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कुशीनगरः सपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने भाजपा की केन्द्र और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है।

एक कार्यक्रम शिरकत करने आये विपक्ष के नेता रामगोविन्द चौधरी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की तुलना द्रोपदी से करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन काल में थोड़ी सी महंगाई बढ़ने पर सुषमा स्वराज बाल खोलकर सड़क पर उतर जाती थी लेकिन आज मंहगाई चरम पर है लेकिन उनके मुंह से आवाज नहीं निकल रही है। 

नेता प्रतिपक्ष ने सीएम योगी की आलोचना करते हुए कहा कि सीएम साहब कहते हैं रामराज्य आ गया...जहां छोटी-छोटी बच्चियों के साथ रेप हो, बैंक डकैती हो, लूट भ्रष्टाचार हो, क्या यही रामराज्य है ।

कश्मीर का हालत पर केन्द्र सरकार पर हमला बोलते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता रामगोविन्द चौधरी ने कहा कि कश्मीर में हालात खराब हैं। आज वहां जवानों के सिर काटे जा रहे हैं लेकिन सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

प्रदेश की सरकारी नौकरी की परीक्षाओं धांधली पर गंभीर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश मे पहली ऐसी सरकार है जिसके कार्यकाल में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में इतनी बड़ी धांधली हो रही है। कई परीक्षाएं ऐसी हो रही हैं जिनका रिजल्ट पहले आ रहा है और कापी बाद में जांची जा रही है। 

बहराइचः जिले की विधायक व प्रदेश सरकार की बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल की कुम्भकर्णी नींद आखिरकार टूट ही गई। 50 दिनों में हुए 80 मासूमों की मौत के बाद मंत्री ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया और दो सगे भाइयों की हुई मौत के बाद उनके घर पहुँच कर ढांढस बंधाया। मंत्री की दारियादिली अगर पहले नजर आ जाती तो शायद कई मासूमों की जान बच जाती। 

जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। बच्चों का इलाज जमीन पर हो रहा है तो कही एक बेड पर तीन मासूम इलाज कराने को मजबूर हैं।

ऐसे हालात तब है जब उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल व सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा का गृह जनपद बहराइच है।

यहीं नहीं मंत्री के आवास से जिला अस्पताल की दूरी मात्र 200 मीटर हैं बावजूद इसके अभीतक मंत्री को बच्चे की हो रही मौत का सुध लेने को समय नहीं मिला।

समाचार प्लस पर खबर चलने के बाद मंत्री ने समय की नजाकत को भांपते हुए तुरंत पीड़ित के घर पहुंच गईं और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। 

उन्होंने अधिकारियों को मृतक बच्चों के परिजनों को उनके आवास व घर में शौचालय बनाने के निर्देश दिए।

पीड़ित के घर से मंत्री सीधे जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में पहुँचीं और कैमरे के फ्लैश को चमकता देख वह हर बच्चे से अपनापन दिखाते हुए हालचाल पूछा। तीमारदारों से सही इलाज होने की बात पूछी। सीएमओ व सीएमएस को बेहतर  इलाज करने के निर्देश दिए। 

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अब अस्पताल में सभी बच्चों का उपचार हो रहा है। डॉक्टरों की ड्यूटी लगा दी गई है। नए भवन में भी मरीज भर्ती है जहां पर उनका उपचार चल रहा है।

दो सगे भाइयों की हुई मौत की जानकारी मिलते ही मैं उनके घर पहुँच कर परिजनों से मिली। अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल्द से जल्द उनको आवास व शौचालय बनाने के निर्देश दिए है। 

इलाहाबादः नोएडा व लखनऊ में हुए स्मारक घोटाले को लेकर बीएसपी सुप्रीमो मायावती को आने वाले दिनों में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मायावती राज में हुए स्मारक घोटाले को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए इस मामले में चल रही विजलेंस जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है।

