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बदायूं: भारत सरकार जहां हर गांव को बिजली देने का दावा कर रही है और सौभाग्य योजना लागू कर हर घर को रोशन किया जा रहा है, वहीं बदायूं में एक गांव ऐसा भी जो बिजली के खम्बे और उसके बाद घरों में मीटर लग जाने के बाद भी विगत चार साल से बिजली की रोशनी देखने को तड़प रहा है।

वह भी जिलाधिकारी कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर। डीएम कहते है कि जनपद के सभी 2134 गांवों तक इस वर्ष के अंत तक बिजली पहुंचा दी जाएगी। 

डीएम के कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर बसा गांव मौजमपुर नेहनगर मीरा की पट्टी के ग्रामीण आजादी के 70 वर्ष के बाद भी बिजली की रोशनी देखने को तरस रहे हैं। यह हाल तब है जब भारत सरकार दावा करती है कि देश के सभी गावों में  बिजली पहुंचा दी गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश में सरकार आई और गई, दावा सभी दलों के नेताओं ने किया लेकिन पूरा किसी ने नहीं किया। बसपा सरकार बनी तब गांव में खम्बे खड़े कर दिए गए थे, जब समाजवादी सरकार आई तो उन खम्बों पर बिजली के तार खींच दिए गए थे और अब बीजेपी की सरकार आई है तो घरों में उज़्जवला योजना के तहत बिजली के मीटर लगा दिए गए लेकिन बिजली नसीब फिर भी नहीं हुई। गांव की गुड्डो देवी कहती हैं कि बिजली न होने की वजह से गांव में लड़कों की शादी भी नहीं होती है बड़ी संख्या में लोग कुंवारे है। 

गांव के युवा कहते हैं कि बिजली की वजह से उनकी पढ़ाई भी नहीं हो पाती है। उन्हें अपना मोबाइल भी चार्ज करने गांव से शहर जाना पड़ता है। गांव के बच्चे भी दिए की रोशनी में शाम गुजार देते हैं। 

भीषण गर्मी में महिलाओं से लेकर बुजुर्गों के हाथों में हाथ के पंखे देखे जा सकते हैं। गांव के बच्चे भी एक हाथ में किताब और दूसरे हाथ में पंखा लेकर पढ़ाई करते हैं। 

डीएम का कहना है कि बिजली पहुंचाने का ठेका बजाज कम्पनी को किया जा चुका है और वे खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 

 

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