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फर्रुखाबादः जब दूसरे शहरों में दिन में जिला आपूर्ति कार्यालय खुलता है तो यहां यह दफ्तर रात में खुलता है। पिछले तीन सालों से यूनिटों की कटिंग और आधार कार्डों के आनलाइन के नाम पर गरीब- गुरबों और विधवाओं को परेशान करने वाला जिला पूर्ति अधिकारी का दफ्तर राशन कार्डों का साफ सुथरा हिसाब नहीं बना पाया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा कौन सा काम है जो रात के अंधेरे में निपटाया जाता है। कलक्ट्रेट से दफ्तर के पोस्टमार्टम हाउस परिसर शिफ्ट होने के बाद पूरी तरह से आज़ाद हो चुके जिला पूर्ति अधिकारी पर किसी की नकेल नहीं है।

रात 11 बजे जिला पूर्ति अधिकारी का कार्यालय खुला मिला है। बाहर अवैध असलहों से लैस युवक पहरा दे रहे थे और अन्दर गोरख धंधा जारी था।

पोस्ट मार्टम हाउस के परिसर में चलने वाला यह फर्रुखाबाद जिला पूर्ति अधिकारी का दफ्तर है जिस पर रात में तो दूर दिन में किसी की नजर नहीं रहती। केवल यूनिट कटिंग और आधार कार्ड फीडिंग के नाम पर परेशान की जा रही महिलाएं ढूंढ़ते- ढूंढ़ते यहां आती हैं और कई दिन दौड़ कर फिर किसी क्लिक का झंझट न झेलने के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं।

यही दफ्तर बीती रात फिर खुला मिला है। ऐसा भी नहीं  था कि घंटे- दो घंटे का काम पिछड़ जाने पर अतिरिक्त काम करने के लिए दफ्तर खोल लिया गया हो, ऐसा भी नहीं था कि पीएम- सीएम के दौरे को लेकर कोई फाइलें सुसज्जित की जा रही हों। स्टाफ को रात के लिए रोका गया था, उससे काम भी नहीं लिया जा रहा था।

उसमें से आधा दर्जन युवा कर्मचारी अवैध असलहों से लैस होकर दफ्तर के बाहर पहरा दे रहे थे। दफ्तर से सभी से परिचित होने के बावजूद अंदर जाना खतरे से खाली नहीं था। अब देखने वाली बात यही होगी कि पिछले दिनों घोटाले की सैकड़ों फाइलों को आग के हवाले किये जाने के बाद भी चेहरा चिकना किये घूम रहे जिला पूर्ति अधिकारी पर क्या प्रशासन कोई कार्रवाई करता है या फिर यहां मनमानी करने देने के लिए आँखें घुमा लेता है।

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