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देहरादूनः यहां मंत्री के जनता दरबार में जहर खाकर पहुंचने वाले प्रकाश पांडेय की मौत के बाद राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ गए हैं। सरकारी तंत्र के रवैये की आलोचना शुरु हो गई है। प्रकाश की मौत पर सरकार दुख जता रही है लेकिन सवाल यह है कि समय रहते प्रकाश की शिकायतों पर गौर क्यों नहीं फरमाया गया। 

चार दिनों तक मौत से जूझने के बाद आखिरकार प्रकाश जिंदगी की जंग हार गया। प्रकाश ने दुनिया को अलविदा कर दिया लेकिन सिस्टम के आगे गिड़गिड़ाते प्रकाश की तस्वीर ये बताती रहेगी कि सिस्टम में कितना अंधेरा है। अंधेरा इसलिए क्योंकि कर्ज के बोझ तले हताश हो चुके प्रकाश ने पीएमओ से लेकर सीएम ऑफिस तक गुहार लगाई थी।

पेशे से ट्रांसपोर्टर प्रकाश ने लोन पर गाड़ियां ली थीं लेकिन साल 2016 में हुए भारी नुकसान के कारण प्रकाश कर्ज की किश्त अदा नहीं कर पा रहे थे। प्रकाश ने सरकार से उनके लोन का ब्याज माफ करने और किश्त चुकाने के लिए मोहलत मांगी थी। लेकिन मांग पर ध्यान नहीं दिया गया और हताश होकर प्रकाश ने आत्मघाती कदम उठा लिया। 

मौत से पहले भाजपा कार्यालय में जनता दरबार में प्रकाश ने जीएसटी और नोटबंदी को उनके नुकसान की बड़ी वजह बताया था। यही वजह है कि प्रकाश के परिजन उनकी मौत को आत्महत्या नहीं बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या करार दे रहे हैं।

प्रकाश की मौत पर सरकार दुख जताकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रही है। वहीं विपक्ष सरकार के रवैये को दुखद बताकर इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। इन सब के बीच घर के मुखिया को खोने का दर्द क्या होता है, न सरकार को और न ही विपक्ष को यह समझ में आ रहा है।

 

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