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वाराणसीः किराना घराना और बनारसी गायकी के जाने-माने प्रतिनिधि पद्मभूषण पं. छन्‍नूलाल मिश्र ने देश के सर्वप्रिय नेता अटल जी को गीत के जरिये श्रद्धांजलि अर्पित की है। पं. छन्‍नूलाल मिश्र से उनके वाराणसी के छोटी गैबी स्‍थित आवास पर विशेष मुलाकात की है।

बता दें कि पं छन्‍नूलाल मिश्र की धर्मपत्‍नी की इन दिनों गंभीर रूप से बीमार हैं। बावजूद इसके अटल जी को लेकर अपनी स्‍मृतियों को उन्‍होंने साझा किया है। सिर्फ इतना ही नहीं खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती के लिए दुनियाभर में पहचाने जाने वाले छन्‍नूलाल मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को अटल जी के विचारों को आगे बढ़ाने वाला बताया है।

पं. छन्‍नूलाल मिश्र जी के अनुसार अटल जी सिर्फ साहित्य और राजनीति की ही नहीं बल्कि संगीत की भी गहरी समझ रखते थे। उन्होंने कहा कि अटल जी के न रहने से हमारे देश को बहुत बड़ी क्षति हुई है। वह व्यक्तित्व अपने नाम की ही तरह ही अटल था। 

पद्मभूषण पं. छन्‍नूलाल मिश्र ने बताया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अटल जी को वह पिता की तरह मानते थे। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का बनारस से पुराना नाता रहा है। उनके जाने से देश में एक युग का अंत हो गया है। उनकी पूर्ति होना मुश्किल है। चूंकि उनका व्यक्तित्व अटल था, उनका नाम अटल था, तो वो सचमुच अटल थे भी। उनकी वाणी अटल थी, वो जो बोलते थे उसे करते थे। अब ऐसा कोई नहीं कर सकता, ये कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। 

पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी संसदीय सीट से प्रस्तावक भी रहे हैं, ने कहा कि अटल जी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गहरा नाता था। मोदी जी अटल जी को पिता की तरह मानते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में अटल जी की झलक दिखती है। वो उनके आदर्शों पर चल रहे हैं, लेकिन वो बहुत दुखी हैं, क्योंकि उन्होंने पिता तुल्य अटल जी को खो दिया है जो उन्हें हर मोड़ पर मार्गदर्शन करते थे

छन्‍नूलाल मिश्र ने यह भी बताया कि अटल जी को संगीत की अच्छी समझ थी। पुरानी स्‍मृतियों पर जोर देते हुए छन्‍नूलाल मिश्र ने बताया, ”एक बार हमने किशन महाराज और गिरजा देवी ने एक साथ उनके सामने प्रोग्राम किया था।”

पंडित छन्नूलाल मिश्र के अनुसार, ”उस प्रोग्राम में मैंने शिव तांडव पेश किया था, जिसकी अटल जी ने बड़ी तारीफ़ की थी। उनके अंदर संगीत की भी उतनी ही अच्छी समझ थी, जितनी अच्छी राजनीती और साहित्य की थी।” अटल जी की मृत्यु से भावुक हुए पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा खुद को गुनगुनाने से नहीं रोक पाए।

उन्होंने गीत के जरिये अपनी श्रद्धांजलि व्‍यक्‍त करते हुए कहा, ”नहीं रहा है कोई यहां पर, न कोई रहने आया है। चार दिनों की चटक चांदनी, फिर अन्धेरा छाया है। पांच तत्व का बना ये पुतला, इसी में ज्योति समाया है। झूठा सच्चा देख पड़े, ये सब भगवत की माया है। गलत है करता इसपर जगत गुमान, बाह रे बलमू, की पड़ी रही सुर सारी की रेत मैदान, बा रे बलमू।

 

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