अदालत ने यूपी सरकार से स्टेटस रिपोर्ट एक हफ्ते में कोर्ट में पेश करने को कहा है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई के दौरान तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा है कि जनता के धन का दुरूपयोग करने का कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए। दोषी कितना भी रसूखदार हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए। अदालत ने विजलेंस जांच की धीमी रफ़्तार पर भी सवाल उठाए हैं और यूपी सरकार से पूछा है कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई या एसआईटी को सौंप दी जाए। 

अदालत के इस रुख से बीएसपी मुखिया मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि न तो विजिलेंस ने मायावती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और न ही लोकायुक्त की रिपोर्ट में उन्हें लेकर कोई टिप्पणी की गई है, लेकिन सीबीआई की विस्तृत जांच होने पर तत्कालीन सरकार की मुखिया होने के नाते वह भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।

मामले की जांच विजिलेंस से वापस लेकर सीबीआई को सौंपे जाने की मांग को लेकर मिर्ज़ापुर के सामाजिक कार्यकर्ता भावेश पांडेय उर्फ़ शशिकांत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की हुई है। चीफ जस्टिस डीबी भोंसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की डिवीजन बेंच इस मामले में सत्ताइस सितम्बर को फिर से सुनवाई करेगी। सत्ताइस सितम्बर को होने वाली सुनवाई के दौरान यूपी सरकार को न सिर्फ विजिलेंस जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी होगी, बल्कि मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने के मसले पर अपना रुख भी साफ़ करना होगा।  

गौरतलब है कि मायावती ने 2007 से 2012 तक के अपने कार्यकाल में लखनऊ व नोएडा में अम्बेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, ईको पार्क, नोएडा का अम्बेडकर पार्क, रमाबाई अम्बेडकर मैदान और स्मृति उपवन समेत पत्थरों के कई स्मारक तैयार कराए थे। इन स्मारकों पर सरकारी खजाने से 41 अरब 48 करोड़ रुपये खर्च किये गए थे।

आरोप लगा था कि इन स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर घपला कर सरकारी रकम का दुरुपयोग किया गया है। सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले की जांच यूपी के तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा को सौंपी गई थी। लोकायुक्त ने 20 मई 2013 को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में 14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार का घोटाला होने की बात कही।  

लोकायुक्त की रिपोर्ट में कहा गया था कि सबसे बड़ा घोटाला पत्थर ढोने और उन्हें तराशने के काम में हुआ है। जांच में कई ट्रकों के नंबर दो पहिया वाहनों के निकले थे। इसके अलावा फर्जी कंपनियों के नाम पर भी करोड़ों रूपये डकारे गए। लोकायुक्त ने 14 अरब 10 करोड़ रूपये से ज़्यादा की सरकारी रकम का दुरूपयोग पाए जाने की बात कहते हुए डिटेल्स जांच सीबीआई अथवा एसआईटी से कराए जाने की सिफारिश की थी।

सीबीआई अथवा एसआईटी से जांच कराए जाने की  सिफारिश के साथ ही बारह अन्य संस्तुतियां भी की गईं थीं। लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट में कुल 199 लोगों को आरोपी माना गया था। इनमे मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा के साथ ही कई विधायक और तमाम विभागों के बड़े अफसर शामिल थे। 

पूर्व की अखिलेश सरकार ने लोकायुक्त द्वारा इस मामले में सीबीआई अथवा एसआईटी जांच कराए जाने की सिफारिश को नजरअंदाज करते हुए जांच सूबे के विजिलेंस डिपार्टमेंट को सौंप दी थी। विजिलेंस ने एक जनवरी साल 2014 को गोमती नगर थाने में नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा समेत उन्नीस नामजद व अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू की। क्राइम नंबर 1/2014 पर दर्ज हुई एफआईआर में आईपीसी की धारा 120 ठ और 409 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकरीबन पौने पांच साल का वक्त बीतने के बाद भी अभी तक न तो इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो सकी है और न ही विजिलेंस अपनी जांच पूरी कर पाई है।            

