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बरेलीः रहस्यमयी बुखार का आतंक मचा हुआ है। शहर से लेकर देहात तक हजारों लोग बुखार की चपेट में आ गए हैं। वहीं 100 से अधिक लोग काल के गाल में समा गए है, पर स्वास्थ्य विभाग 19 की मौत की बात कर रहा है। 

बुखार की दहशत के बाद स्वास्थ्य विभाग गांव में कैम्प लगाकर बीमार लोगां को दवा दे रहा है पर वही बरेली के जिला अस्पताल में बुखार के मरीजों की भीड़ जमा है। हर वार्ड में अधिकतर बुखार के मरीज ही नजर आ रहे है। 

हालत ये है कि बुखार के मरीजो की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त वार्ड बनाये गए हैं तो वहीं एक एक बेड पर दो दो मरीज भर्ती है। पिछले 24 घण्टे में 11 बुखार के मरीजों की  मौत हो गई है।

जबकि पिछले 10 दिनों में 100 से अधिक लोग काल के गाल में समा गए हैं। बुखार का सबसे ज्यादा असर बरेली के देहात क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। हजारों लोग बुखार की चपेट में आने के बाद बीमार चल रहे हैं तो वही बरेली का 350 बेड वाला जिला अस्पताल बुखार के मरीजों से भरा हुआ है। 

बरेली में बरसात के बाद हजारों लोग वायरल फीवर, टायफाइड और मलेरिया से पीड़ित हैं। जिसके चलते पिछले दस दिनों में 100 लोगों से अधिक की मौत हो चुकी है। ग्रामीण इलाकों में रहस्यमयी बुखार से ग्रामीण परेशान है और स्वस्थ्य विभाग की भी कुम्भकर्ण नींद खुली।

बरेली में पिछले 24 घण्टे में 11 लोगों की बुखार से मौत हो गई है। सीएमओ की माने तो बरेली जिले में अबतक 36 मौते हुई है पर बुखार से अभी तक 19 मौत की बात कही । पिछले दस दिनों में 19 लोगो की ही बुखार से मौत बताई जा रही है। 

 

वाराणसीः देश में पहली बार अंडर 23 कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन वाराणसी में होने जा हो रहा है। 8 सितंबर से होने वाले इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से कुश्ती खिलाड़ी आने शुरु हो गए हैं।

वाराणसी के चिरईगावं ब्लॉक के गौराकलां गांव में आयोजित भारत का यह पहला अंडर-23 कुश्ती प्रतियोगिता हो रहा है। 

पहली बार कुश्ती संघ की तरफ से अंडर 23 पुरुष और महिला कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है ।   

अंडर 23 कुश्ती चैंपियनशिप को लेकर आयोजकों ने बताया कि इस प्रतियोगिता में करीब 500 से ऊपर महिला और पुरुष खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं। प्रतियोगिता में कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। 

यह प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूर्वांचल के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा प्लेटफार्म साबित होने वाला है।

खिलाड़ियों की माने वह इस आयोजन से काफी कुछ सीख सकते हैं। प्रतियोगिता में आने वाले खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो इसके लिए आयोजकों ने काफी तैयारी की है । आयोजकों द्वारा प्रतियोगिता के लिए एक पंडाल तैयार किया गया है जिसमे मैट के दो अखाड़ा तैयार किया जा रहा है तो वहीं बरसात से बचने के लिए पंडाल को वाटरप्रूफ बनाया जा रहा है।

 

मेरठः एशियाड गेम्स में अपनी मेहनत का लोहा मनवा चुके सौरभ चौधरी ने एक बार फिर गोल्ड पर निशाना लगाया है। इससे पहले भी सौरभ एशिया के 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

उसके बाद लगातार खेलते हुए दूसरा 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में कांस्य पदक जीता है। एशियन गेम्स में इतनी छोटी उम्र में बड़ा करनामा करने वाले वो पहले भारतीय निशानेबाज रहे हैं। 

आईएसएसएफ चैंपियनशिप में 16 साल के सौरभ चौधरी ने निशानेबाजी के दम पर दस मीटर एयर पिस्टल के जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश प्रदेश और अपने परिवार का नाम रोशन किया है। इससे पहले भी मेरठ के गांव कलीना के रहने वाले सौरभ ने एशियाड गेम्स में भी गोल्ड पर निशाना लगाया था।

गुरुवार को फाइनल में सौरभ ने 245.5 अंक हासिल किए, जो जूनियर स्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड है। उधर भारत के ही अर्जुन चीमा (218.0) ने तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक जीता। 

सौरभ ने विश्व स्तरीय निशानेबाजी चैंपियनशिप के पांचवें दिन भारत के खाते में गोल्ड मेडल डाला है। इससे पहले उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम कांस्य पदक जीता था।

 इस टूर्नामेंट में भारत अब तक चार स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य पदक जीत चुका है। इस टूर्नामेंट के इतिहास में भारत का यह सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। उधर जूनियर निशानेबाजों के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए सीनियर्स खिलाड़ियों के प्रति निराशा देखने को मिली है।

 नई दिल्लीः इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज को गंवाने के बाद अब टीम इंडिया बची खुची साख बचाने के लिए पांचवे टेस्ट में उतरेगी। लेकिन इससे पहले ही विवाद हो गया।

टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने जब कहा कि उनकी टीम पिछले 15-20 सालों में विदेशों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम है, तो लोगों को हैरानी व्यक्त की। शास्त्री ने अपने इस बयान पर तर्क भी दिया लेकिन कई लोगों को उनका दिया तर्क गले नहीं उतरा।

