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काशी में है पाकिस्तानी मंदिर, भारी संख्या में पहुंचते है हिंन्दु-मुसलमान

वाराणसी. धर्म नगरी काशी में है एक पाकिस्तानी मंदिर है। सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगता है। लेकिन, ये सच है दरसल बंटवारे के बाद जब कुछ हिन्दू पाकिस्तान से काशी शिवलिंग को गंगा में विसर्जित करने आये तो यहां लोगों ने उसे विसर्जित न कर उसे स्थापित कर दिया और तब ही से ये शिव लिंग पाकिस्तानी मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। सावन के महीने में खास तौर पर श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए पहुंचते है। यहां जितनी आस्था हिन्दुओं की है उतनी ही मुसलमानों की भी।

 

क्या कहते है पुजारी 

-वाराणसी के शीतला घाट पर स्तिथ इस मंदिर को लोग पाकिस्तानी मंदिर के नाम से जानते है।

-दरअसल इसकी कहानी भी थोड़ी अजीब है बताया जाता है। 

-जब बंटवारा हुआ तो सीताराम बोहड़ा नाम के व्यक्ति लाहौर से एक शिवलिंग लेकर काशी में प्रवाहित करने आये।

-उस दौरान घाट के नाविकों ने उन्हें रोका और शिवलिंग को यही स्थापित कर दिया।

 

पाकिस्तानी मंदिर के नाम से है पहचान 

-इस दौरान सीतराम के रिस्तेदारों ने मिलकर यहां मंदिर बनवा दिया।

-जिसके बाद से ही इस मंदिर को पाकिस्तानी मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।

-इसके अलावा सरकारी अभिलेखों में भी वाराणसी विकास प्राधिकरण में इसका नाम पाकिस्तानी मंदिर के नाम से दर्ज है।

-लेकिन आज लोग बड़े ही भक्ति भाव से यहां पूजा पाठ करते है। 

 

 

मुसलमान भी रखते है आस्था 

-वाराणसी में इस मंदिर का नाम भले ही पाकिस्तानी हो पर लोगो की यहां भक्ति अपरम्पार है।

-यहां आने वाले भक्त बड़ी ही श्रद्धा के साथ बाबा के दर्शन पूजन करते है।

-इसके अलावा मंदिर के पुजारी कहते है सावन में आस-पास से भारी संख्या में भक्त बाबा के जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते है।

-इस मंदिर से आस्था सिर्फ हिन्दुओ की है ऐसा नहीं है।

-बल्कि मुसलमान भी इस मंदिर में बेहद आस्था रखते है।

-जिस तरह से उनकी मस्जिद में आस्था है उसी जज्बे के साथ वो यहां भी आते है।

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