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टिहरी: देश का बहुप्रतिक्षित संस्पेशन डोबरा-चांठी पुल सवालों के घेरे में खड़ा हो गया है। हम इसलिए कह रहे हैं कि पिछले 12 सालों से टिहरी झील के उपर निर्माणाधिन पुल में कभी तकनीकी व फिर कभी धन अभाव के चलते विवादों में रहा।

इन सब होने के बावजूद उस समय पुल के चांठी एबेडमेंट की तरफ से लगाए जा रहे सस्पेंडर यानि पुल के बेस को लटकाने वाले लोहे के रस्से अचानक टूट गए। इसकी वजह से पुल का 10 मीटर का हिस्सा टेढ़ा हो गया। गनिमत यह रही की कोई बड़ा हादसा होने से टल गया।

दरअसल प्रतापनगर को जोड़ने के लिए टिहरी बांध की झील के उपर बनाया जा रहा डोबरा-चांठी पुल का चांठी के तरफ से अचानक 4 सस्पेंडर टूटने से पुल का 10 मीटर का हिस्सा टेढ़ा हो गया। गनीमत यह रही कि उस दौरान कार्य कर रहे श्रमिकों के साथ कोई बड़ा हादसा होने से टल गया।

जिससे की विदेशी तकनीकी पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रतापनगर की डेढ़ लाख की आबादी वाली जनता को यह उम्मीद थी जनवरी माह तक पुल बनकर तैयार हो जायेगा लेकिन पुल में बड़ी खामियां आने बाद पुल पर विवादों घेरे में खड़ा हो ही गया है, वहीं पुल के निर्माण गति में बाधा उत्पन्न हो गई है।

आपको बता दें कि डोबरा-चांठी पुल का कार्य साल 2006 से शुरू हुआ। इस पुल को बनकर साल 2009 में तैयार होना था। लेकिन देशभर के इंजीनियरिंग फेल होने से पुल डिजायन ही तैयार नहीं हुआ। और पुल में 1 अरब 30 करोड़ रुपये खर्च कर दिये। जिसके बाद साल 2015 में पुल की अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बिड में विदेशी कम्पनी दक्षिण कोरियाई की योसीन कम्पनी ने पुल का डिजाइन बनाया।

डेढ़ अरब रुपये के साथ पुल का कार्य दोबारा शुरू हुआ। लेकिन फिर साल 2016 में धन के अभाव के चलते पुल में रूकावट आई और साल 2017 में धन की स्वीकृति होने का बाद पुल का कार्य शुरू हुआ तो पुल को जोड़ने का कार्य शुरू हो ही रहा था की पुल को जोड़ने के सस्पेंडर टूट गये। 

यह पुल टिहरी झील के उपर बन रहा 400 मीटर स्पॉन का लम्बा हैबी वैकिल पुल है। देश का सबसे बड़ा संस्पेशन यानि झूला पुल है। 18 टन भार क्षमता वाले इस पुल का पूरा वजन 176 सस्पेंडर पर ही टिकना है। ऐसे में संस्पेडर रस्से टूटने से विभागीय अधिकारी भी चिंता में पड़ गए है। निर्माणदायी कम्पनी इन्फ्रा और कोरियाई डिजाइनरो पर भी सवाल उठने लगे हैं। 

 

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