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गोरखपुर: क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान में अपने दोस्त के राजतिलक में क्या पहुंचे बवाल खड़ा हो गया। आखिर क्यों ना बवाल खड़ा हो।

सबसे बड़ी बात रही राजनीतिक गुरु और मुंहबोले पिता का निधन हो गया और चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि दोस्त के राजतिलक में जाना जरूरी हो गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में नवजोत सिंह सिद्धू भारत से अकेले पहुंचे थे। 

इधर, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई का निधन हो गया। अटल बिहारी वाजपेई को नवजोत सिंह सिद्धू अपना पिता मानते थे और राजनीतिक गुरु मानते थे।

उनकी चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई थी नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान चले गए। और वहां पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल बाजवा से गले मिले। 

नवजोत सिंह सिद्धू दावत खाने भारत के दुश्मन पाकिस्तान में जाकर दावत खाना कितना उचित है जिसको लेकर भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।

कार्यकर्ताओं ने नवजोत सिंह सिद्धू का प्रतीकात्मक पुतला फूंका। टाउनहाल गांधी प्रतिमा के समक्ष दर्जनों कार्यकर्ताओं ने सिद्धू शर्म करो जैसे नारों के साथ पुतला फूंका। 

 

मुजफ्फरनगर:  विश्व हिंदू परिषद की फायर ब्रांड नेत्री साध्वी प्राची शनिवार को फिर आक्रामक रूप में दिखाई दी। हमेशा से विवादित बयानों को लेकर चर्चाओं में रहने वाली  साध्वी प्राची आर्य ने सिद्धू के पाकिस्तान जाने  को लेकर कांग्रेस पर जमकर प्रहार दिया। 

यहीं नहीं  साध्वी ने दिल्ली से हरिद्वार जाते समय मीडिया से रूबरू होते हुए कांग्रेस नेत्री श्रीमती सोनिया गांधी को गोरी चमड़ी वाली तक कह दिया और सिद्धू को कांग्रेस और सोनिया गांधी का जोकर बताते हुए उन्हें पाकिस्तान में ही रहने की सलाह दे डाली।

दरअसल, दिल्ली से हरिद्वार जाते वक्त  साध्वी प्राची आर्य मीडिया से रूबरू  हुई। बातचीत के दौरान वे कांग्रेस और नवजोत सिद्धू को जमकर निशाना बनाया। उनका कहना था कि इस समय हिंदुस्तान अटलजी के गम में डूबा हुआ है। लेकिन कांग्रेस के कुछ जोकर अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं।

कांग्रेस के संस्कार है यह कि पाकिस्तान जाकर कांग्रेस का जोकर पाकिस्तान के चीफ से गलबहियां कर रहा है। शर्म आनी चाहिए सोनिया गांधी को। यह कोई ना कोई नई साजिश रच रहे हैं।

प्राची ने कहा कि इन लोगों का पासपोर्ट जब्त किया जाना चाहिए और इन्हें पाकिस्तान में ही रहना चाहिए। हिंदुस्तान में ऐसे लोगों की कोई जरूरत नहीं है। सीमा पर खड़े होकर जवान हिंदुस्तान की रक्षा करते हैं और वह शहीद हो जाते हैं, क्या कभी यह जोकर ने शहीद की पत्नी से मुलाकात की है। 

पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी के निधन के बाद  फिल्म इंडस्ट्रीज के लोगों द्वारा उनकी शोक सभा में शामिल  नहीं होने पर भी साध्वी काफी गुस्से में नजर आईं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्रीज के लोग  अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के इशारे पर नाचते हैं। 

 

मेरठः दो युवकों ने दिनदहाड़े स्टेडियम में घुसकर एथलेटिक्स कोच को गोली मार दी ओर फरार हो गये। घायल कोच को आनन फानन में स्टेडियम के  खिलाड़ियों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पीड़ित की गंभीर हालात को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे आनंद हास्पिटल के लिए रेफर कर दिया।

हालांकि घायल कोच संदीप रंधावा ने दोनों आरोपियों को पहचान लिया है। घायल की निशानदेही पर पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। 

