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मुरादाबादः पिछले सप्ताह आई बाढ़ के बाद हालात अब भी बदतर बने हुए है। देहात क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर बढ़ जाने से सम्पर्क मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए है।

इसके चलते दर्जनों गांवों से लोगों का सम्पर्क कटा हुआ है। सड़कें और पुल बह जाने के चलते अपने घरों तक पहुंचने के लिए स्थानीय लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर पूरा करना पड़ रहा है। प्रशासन के दावों के उलट लोगों का आरोप है कि मुसीबत की इस घड़ी में उनका साथ कोई नहीं दे रहा। 

भारी बरसात के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ने से जलमग्न हुई सड़कें और पानी की तेज धाराओं के बीच ग्रामीण खुद के आने-जाने के लिए रास्ता तैयार कर रहे हैं। इस वक्त बाढ़ के कहर को झेल रहे मुरादाबाद जनपद में हर कहीं तबाही नजर आती है। रामगंगा समेत दूसरी नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदियों का पानी सड़कों पर बह रहा है और ऐसे हालात में गांवों को जोड़ने वाले सम्पर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 

 

मुसीबत की इस घड़ी में ग्रामीण प्रशासन की मदद का इंतजार करने के बजाय खुद ही अपने लिए रास्ता बना रहे है। नदी के पानी के बीच खड़े होकर लकड़ियों की मदद से वाहनों और पैदल यात्रियों के लिए पुल तैयार कर रहे हैं। ग्रामीणों को अब यहीं आखिरी रास्ता नजर आ रहा है।

मुरादाबाद से काशीपुर मार्ग को जोड़ने वाले रास्ते पर रामगंगा नदी के पानी के चलते आधा दर्जन से ज्यादा गांव जलमग्न है। इन गांवों में आवागमन का कोई रास्ता नहीं बचा है और गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर बनी पुलिया पानी में बह चुकी है।

प्रशासन बाढ़ से हुए नुकसान का आंकलन करने में जुटा होने का दावा कर रहा है लेकिन ग्रामीण जानते है कि प्रशासन की मदद के इंतजार में ना जाने कितने दिन लग जाएंगे।

 

जलमग्न हुई इस सड़क से आधा दर्जन से ज्यादा गांव जुड़े हुए है। बढेरा और चटकाली गांव के बीच तेलीवाला के पास पन्द्रह ग्रामीणों द्वारा बनाये गए लकड़ी के पुल से हर रोज जान हथेली पर लेकर पैदल यात्री और दोपहिया वाहन चालक गुजर रहे है।

लकड़ी के टुकड़ों को आपस में जोड़कर बना यह पुल हादसों का सबब भी बन सकता है लेकिन ग्रामीणों के पास इसके अलावा कोई और विकल्प नजर नहीं आता। 

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