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सपा विधायक अरुण वर्मा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज,पीड़ि‍ता ने कलम बंद बयान में लिया था विधायक का नाम

 

लखनऊ.  सीएम अखिलेश यादव के करीबी विधायक अरुण वर्मा पर गैंगरेप का आरोप लगाने वाली युवती की शनिवार को हत्या कर दी गई थी। युवती का शव जयसिंहपुर कोतवाली के चोरमा गांव में बने पंचायत भवन के पीछे शनिवार की रात में बरामद हुआ था। इस मामले में सुल्तानपुर के सदर विधानसभा से सपा विधायक अरुण वर्मा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हो गया है। अरुण वर्मा और 8 लोगों के खिलाफ धारा 302 का केस दर्ज हो गया है। सुल्तानपुर में 27 फरवरी को मतदान होना है। 

 

 पीडिता ने कहा था हो सकती है उसकी हत्या

 

 -इस मामले में पीड़िता ने मीडिया के सामने अखिलेश के करीबी सपा विधायक अरुण वर्मा पर रेप का आरोप लगाया था।

 

-पीड़िता ने यह भी कहा था कि विधायक ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसका गैंगरेप भी करवाया था।

 

-पीड़िता ने अनीता सिंह पर भी उसे लगातार बेचने का आरोप लगाया था।

 

-युवती ने कई बार यह की कहा था कि उसकी हत्या की जा सकती है।

 

 

क्या है मामला

 

 -5 अक्टूबर 2013 को ग्राम चोरमा थाना जयसिंहपुर निवासी पीड़िता के पिता ने कोतवाली थाने पर प्राथमिकी लिखाई थी।

 

-जिसमें पीड़िता के पिता ने कहा था कि वे लोग 18 सितम्बर 2013 को डॉक्टर के दिखाने सुल्तानपुर शहर आए थे, जहां  से उनकी नाबालिक बेटी गायब थी।

 

-पुलिस ने तलाश तो शुरू कर दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कई दिनों बाद पीड़िता किसी तरह भागकर अपने पिता के पास पहुंची, जिसके बाद दोनों थाने पहुंचे।

 

 

अरुण वर्मा पर गैंगरेप का आरोप

 

 -पीड़िता ने बताया था कि जब मैंने विधायक का नाम लिया, तो पुलिस ने मेरी पिटाई की और कहा कि विधायक का नाम मत लेना।

 

-पुलिस और विधायक के गुर्गों के धमकाए जाने के बाद भी पीड़िता ने मीडिया के सामने विधायक पर गैंगरेप कराने का आरोप लगाया। 

 

-पीड़िता ने बताया कि उसे विधायक के पास ले जाया गया। जहां उसके साथ गैंगरेप हुआ।

 

-पीड़ित युवती ने कहा था कि गैंगरेप के बाद में उसे अनीता सिंह के हाथों बेच दिया गया, जिसके बाद अनीता सिंह ने भी उसे कई बार बेचा।

 

 

6 अक्टूबर को भागने में सफल रही महिला

 

 

-युवती के मुताबिक उसने कई बार भागने का प्रयास किया।

 

-जिसमें वह 6 अक्टूबर 2013 को काबमयाब हो पाई और बस स्टैंड पहुंची, जहां उसे उसके पिता मिल गए। 

 

-पीड़िता ने पुलिस पर विधायक और अनीता सिंह का साथ देने का आरोप भी लगाया।

 

 

पुलिस की कार्रवाई

 

 

-मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तो शुरू कर दी।

 

-लेकिन पुलिस की एफआईआर और वि‌वेचना में विधायक का नाम नहीं था।

 

-वहीं इस मामले में पुलिस ने दो आरोपिों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। 

 

-आरोप है कि ये विधायक सीएम अखिलेश के करीबी हैं जिसके कारण वे कानूनी कार्रवाई से बचते रहे। 

 

-कई सालों तक मामले पर घमासान चलता रहा, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।

 

 

2014 में निकाल दिया नाम

 

 

-सीओ सिटी वीपी सिंह ने जांच में 2 फरवरी 2014 को विधायक अरुण वर्मा, पूनम यादव व धीरेंद्र का नाम निकाल दिया।

 

-अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट भेज दिया।

 

-जहां अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम सुल्तानपुर की कोर्ट मे उनका विचार चल रहा है।

 

 

विधायक समेत 7 लोगों पर आरोप

 

 

-9 अक्टूबर 2013 को कोर्ट में इस कलमबंद बयान में पीड़िता ने जयसिंहपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अरूण वर्मा पर सात लोगों के साथ मिलकर गैंगरेप का आरोप लगाया था। 

 

-पीड़िता ने बयान में विधायक के अलावा पूनम यादव, धीरेंद्र, आशुतोष सिंह, मोनू खान, अंजुम खान, गुड्डू लाला व अनिता सिंह के भी घटना मे शामिल होना बताया था।

 

 

परेशान होकर पहुंचे थे हाईकोर्ट 

 

 

-पुलिस और प्रशासन की कारगुजारियों और नाकामी से आजिज आकर पीड़िता के पिता ने हाईकोर्ट का सहारा लिया था।

 

-जिसके बाद कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए पुलिस को दो हफ्ते में जांच कर रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया था।

 

-कोर्ट ने पुलिस को हिदायत दी थी कि यदि विवेचना में कोई खामी नजर आई तो जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी। 

 

-इस बीच कोर्ट ने रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष से पीड़िता को 7 लाख रुपए सहायता राशि भी दिलवाई थी।

 

 

पीड़ि‍ता ने कलम बंद बयान में लिया था विधायक का नाम

 

 

-पीड़िता के वकील सुशील कुमार सिंह के अनुसार कोर्ट के आदेश पर सख्त सुरक्षा के बीच 27 मई 2016 के अपने पहले के कलमबंद दिया था।

 

-जिसमें उसने विधायक अरूण वर्मा का नाम लिया था।

 

-वहीं इस बीच युवती की शादी हो चुकी थी और उसकी एक बच्ची भी है। 

 

-पीड़िता का आरोप था कि विधायक की तरफ से पीड़िता के परिवार को लगातार केस वापस लेने की धमकी मिलती रही।

 

-परेशान होकर कुछ दिनों पहले युवती के पिता ने इस मामले में विधायक को तलब करने की अर्जी कोर्ट में दी थी। सुनवाई के लिए 21 फरवरी तारीख दी गई थी।

 

 

सपा ने घोषित किया प्रत्याशी 

 

 

-वहीं इसी दौरान यूपी चुनाव भी आ गए और सपा की तरफ से एक बार फिर अरुण वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।

 

-जिसके बाद पीड़िता के परिजनों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

 

-पीड़िता का आरोप था कि आए दिन धमकी और केस वापस लेने के लिए विधायक और उनके गुर्गे घर तक आने लगे।

 

 

बाहुबली के तौर पर पहचाने जाते हैं अरुण वर्मा

 

 

-वर्ष 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में सदर विधानसभा सीट से सपा विधायक बने 24 वर्ष के अरुण वर्मा सदन में बैठने वाले सबसे कम उम्र के एमएलए के रूप में जाने जाते हैं। 

 

-वे अखिलेश के करीबी और बाहुबली के तौर पर पहचाने जाते हैं। 

 

-कहा ये भी जाता है अखिलेश के करीबी होने के चलते अरुण वर्मा को इस केस में अब तक पकड़ा नहीं जा सका है।

 

-वहीं एडिशनल एसपी ने बताया कि लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। 

 

-मामले की गहराई से जांच चल रही है। दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाएगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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