 

झांसीः सीपरी बाजार अंतर्गत ग्वालियर पर रोड दो पक्षों में खूनी संघर्ष में बीच बचाव करने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति को दबंगों ने इतनी बेरहमी से पीटा कि वह अधमरा सा हो गया। बीच सड़क पर इस खूनी संघर्ष को जिसने देखा उसका दिल दहल गया। आनन फानन में घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।

जिसके बाद ग्वालियर चौकी इंचार्ज अपने ड्राइवर के साथ घटनास्थल पर अकेले ही जा पहुंचे। इस खूनी संघर्ष में दबंग इतने बेखौफ थे कि पुलिस को देख कर भी एक दूसरे पर हमला बोलते रहे।

ग्वालियर चौकी में तैनात दरोगा ने बुजुर्ग को बचाने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन दबंग दरोगा से ही भिड़ गए, जिसके बाद दरोगा ने बड़ी मुश्किल से अकेले ही दो तीन बदमाशों को अपने चंगुल में ले लिया।

दबंगों ने अपने को दरोगा के चंगुल से छुड़ा कर फिर बुजुर्ग पर हमला कर दिया जिसके बाद दरोगा ने बुजुर्ग को बचाने के लिए दबंगों को सड़क पर दौड़ा लिया और अपनी पिस्टल निकाल ली। इसके बाद दरोगा और उनके चालक बड़ी मुश्किल से दो दबंगों को पकड़कर थाने ले आए।

हमले में घायल गब्बर सिंह उम्र करीब 70 वर्ष ने बताया कि वह अपनी ट्राली बनवा रहे थे इसी दौरान दो पक्षों के बीच दारू की दुकान पर बियर खरीदने को लेकर विवाद हो गया जिसके बाद उन्होंने दोनों पक्षों का बीच बचाव करने की कोशिश लेकिन दोनों ही पक्ष उनके ऊपर हावी होकर हमला बोल दिया। 

इस खूनी संघर्ष में अगर चौकी के दरोगा समय से नहीं पहुंच गए तो दबंग युवक बुजुर्ग की हत्या कर सकते थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया की सभी दबंग युवक काफी नशे की हालत में थे।

 

सीतापुरः मिश्रिख से भाजपा सांसद को उस समय बहुत ही विरोध का सामना करना पड़ा जब वे सीतापुर के गोंदलामऊ ब्लॉक में बुखार से पीड़ित लोगों का हाल जानने के लिए पहुंची।

दरअसल गोंदलामऊ ब्लॉक के लगभग 12 गावों में बीते 25 दिन के भीतर बुखार से 41 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 100 से ज्यादा लोग अब भी बीमार है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें हालांकि मौके पर काम तो कर रही है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने भी देरी की है। जिसका नतीजा ये मौते है।

गांव वालों ने जब सांसद अंजुबाला को अपने गांव में देखा तो उन्होंने सबसे पहले पूछा कि अपने यहां आने में इतना देर क्यों की। गांव वालों व सांसद के बीच काफी बहस भी देखने को मिली।

कई लोग तो सांसद से ये शिकायत भी करते नजर आए कि आखिर उनके गांव में कई भी प्रधानमंती आवास क्यों नहीं बनाया गया।  सांसद यह कहते हुए नजर आई कि मैं यहां पर आप लोगों का दर्द बांटने आई हूं। लेकिन नाराज ग्रामीण वहां से इक्कठा होकर चले गए।

काफी मान मनोव्वल के बाद ग्रामीणों ने सासंद से मुलाकात की। सबसे हैरानी की बात ये है कि सीएमओ यह मानने को तैयार ही नहीं है कि बुखार से मौतें हुई है।

उनका मानना है कि दूषित पानी के चलते ऐसा हुआ है। यहां तक कि सीएमओ द्वारा गांव वालों को ब्लड रिपोर्ट तक नहीं सौपी गयी है। इस पर सांसद ने सीएमओ की जांच कराने बात कही। 

 

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