुए कारोबारी ललित वर्मा के क़त्ल के मामले में बीएसपी की महिला विधायक पूजा पाल को क्लीन चिट मिल गई है। इलाहाबाद पुलिस ने क़त्ल की इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा करते हुए कहा है कि विधायक पूजा पाल और उनके भाई समेत नामजद कराए गए सभी सात लोगों को फर्जी फंसाया गया था और इस मामले से इन सभी लोगों का कोई लेना - देना नहीं था। पुलिस के मुताबिक़ कारोबारी को उसके चचेरे भाइयों ने ही बेइज़्ज़ती का बदला लेने और बीएसपी विधायक पूजा पाल को फर्जी फंसाने के लिए मौत के घाट उतारा था।

इलाहाबाद में ज्वेलरी का कारोबार करने वाले चालीस साल के ललित वर्मा ने कुछ दिनों पहले अपने चचेरे भाई विक्रम के साथ मिलकर रियल स्टेट का काम भी शुरू किया। शहर के धूमनगंज इलाके में पार्टी का दफ्तर बनाने के लिए बीएसपी विधायक पूजा पाल ने जो ज़मीन ली थी, उसके कुछ हिस्से पर ललित और विक्रम भी अपना हक़ जता रहे थे। दूसरी तरफ पैसों को लेकर ललित और विक्रम में पिछले कुछ दिनों से खटपट होने लगी थी। ललित ने विक्रम के भाई सुशील की पिटाई भी की थी।

पुलिस के मुताबिक़ विक्रम और उसका परिवार पिछले तीन महीने से ललित के क़त्ल की साजिश रच रहा था और उन्होंने तीन फरवरी की रात पाश इलाके सिविल लाइंस में रेलवे के आईजी के बंगले के बाहर ललित पर गोलियां बरसाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस वारदात के दौरान विक्रम खुद भी मामूली तौर पर ज़ख़्मी होकर अस्पताल में भर्ती हो गया। विक्रम ने इस केस का चश्मदीद गवाह होने का दावा करते हुए बीएसपी विधायक पूजा पाल, उनके छोटे भाई राहुल व पांच समर्थकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने तफ्तीश शुरू की तो पांच दिन बाद ही सच्चाई सामने आ गई। घटनास्थल के पास से मिले सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस का काम आसान कर दिया।

पुलिस ने साफ़ कर दिया है कि इस मामले में विधायक पूजा पाल समेत नामजद कराए गए सातों आरोपी बेगुनाह हैं और इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है। पुलिस ने ज़ख़्मी विक्रम को भी अस्पताल से निकालकर गिरफ्तार कर लिया है, जबकि वारदात में शामिल उसका बड़ा भाई सुशील व करीबी राजपाल अभी फरार हैं।

दरअसल विधायक पूजा पाल और उनके भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद यह मामला सुर्ख़ियों में आ गया है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विधायक ने खुद को सियासी वजहों से फंसाये जाने का आरोप लगाया था। पुलिस के खुलासे के बाद विधायक और उनके समर्थकों ने अब राहत की सांस ली है।

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