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काशीपुरः इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि उत्तराखंड को बने हुए 17 साल हो चुके हैं मगर सरकार में खेल विभाग को देखने वाले किसी भी मंत्री ने आजतक काशीपुर स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम की दुर्दशा की तरफ ध्यान देने की जहमत नहीं की। इसे लेकर खिलाड़ी ही नहीं खेल प्रेमियों में खासा रोष है।

उनकी बस एक ही मांग है कि खेल मंत्री यहां आये और इस स्टेडियम का उद्धार करें। यहां पर समय समय पर राज्यस्तरीय से लेकर ब्लॉक स्तर तक की विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं होती रहती है। 1972 में बना काशीपुर का स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने की थी।

उद्देश्य था कि खेल प्रतिभाएं आगे आये और यहां से प्रक्षिक्षण लेकर खिलाडी विभिन्न खेल प्रतियोगताओं में प्रतिभाग करें। यहां से प्रशिक्षण लेकर कई खिलाडियों ने सफलता की बुलंदियों को भी छुआ है। लेकिन आज ये स्टेडियम अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

दिलचस्प बात ये है कि उत्तराखंड को बने हुए 17 साल से अधिक हो चूका है। प्रदेश सरकार में न जाने कितने खेल मंत्री बने मगर आज तक कोई भी खेल मंत्री काशीपुर नहीं आये जो इस स्टेडियम की दुर्दशा की सुध ले सके। यहाँ पर हॉकी, बॉलीवाल, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, एथलीट आदि कई खेलों के जिला और राज्य स्तरीय आयोजन होते ही रहते हैं। 

खेलों के सुधार के लिए प्रदेश भर में स्टेडियम बनाये बनाए जा रहे हैं मगर 42 साल पुराने इस स्टेडियम की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यहीं वजह है कि कई खिलाडी यहां आने के बजाय अन्य प्रदेशों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। खिलाड़ी हो या खेल प्रेमी खेलमंत्री के इस रवैये से खासे नाराज हैं।

काशीपुर के स्पोर्टस स्टेडियम की दुर्दशा के लिए क्षेत्र के भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि भी कम जिम्मेदार नहीं हैं जिन्होंने प्रदेश में जब उनकी सरकारें थी तब सरकार का ध्यान इस ओर दिया होता तो शायद इस स्टेडियम का कुछ उद्धार हो जाता।

जब इस मामले में प्रदेश के खेल मंत्री अरविन्द पांडेय से बात की गई तो उनका कहना है कि प्रदेश सरकार खेलो को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जल्द ही प्रदेश के स्टेडियमों को ठीक कर दिया जायेगा। अरविन्द पांडेय ने पूर्व की सरकारों पर तंज कस्ते हुए कहा कि यदि पहले की सरकार से स्टेडियमों की और ध्यान दिया होता तो अभी तक कई खिलाडी प्रदेश का नाम रोशन कर चुके होते।  

 

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