एक फैन ने जब इस बारे में कुछ ऐसे आंकड़े सोशल मीडिया पर दिए तो भारतीय टीम के पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह इसे रीट्वीट करने से खुद को रोक नहीं सके। हरभजन ने इस तरह शास्त्री के बयान से असहमति जताई।

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज हारने पर विराट कोहली की टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने पुरजोर बचाव किया था। शास्त्री ने कहा था कि मौजूदा खिलाड़ियों ने वो सब हासिल किया है जो कोई अन्य पहले नहीं कर सका।

उनका दावा था कि मौजूदा टीम पिछले 15-20 साल में विदेशों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम है। भारतीय टीम चौथे टेस्ट में 60 रन से हार गई जिससे वह पांच मैचों की सीरीज में 1-3 से पिछड़ गई। सीरीज में अभी अंतिम मैच होना बाकी है जो शुक्रवार से लंदन के ओवल मैदान पर खेला जाएगा।

हरभजन ने जो ट्वीट किया है उसके मुताबिक टीम इंडिया के एक फैन ने सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और एमएस धोनी की कप्तानी के आंकड़े दिए हैं। इन आंकड़ों में बताया गया है कि इन कप्तानों ने भी कम समय में टीम इंडिया को विदेशी पिचों पर तीन से ज्यादा टेस्ट मैच जिताए हैं। 

बरेली: चीनी कूंग फू मास्टर की तरह कोच और अखाड़े जैसे माहौल, यहां खिलाड़ी नहीं, लड़ाके तैयार हो रहे हैं। ऐसे लड़ाके जिनको भले ही कभी मेडल के लिए मायूस होना पड़े लेकिन जिंदगी की जंग को हर मोड़ पर जीतने का जज्बा होता है। 

हरीश बोरा की ताइक्वांडो को लेकर कहानी खासी दिलचस्प है। इज्जतनगर मंडलीय रेल कारखाने के कर्मचारी हरीश बोरा उत्तराखंड में रानीखेत के पास पहाड़ी गांव के रहने वाले हैं। पिता भी रेलवे में थे।   

बचपन में एक दिन बाल कटवाने हेयर ड्रेसर की दुकान पर पहुंचे। बाल कटाने को इंतजार करने के दौरान वे वहां रखी पत्रिका पढऩे लगे। पत्रिका में एक जगह कोरियन मार्शल आर्ट ताइक्वांडो की जानकारी के साथ दक्षिण भारत के शहर बेंगलुरु में एक कोच का पता दिया था। उन्होंने वो हिस्सा चुपके से फाड़कर जेब में खोंस लिया। प्रकाशित लेख की बात उनके मन में बैठ गई और एक दिन मां को बताकर साउथ की ट्रेन पकड़ ली। 

वहां पहुंचे तो न कोई उनकी बात समझने वाला, न वे किसी की बोली समझने वाले। काफी धक्के खाने के बाद कोई हिंदी भाषी मिल गया, जिसने पर्चे में छपे पते तक पहुंचा दिया। 

वहां उनके ’मास्टर मिल गए, लेकिन वे ऐसे ही किसी बच्चे को सिखाने को तैयार नहीं हुए।  उन्होंने बहलाकर किशोर हरीश बोरा से घर का पता पूछा और वहां चिट्ठी भेज दी। घर वाले तो उन्हें तलाश ही रहे थे, चिट्ठी मिलते ही चल पड़े। 

पिता वहां पहुंचे लेने लेकिन वह लौटने को तैयार नहीं हुए। सीखने की जिद के साथ पिता से मार खाने का भी डर भी था।  बेटे की इच्छा के आगे पिता का दिल पसीज गया। मन लगाकर सीखने के साथ चिट्ठी-पत्री की हिदायद देकर लौट आए। इसके बाद हरीश बोरा का मार्शल आर्ट का सफर ट्रैक पर शुरू हो गया।

उनके मास्टर ने उन्हें लोहा बनाना शुरू कर दिया। बाद में ब्लैक बेल्ट टैस्ट के लिए कोरिया भेजा। वहां फाइट प्रैक्टिस के लिए कई दिन घर में ही बंद रहे।  ब्लैक बेल्ट लेकर वतन वापसी की। कुछ समय बाद रेलवे में नौकरी भी लग गई।  

इज्जतनगर मंडलीय कारखाने में काम करने के साथ ही उन्होंने ताइक्वांडो सिखाने को समय निकालना शुरू किया। पहले तो सीखने वाले ही नहीं मिल रहे थे। नई तरह की आर्ट थी, जिसमें कोरियन शब्द भी बोले जाते हैं।  चिरैत, घुंघरी, चुंबी, ईल जांग टाइप।  कई लोगों ने मज़ाक भी बनाया लेकिन बोरा जी डटे रहे। 

ये करीब 28 साल पहले की बात है। कहा ये जाता है कि बरेली शहर में इस मार्शल आर्ट को वहीं लाए। आज कई कामयाब कोच उनके शिष्य रहे हैं। हरीश बोरा ने कभी सिखाना बंद नहीं किया।

वे कहते हैं, ये मेरी इबादत है, यही दौलत। आज भी वे ख़ुद जंप करके किक मारकर बताते हैं, जबकि उम्र पचास पार हो चुकी है।  उनकी क्लास के सीनियर कोच इंटरनेशनल खिलाड़ी ब्लैक बेल्ट हैं, लेकिन आज भी कई बार वे उनकी डांट खाते हैं।  

डांट-फटकार के साथ दुलार ऐसा रहता है कि बच्चे भले ही स्कूल बंक कर दें, ट्यूशन छोड़ दें, लेकिन अपने ’अखाड़े की क्लास नहीं छोड़ते। हरीश बोरा कई अन्य मार्शल आर्ट के भी खिलाड़ी हैं।

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