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वाराणसी मूर्ति विसर्जन और बवाल: पुलिस से भिड़े संत समर्थक, चार थाना क्षेत्रों में लगा कर्फ्यू हटा

वाराणसी- साधु-संतों ने 22 सितंबर को हुए बर्बर लाठीचार्ज के विरोध में सोमवार को अन्याय प्रतिकार यात्रा निकाली, लेकिन इस दौरान यहां पुलिस और प्रर्दशनकारियों के बीच जमकर हिंसक झड़प हुई। जिसके बाद चार पुलिस स्टेशनों में कर्फ्यू का एलान कर दिया गया। करीब 2 घंटे बाद हालात सामान्य होने पर कर्फ्यू हटा लिया गया। लेकिन तनाव को देखते हुए शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है। गोदौलिया, गिरजाघर, चौक, दशाश्‍वमेधघाट मार्ग, मदनपुर और बांस फाटक जैसे इलाके जहां कर्फ्यू लगाया था, वहां बैरिकेडिंग कर लोगों को जाने से रोका गया। पुलिस ने मामले में करीब 29 लोगों को हिरासत में लिया है। उधर, बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने खुद वाराणसी के एसएसपी आकाश कुलहरी को फोन कर शहर में शांति-व्‍यवस्‍था बनाए रखने को कहा है।

दरअसल, 22 सितंबर को गंगा में ही गणेश प्रतिमा विसर्जन पर अड़े लोगों पर हुए पुलिस ने देर रात लाठीचार्ज कर दिया था। जिसके खिलाफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 5 अक्तूबर यानि सोमवार को मैदागिन के टाउनहाल से दशाश्वमेध तक अन्याय प्रतिकार यात्रा निकालने का फैसला किया था। तय कार्यक्रम के अनुसार दोपहर साढ़े बारह बजे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद केदारघाट स्थित अपने आश्रम से टाउनहाल के लिए पैदल ही निकले। यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। जुलूस के गोदौलिया पहुंचते ही कुछ अराजक तत्‍वों ने पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया। पुलिस की जीप समेत कई बाइकों में आग लगा दी गई। मामला बढ़ता देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस लगातार आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट से फायरिंग करती रही।

इस दौरान साधु-संतों के साथ-साथ आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। कवरेज के दौरान कुछ पत्रकारों को भी चोटें आई हैं। डीएम राजमणि यादव ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि मंगलवार को शहर के सभी स्‍कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। इसमें माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड सहित सीबीएसई और आईसीएसई के सभी स्‍कूल शामिल हैं।

कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया कि यात्रा के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने शांति और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। उन्‍होंने नगरवासियों से किसी भी प्रकार की अफवाहों में न आने की अपील की है। फिलहाल, स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। इसके अलावा प्रशासन की तरफ से सोशल मीडिया, वेबसाइट, व्‍हॉट्सएप और फेसबुक पर पैनी नजर रखी जा रही है। यदि इन माध्यमों से किसी भी प्रकार की कोई गलत सूचना या अफवाह फैलाई जाती है तो ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिकार यात्रा में देशभर के साधु-संतों के साथ ही साध्वी प्राची और चक्रपाणि महाराज भी शामिल थे। इस दौरान साध्वी प्राची ने कहा समाचार प्लस से फोन पर बात की और बताया कि प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन को लेकर रास्ता नहीं निकाला। साथ ही उन्‍होंने कहा कि जब तक सीएम अखिलेश खुद साधु-संतों पर हुए लाठीचार्ज के लिए माफी नहीं मांगते तब तक आंदोलन चलता रहेगा।

उन्होने आगे कहा, "भीड़ अभी पूरी तरह से आक्रोशित है, बनारस में कुछ भी हो सकता है। प्रशासन चाहता क्या हैं। हिंसा में हमारे कई समर्थकों को चोटें आईं है, हम शांति से जा रहे थे, लेकिन इस तरह निहत्थे लोगों पर बर्बरकता पूर्वक लाठीचार्ज करना कहां कि इंसानियत हैं।"

बवाल के कारण बीच रास्ते में फंसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द से अधिकारियों ने मठ चले जाने का आग्रह किया। स्वामी जी ने शांतिपूर्ण तरीके से दशाश्वमेध घाट तक जाकर यात्रा पूरी करने की बात कही। इसके बाद स्वामी जी के नेतृत्व में कुछ लोग दशाश्वमेध पहुंचे। यहां से स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द और बालकदास शिवजी की पालकी लेकर नाव से विद्यामठ रवाना हो गए। उनके साथ रहे विधायक अजय राय व अन्य लोग दूसरे रास्तों से लौट गए।

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