बता दें कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कैलाश प्रकाश स्पोटर्स स्टेडियम में खरखौंदा के रहने वाले संदीप रंधावा एथलेटिक्स के कोच हैं। स्टेडियम में सिविल सर्विस एथलिट के ट्रायल चल रहे हैं।

गुरुवार को संदीप खिलाड़ियों के ट्रायल ले रहे थे। सीओ राम अर्ज के अनुसार उसी समय स्टेडियम के अंदर कोच संदीप के पास अंशुल और शेखर नाम के दो युवक आये और  दोनों युवकों ने कोच संदीप से बात करनी शुरु कर दी।

बात करते समय अचानक से शेखर नाम के युवक ने कोच संदीप को तमंचे से गोली मार दी। जिससे कोच संदीप गंभीर रुप से घायल हो गये। दोनों युवक घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गये। हालांकि पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ ने आरोपी युवकों की तलाश शुरु कर दी है।

  नई दिल्ली : इंडोनेशिया में आज से 18वें एशियन गेम्स की शुरुआत हो गई है। इस बार 10 ऐसे खेल हैं, जो पहली बार इन खेलों का हिस्सा बने हैं।

18वें एशियन गेम्स जकार्ता और पालेमबांग में 18 अगस्त से होने हैं। यह खेल प्रतियोगिता 2 सितम्बर तक जारी रहेंगी। इसका उद्घाटन समारोह भारतीय समयानुसार शाम 5.30 बजे से हो गया । इसके बाद, प्रतिस्पर्धा करने वाले देशों की टीमों की परेड निकलेगी. इस समारोह का समापन रात नौ बजे होगा। 18 अगस्त से 2 सितंबर तक चलने वाले इस एशियाई महाकुंभ में 40 खेलों की लगभग 67 स्पर्धाएं होंगी। जहां 28 ओलंपिक स्पोर्ट्स, 4 नए ओलंपिक स्पोर्ट्स और 8 नॉन ओलंपिक स्पोर्ट्स खेले जाएंगे। इस बार भारत ने 34 खेलों में अपनी भागीदारी को तय किया है।

ताश के पत्तों का खेल पहली बार एशियन गेम्स का हिस्सा बना है। इसमें दो खिलाड़ियों की जोड़ी प्रतिद्वंद्वी टीम को टक्कर देती है। इसमें चार गोल्ड के लिए 14 देशों के 217 खिलाड़ी उतरेंगे।

3 गुणा 3 बॉस्केटबॉल : इस खेल में चार खिलाड़ियों की एक टीम शामिल होती है। बॉस्केटबॉल का खेल फुल कोर्ट पर होता है, जबकि इस इवेंट का खेल हॉफ कोर्ट पर होता है।

जेट स्की : इस खेल का आयोजन 23 से 26 अगस्त तक जकार्ता के एनकोल बीच पर होगा। 

पैराग्लाइडिंग : इस इवेंट में एथलीट दो वर्गो में हिस्सा लेंगे। इसमें छह गोल्ड मेडल दांव पर होंगे।

पेनकेक सिलाट : यह पारंपरिक इंडोनेशियाई मार्शल आर्ट्स का एक प्रकार है। मेजबान देश ने मार्शल आर्ट्स के ऐसे तीन इवेंट एशियन गेम्स में शामिल किए हैं। 

जु-जित्सु : शतरंज की तरह खेले जाने वाले इस मार्शल आर्ट्स इवेंट में रणनीति और योजना की भूमिका अहम होती है। इसमें आठ गोल्ड दांव पर होंगे।

साम्बो : बिना हथियारों के आत्मरक्षा का गुण सिखाने वाली इस इवेंट को भी पहली बार एशियन गेम्स में जगह मिली है। इसमें चार गोल्ड दांव पर हैं। 

कुराश : यह उज्बेकिस्तान का पारंपरिक मार्शल आर्ट्स है। यह जूडो और कुश्ती के संयोजन से बना है। 

क्लाइंबिंग : इसमें छह गोल्ड मेडल दांव पर होंगे।

रोलर स्पोर्ट्स : यह स्केटबोर्डिग और इन लाइन स्पीट स्केटिंग की स्पर्धा है। इसमें छह गोल्ड मेडल दांव पर होंगे।

 

 गोरखपुरः पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर छा गई। गोरखपुर में भी उदासी छाई हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की यादें गोरखपुर से भी जुड़ी हुई है।

