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मानसिक बीमारी की चपेट में नैनी सेन्ट्रल जेल के कैदी

इलाहाबाद- इलाहाबाद की नैनी सेन्ट्रल जेल में बंदियों की हालत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में खुलासा किया है कि नैनी सेन्ट्रल जेल के माहौल के चलते वहां बंद इकतीस कैदी गंभीर मानसिक बीमारियों की चपेट में हैं। इनमे से कई बंदियों की हालत तो इतनी बदतर हो चुकी है कि उन्हें पागलखाने भेजे जाने की सिफारिश की गई है। इसके बावजूद जेल में अभी तक इनके इलाज के कोई इंतजाम नहीं किये गए हैं। हालत बिगड़ने पर इन्हे शहर के सरकारी अस्पतालों से दवाएं दिलाई जाती हैं। हैरान कर देने वाली बात यह है कि गंभीर मानसिक बीमारियों के शिकार सभी इकतीस बंदियों में कोई भी ऐसा नहीं हैए जिसे जेल में दाखिले तक कोई मानसिक बीमारी थी। साफ है कि जेल के बदतर हालात और वहां हो रहे सलूक के चलते ही यह इकतीस लोग आज पागलखाने भेजे जाने की हालत में हैं। एनएचआरएम ;नेशनल ह्यूमन राइट कमीशनद्ध के सदस्य एससी सिन्हा की अगुवाई में जेल का निरीक्षण करने वाली आयोग की टीम ने भी यह माना है कि कैदियों के मानसिक रूप से बीमार होने में जेल में उनके साथ हो रहा बर्ताव ज़िम्मेदार है। हालांकि आयोग का कहना है कि जेल में कैदियों के साथ बरता जा रहा सलूक ही उनकी इस हालत के लिए अकेले ज़िम्मेदार नहीं है और उसकी कुछ दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। लेकिन सारी वजह जेल से ही जुडी हुई हैं। 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इलाहाबाद में मानवाधिकार से जुड़े बावन मामलों की सुनवाई की। आयोग के सदस्य एससी सिन्हा व दूसरे लोगों ने शिकायत पर इलाहाबाद की नैनी सेन्ट्रल जेल का निरीक्षण कर वहां के हालात का भी जायज़ा लिया। छानबीन में आयोग को पता चला कि जेल के हालात कतई बंदी सुधार गृह के मानकों के मुताबिक़ नहीं हैं। कैदियों से दिन भर काम तो लिया जाता हैए लेकिन पैसों की कमी के चलते उन्हें उनका मेहनताना नहीं दिया जाता। बंदी रक्षकों द्वारा कई कैदियों की पिटाई किये जाने और उनके साथ अमानवीय बर्ताव की भी शिकायतें सामने आईं। आयोग को यह भी पता चला कि जेल में आने के बाद से यहाँ रह रहे इकतीस कैदी गंभीर मानसिक बीमारियों का शिकार हो गए हैं। कई को तो इलाज के लिए बनारस के पागलखाने भेजे जाने की भी सिफारिश की गई  है। एक कैदी को तो तीन साल पहले ही बनारस भेजा जाना थाए लेकिन उसे आयोग का कार्यक्रम आने के बाद इसी महीने भेजा गया है।  आयोग ने इस मामले में ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने का आदेश दिया है। 

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