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गोरखपुरः इसे विडंबना ही कहिए कि योगी सरकार में न्याय पाने के लिए एक दूसरे योगी को आत्महत्या का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। और भी बड़ी विडंबना यह है कि योगी द्वारा आत्महत्या की घटना सीएम योगी के गृहजनपद गोरखपुर में हुई। इस योगी ने अपनी सुविधा के लिए नहीं, बल्कि एक मंदिर के निर्माण में आ रही अड़चनों से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास किया। 

गोरखपुर-देवरिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कुसम्ही जंगल में बरसों पुराना मां बनसंपति देवी का मंदिर है। यह मंदिर रेंजर व फोरेस्टर के तांडव का शिकार हो गया है। 17 अक्टूबर की रात वन विभाग के फोरेस्टर और रेंजर सहित वनरक्षक रात 1 बजे मंदिर पहुंचे और वहां रखी मूर्तियों को तहस-नहस कर दिया। मंदिर के साधुओं से बद्तमीजी की। उनकी दाढ़ी नोच कर पिटाई की। 

फोरेस्टर और उनके साथियों ने वहां रखी दान पेटी को उठा ले गए। मंदिर के महंत योगी फक्कड़ दास ने इसकी शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर अधिकारियों से तक की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

मामला क्या है

दरअसल मामला यह है कि पुराना धर्मशाला है। मंदिर में दान पेटिका साल में एक बार खोली जाती है। इस साल अभीतक दानपेटिका नहीं खोली गई थी। उसी पैसे से मंदिर का छोटा-मोटा निर्माण का काम होता है। 

निर्माण कार्य रोकने के लिए वन विभाग की टीम मंदिर पहुंची और दानपेटिका ले गई। 

आज सुबह पुजारी योगी फक्कड़ दास मंदिर के बगल में स्थित पीपल के पेड़ के ऊपर चढ़कर आत्महत्या करने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और योगी को मनाने लगे। इस बीच इसकी सूचना पुलिस को भी दी गई। 

खोराबार थाने के थानेदार योगी को काफी देरतक मनाया। उसके बाद ही योगी उस पेड़ से नीचे उतरे। योगी के आत्महत्या के प्रयास करने से फॉरेस्ट विभाग के अधिकारियों ने सभी सामान लौटा दिए। लेकिन दानपेटी का पता नहीं चल रहा है। 

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