1940 में अटल बिहारी वाजपेई अपने बड़े भाई स्वर्गीय प्रेम बिहारी वाजपेई की बारात में सहबाला बनकर आए थे। गोरखपुर के मथुरा प्रसाद दीक्षित की बेटी राजेश्वरी से अटलजी के बड़े भाई प्रेम बिहारी की शादी हुई थी। मौजूदा समय में मथुरा प्रसाद दीक्षित के परिवार के तमाम सदस्य गोरखपुर में रहते हैं, जिसमें अटल जी के रिश्ते में साले बृज नारायण दीक्षित सबसे बुजुर्ग अवस्था में हैं और परिवार के मुखिया के रूप में उनका सम्मान है।

अटलजी की मौत को लेकर गोरखपुर का यह परिवार बेहद दुखी है। गोरखपुर में अटल जी के बिताए एक- एक पल को यह परिवार याद कर भावुक हो जाता है।  अटल बिहारी वाजपेई ने गोरखपुर के आपने इस रिश्ते को तमाम यात्राओं के दौरान कभी नहीं खोला, लेकिन 1996 की एक चुनावी जनसभा में इंटर कॉलेज में गोरखपुर वासियों की भारी भीड़ को देखते हुए अटलजी अपने अंदाज में गोरखपुर से अपने रिश्ते का खुलासा किया।

उन्होंने मंच से कहा था कि मुझे गोरखपुर की तमाम गलियां याद हैं। क्योंकि मेरा बचपन में यहां कई बार आना जाना हुआ है। मैं तो यहां अपने बड़े भाई की शादी में सहबाला बनकर आया था। मेरी तब भी बहुत इज्जत और मान-सम्मान हुई थी और मुझे लगता है गोरखपुर के लोग वैसा ही प्यार इस चुनाव में भी अटल बिहारी को देंगे।

दीक्षित परिवार आज भी अटल जी की यादें अपने समेटे हुए हैं। उनके भाई के साले बृज नारायण दीक्षित कहते हैं कि अटल जी हंसमुख और मजाकिया अंदाज में हम सभी के बीच रहते थे। 1975 के बाद जब वह गोरखपुर आए तो घर परिवार में उनके सत्कार का जो दौर चला उसे अटलजी बेहद प्रभावित हुए। यही नहीं वह घर के लोगों का बनाया हुआ पकवान तो ग्रहण किए, लेकिन सुबह की बेला में अपने हाथों से लोगों को ठंडई का रसपान सभी को कराया।

इसके बाद अटल जी 1994 में तब दीक्षित परिवार में आए जब उनके भाई के ससुर मथुरा प्रसाद दीक्षित का निधन हुआ था। यह परिवार मूलतः इटावा का रहने वाला है और चार पीढ़ियों पहले गोरखपुर में आकर बस गया था। अटल जी को परिवार के लोगों ने पहले की तरह हाथों हाथ लिया। उनके सम्मान में वह सब कुछ परोसना चाहा जो अटल जी को पसंद था, लेकिन अटल जी बेहिचक परिवार के बीच अपनी पसंद का इजहार किया और कढ़ी- चावल बनवा कर खाए। 

इस दौरान उन्होंने इस घर की एक बहू से अपना जूठा हाथ भी नहीं धुलवाया था और कहा था कि मैं सारा काम खुद करता हूं। इसलिए मेरा हाथ मुझे ही धोने दे। परिवार के लोग अटल जी के सरलता राजनीतिक और पारिवारिक मामले में स्पष्ट सोच के भी मुरीद है।

दीक्षित जी कहते हैं कि अटल जी ने बच्चों से कहा खुद को इस लायक बनाओ कि समाज तुम्हें खुद हाथों-हाथ ले ले। देश के प्रधानमंत्री हुए तो इस परिवार ने कभी भी उनसे किसी चीज़ की उम्मीद नहीं की, क्योंकि वह अटल जी के विचारों से वाकिफ थे। उन्हें अटल जी का यह संदेश, मेहनत ही इंसान को आगे ले जाता है,पहचान दिलाता है, इसलिए खुद की मजबूती ही जरूरी है।  और उनकी अभी  अपनों के बीच से जाने का दुःख समेटे हुए है।

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