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पुराने और नए समाजवादियों के बीच उलझी सपा, गढ़ बचाना अखिलेश लिए बड़ी चुनौती

लखनऊ. यूपी के विधानसभा चुनाव में 300 सीटें जीतने का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी के लिए तीसरा फेज काफी महत्वपूर्ण है, इस फेज में 12 जिलों की 69 सीटों पर मतदान होगा। इन 12 जिलों को सपा का गढ़ माना जाता है। 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यहां की 55 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन पारिवार की लड़ाई में फंसी समाजवादी पार्टी और सीएम अखिलेश यादव के लिए इस चुनाव में पिछली बार की जीत को दोहरा पाना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि इन सीटों पर लड़ाई पुराने समाजवादियों और नए समाजवादियों के बीच देखने को मिल रही है।

अखिलेश कर चुके हैं जिक्र

-बता दें कि पार्टी के भीतर हो रही गुटबाजी को अखिलेश भी स्वीकार चुके हैं।
-दो दिन पहले इटावा की अपनी रैली में उन्होंने इशारों- इशारों में इसका जिक्र भी किया था।
-जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोग उन्हें हराना चाहते हैं।
-अखिलेश के बयान के बाद यह क्लियर हो गया था कि इस बार के चुनाव में इन सीटों पर पुराने समाजवादियों और नए समाजवादियों के बीच लड़ाई है।

इसलिए अखिलेश के लिए महत्वपूर्ण है यहां की सीटें

-अखिलेश के लिए इस विधानसभा चुनाव में 2012 की 55 सीटों को बनाए रखना प्रतिष्ठा का सवाल है।
-इटावा, औरैया उनका गृह क्षेत्र हैं तो फर्रुखाबाद व कन्नौज कर्मभूमि। ये जिले यादव परिवार के गढ़ माने जाते हैं।
-इटावा को लेकर अखिलेश यादव इसलिए गंभीर है, क्योंकि वे यहां के मूल निवासी हैं।
-वहीं उनकी पत्नी कन्नौज से लोकसभा सीट से सांसद हैं। इसके अलावे उनके भाई तेज प्रताप यादव मैनपुरी से सांसद हैं।

इन जिलों में खुलकर देखने को मिली थी खेमेबंदी

-पिछले दिनों चाचा-भतीजे के बीच चली जंग में सबसे ज्यादा खेमेबंदी भी इन जिलों में खुलकर देखने को मिली।
-दोनों खेमे ने नारेबाजी से लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया था।
-इटावा और फर्रुखाबाद में मुख्यमंत्री के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही जिलाध्यक्षों के परिवर्तन के साथ ही समूचे संगठन की ओवर हॉलिंग तक हुई।

शिवपाल के करीबियों को टिकट कटा

-इतना ही नहीं इन चार जिलों की सभी 13 सीटों पर सपा का कब्जा है। इसके बाद भी इस चुनाव में चार सिटिंग विधायक के टिकट काट दिए गए।
-टिकट कटने की जद में आने वाले इटावा के निर्वतमान विधायक रघुराज सिंह शाक्य, भरथना की निवर्तमान विधायक सुखदेवी वर्मा हैं।
-इसके अलावा फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज के निवर्तमान विधायक अजीत कठेरिया का भी टिकट कटा है, ये तीनों पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खास माने जाते हैं।
-जबकि औरैया जिले के विधूना के निर्वमान विधायक प्रमोद गुप्ता एलएस सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साढ़ू हैं।
-ये चारों फिलहाल चुनाव मैदान से बाहर हैं। न तो खुलेतौर पर विरोध कर रहे हैं और न ही पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवार के पक्ष में।
-इनका कुंडली मारना भी पेशबंदी का एक हिस्सा माना जा रहा है।

मैदान में डटा है अखिलेश विरोधी गुट

-दूसरी तरफ इन सभी सीटों पर शिवपाल सिंह यादव के समर्थक माने जाने वाले सजातीय उम्मीदवार भी लोकदल सहित अन्य दलों के जरिए मैदान में डटे हैं।
-चुनावी बिसात पर इनकी पहचान अखिलेश विरोधी गुट के रूप में हो रही है।
-इस लिहाज से भी इन चारों जिले की 13 सीटों की चुनाव परिणाम सीधे तौर पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है।

जयचंदों के भरोसे बीजेपी

-वहीं बीजेपी ने समाजवाद के इस गढ़ में सेंध लगाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।
-बीजेपी इटावा को भेदने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।
-बीजेपी के लिए इटावा की सभी सीटें अहम इसलिए भी हैं, क्योंकि यहां के आसपास की सीट पर सपा से बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
-लिहाजा, बीजेपी चाहती है कि वो सपा के राजनीतिक जयचंदों की मदद से समाजवादी गढ़ में घुसपैठ कर ले जाए।

मायावती हर रैली में करती हैं खेमेबंदी का जिक्र

-समाजवादी पार्टी में चल रही खेमेबंदी का जिक्र मायावती भी करती आ रही हैं।
-वह अपनी हर रैली में इस बात को दोहराती हैं और कहती हैं सपा दो खेमों में बंट चुकी है।
-मायावती यह भी कहती है दोनों खेमे एक दूसरे को हराने में लगे हुए हैं, जिसका लाभ बीएसपी को मिलेगा।

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