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मुलायम ने मंत्रियों और विधायकों को मंच पर लगाई फटकार

लखनऊ: सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर संगठन और सरकार के कामकाज को लेकर जमकर नाराजगी जाहिर की। बुधवार को जनेश्वर मिश्रा के 83वीं जयंति समारोह में मुलायम सिंह कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। मुलायम ने दो टूक कहा कि संगठन मजबूत नहीं है। 56 मंत्री हैं लेकिन कोई चुनाव को लेकर काम नहीं कर रहा है। मंत्रियों के कामकाज को लेकर मुलायम के पूछे सवाल पर कार्यकर्ताओं ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। मुलायम ने दो टूक चेताया मंत्रियों का जनता पर कोई विश्वास नहीं है। विश्वास जीतने की कोशिश होना चाहिये।

मुलायम ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चेतावनी भरे लहजे में समझाया जो ठीक नही हैं उनकी छवि ठीक करें। मंत्री के डर से लोग जबाब में हाथ नही उठा रहे हैं अगर अभी मुख्यमंत्री और मंत्री को हटा दें तो सारे असंतुष्ट कार्यकर्ता अपना हाथ उठाकर मेरा समर्थन करेंगे।

लोकसभा चुनाव में कम सीटें जीतने की टीस अभी भी मुलायम सिंह यादव के चेहरे और नाराजगी में साफ नजर आयी। मुलायम ने भरे मंच से अखिलेश सरकार के मंत्रियों की क्लाय लगाते हुए कहा कि, मंत्री केवल एसी में बैठकर अधिकारियों से सलामी लेने में मशगुल हैं। जनता के बीच निकलने की हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं।

मुलायम की नाराजगी यहीं नहीं थमीं उन्होंने लोकसभा चुनाव में हार की वजह की रिपोर्ट अब तक पार्टी की ओर से नहीं दिये जाने पर भी गुस्सा दिखाते हुए कहा, आज घोषणा पत्र का वादा पूरा करने के बाद भी चुनाव में केवल पांच सीटें आयी। लोग कहते हैं सारे सदस्य हमारे परिवार के हीं हैं, चुनाव में हार की क्या वजह रही आज तक मुझे रिपोर्ट नहीं दी गयी, न तो मंत्रियों ने रिपोर्ट दी और नहीं प्रदेश अध्यक्ष ने दी। पार्टी की क्या कमियां हैं हमसे छुपाया जा रहा है ये ठीक नहीं है।

नाराजगी के चरम पर मुलायन ने दावा किया कि लोहिया के विचार को लेकर समाजवादी पार्टी बनायी और 11 महीने में ही समाजवादियों की सरकार बना दी। लोगों से जो रिपोर्ट मेरे पास आयी है कई मंत्री इसबार चुनाव खुद हार जायेंगे। मुलायम ने नाराजगी भरे लहजे में कहा किए अब देखता हूं कि कौन मंत्री कितने सीटें जीता कर लाता है।


मुलायम ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मानसून सत्रे के दौरान लोकसभा में ऐसा पहली बार हुआ जब मुझे बोलने तक का मौका नहीं दिया गया। मुलायम ने इसकी वजह लोकसभा में संख्याबल का कम होना बताया। मुलायम ने कहा कि अगर 30 सीटें भी लोकसभा चुनाव मे मिल जाती तो केन्द्र की सरकार बनाने में समाजवादी पार्टी की बडी भूमिका होती। सारे सियासी दल सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट हो जाते। पार्टी ने एक बेहतर मौका गंवा दिया वरना दिल्ली में समाजवादियों की सरकार बन जाती।


मंच पर कई ऐसे मौके आये जब मुलायम ने सीधे मुख्यमंत्री और मंत्रियों से कार्यकर्ताओं के सामने सवाल पूछे। संतोषजनकर उत्तर नहीं मिलने पर भरे मंच से फटकार भी लगायी। चाहे लोकसभा चुनाव के हार की समीक्षा की रिपोर्ट नहीं भेजने का मामला हो या फिर संबोधन को गंभीरता से नहीं सुनने का मामला हो। मुलायम के गुस्से के आगे कार्यकर्ता तो खुश नजर आये लेकिन मंत्रियों को होश उडे रहे। मुलायम ने मंच से ही ऐलान कर दिया कि सारी सच्चाई जानने के लिए साईकिल यात्रा के बाद सारे जिला शहर अध्यक्षों और उसके बाद विधायकों की बैठक बुलायेंगे। चेतावनी भरे लहजे में ये भी कहा कि कौन क्या कर रहा है बंद कमरे की बैठक में सारी जानकारी मिल जायेंगी।

इस मौके पर मुलायम ने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी भी अब कांग्रेस के रास्ते पर चल रही है। कांग्रेस के समय में सबसे ज्यादा लोगों को फंसाया गया।

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