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लखनऊः बहुजन समाज पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि खुद को देश का चैकीदार कहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की नाक के नीचे हजारों करोड़ का बैंक महाघोटाला हो गया और सरकार सोने का बहाना करती रही।

उन्होंने कहा कि इससे दो अहम प्रश्न उठते हैं कि मोदी द्वारा देश को दिये गये इस आश्वासन का क्या हुआ कि ना खायेंगे और ना खाने देंगे। दूसरा यह कि जनधन योजना के अन्तर्गत करोड़ों गरीबों व मेहनतकश लोगों की गाढ़ी कमाई का रुपया क्या अपने चहेते उद्योगपतियों व धन्नासेठों को गबन करने के लिये ही सरकारी बैंकों में जमा कराया गया था। 

मायावती ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार का क्या इसे ही अपना गुड गर्वेनेन्स मानेगी कि उसके चहेते उद्योगपतिगण देश के धन को लूटकर और बड़े धन्नासेठ बनते रहे और बीजेपी सरकार उन्हें अपने गोद में बैठाये फिरती रही।

देश को ’विपक्ष-मुक्त’ बनाने के लिये ईडी, सीबीआई व आयकर विभाग आदि सरकारी मशीनरी का खुलकर दुरूपयोग करती रही जबकि दूसरी तरफ इनके धन्नासेठ प्रियपात्रों के लिये सरकार द्वारा बेईमानी व अनैतिकता के हर दरवाजे खोल दिये गये।

इसका नतीजा यह हुआ है कि धन्नासेठों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है तथा गरीब, किसान व बेरोजगार युवागण हर प्रकार से मोहताज का जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं।

मायावती ने कहा कि सीबीआई के मुताबिक ज्यादातर घोटाला सन 2017-18 अर्थात चालू वर्ष में हुआ है तो क्या इस सनसनीखेज बैंकिंग महाघोटाले के लिये नरेन्द्र मोदी सरकार कोई जिम्मेदारी अपने ऊपर लेंगे। क्या सरकार इसके मुख्य दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की हिम्मत रखती है। 

उन्होंने सवाल किया, ‘आखिर क्या कारण है कि देश में अरबों-खरबों रुपयों का घोटाला करने वाले धन्नासेठों - ललित मोदी, विजय माल्या व नीरव मोदी एण्ड कम्पनी - आदि के लोगों को बड़ी आसानी से देश छोड़कर विदेश भाग जाने दिया जाता है? 

 

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