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बलियाः अब तक आपने मंदिरों में फूलों से पूजा होते देखा है। मगर हम आज आपको बताते हैं कि एक ऐसी अनोखी पूजा होती है, जहां भक्तों के हाथों मे फूल माला नहीं होती है बल्कि लाठी होती है। इन्ही लाठियों से पूजा होती है। 

बलिया जनपद  के रसड़ा थाना क्षेत्र के महाराजपुर गांव में रक्षाबंधन के दिन श्रीनाथ बाबा के मंदिर पर लाखों की संख्या में भक्त अपने अपने हाथों में लाठियां लेकर आते हैं और श्रीनाथ बाबा की लाठियों से पूजा और परिक्रमा करते हैं।  

दरअसल परंपरा के अनुसार,  यहां के किसानों पर अंग्रेजी हुकूमत ने जजिया कर लगा दिया था और इस नए जजिया कर से परेशान किसानों ने श्रीनाथ बाबा से जजिया कर से मुक्त कराने का निवेदन किया था।

तब श्रीनाथ बाबा ने परेशान किसानों को इन्हीं लाठियों के बल पर अंग्रेजों से लड़ कर जजिया कर से मुक्त कराया था। तभी से यहां के सेंगर राजपूतों के लिए ये अनोखी लट्ठ पूजा परंपरा बन गई है। 

हर साल रक्षाबंधन के दिन सैंकड़ों गांवों के लाखों लोग फूलों की जगह लाठियों से पूजा करते आ रहे हैं। इस पूजा में हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी हिस्सा लेते हैं।

हजारो की संख्या में लोगों की भीड़ और सभी के हाथों में लाठियां होती हैं। ये दृश्य लड़ाई जैसा दिखती हो  लेकिन वास्तव में ये एक पूजा हो रही है। जहां भक्तो के हाथों में फूलों की जगह लाठियां होती है। 

यह मंदिर श्रीनाथ बाबा का मंदिर है और लाठियों के संग भक्त इसी मंदिर की पूजा के बाद परिक्रमा कर रहे हैं। लठ मार भक्तों के अनुसार बलिया के रसड़ा क्षेत्र के महाराजपुर गांव के इस मंदिर पर ऐसी पूजा यहां की चली आ रही वर्षों पुरानी परंपरा है। 

 

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