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अखिलेश सरकार का बोला 'शर्मनाक काम', पीठ पर पत्नी को लादकर इलाज के लिए भटकता रहा बुजुर्ग

कानपुर. एक तरफ प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव 'काम बोलता है' के नारे के साथ चुनावी मैदान में हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन द्वारा आम आदमी के साथ जो व्यवहार हो रहा है, वह सीएम के नारे की पोल खोलने वाला है। नया मामला एशिया के सबसे बड़े अस्पताल हैलेट है, जहां घटी एक घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहां एक बुजुर्ग दिन भर अपनी पत्नी को कंधे पर लादे घूमता रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसे स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया।

चल नहीं सकती है पत्नी

-फतेहपुर जिले के जुनिहा गांव में रहने वाले रामराज (62) अपनी पत्नी मालती के इलाज के लिए हैलट अस्पताल आये थे।
-इनकी पत्नी के पैर में हड्डी और फेफड़ों में पानी उतर आने की शिकायत है वह चल नहीं सकती है।
-हैलट आने पर रामराज को स्ट्रेचर नहीं मिला तो ये बुजुर्ग 55 साल की पत्नी को पीठ में लादकर इधर-उधर भटकता रहा।
-जहां यह बुजुर्ग हांफते-हांफते थक जाता तो पत्नी को बैठा देता और फिर से हिम्मत बांधता और पत्नी को पीठ में लाद कर चल देता। -इस दौरान हैलट के कर्मचारी और डॉक्टर उसकी ये हालत देखते रहे, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।

पीठ पर लादकर इधर-उधर भटकता रहा बुजुर्ग

-रामराज की पत्नी मालती के मुताबिक गरीब आदमी की कौन मदद करता है।
-स्ट्रेचर मांगा, लेकिन नहीं मिला तो पति पीठ पर लाद कर उसका एक्सरे कराने के लिए चल दिए।
-उन्होंने ने बताया कि इतना बड़ा अस्पताल है कि हमें तो यह भी नही पता है कौन सी जांच कहां होती है।
-इसी चक्कर में वो बहुत देर पत्नी को पीठ पर लादकर इधर-उधर भटकते रहे।

इससे पहले इलाज के अभाव में हो चुकी है नाबागिल की मौत

-28 अगस्त 2016 को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध हैलट अस्पताल में इलाज के अभाव में फजलगंज निवासी सुनील के बेटे अंश ने पिता के कंधे पर ही दम तोड़ दिया था।
-12 वर्षीय नाबालिग की मौत की खबर राजधानी से लेकर दिल्ली पीएमओ कार्यालय तक जा पहुंची। पीएमओ ने अपना सख्त रवैया अपनाते हुए जांच के आदेश थे।
-इस प्रकरण में डीएम की जांच में पांच लोग दोषी पाए गए हैं, लेकिन दुबारा इस तरह का मामला आने पर ये कहीं ना कहीं हैलेट अस्पताल के अमानवीय रैवये का उजागर करता है।

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