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 फर्रुखाबादः गंगा में आई बाढ़ से घिरे ग्रामीण कटान के खौफ से जागकर रात काट रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में अब तक बाढ़ के पानी में डूबने से चार व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। 417 लोगों के मकान बाढ़ के पानी में समा चुके हैं। कोला सोता और अहलादपुर भटोली में कटान अभी भी तेज है। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ राहत सामग्री और दैवीय आपदा का मुआवजा दिया जा रहा है पर मौके पर पहुंचे नेताओं ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है।

गंगा की बाढ़ के पानी से कई गांव घिरे हैं। गांव के लोग बाढ़ के पानी से निकलने को मजबूर हैं।  रामगंगा का जलस्तर कम होने से कटान तेज हो गई है। जिससे अहलादपुर भटौली व कोलासोता गांव के लोग खौफजदा हैं। गंगा का जलस्तर 136.80 मीटर पर स्थिर है। नरौरा बांध से गंगा में 117638 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

खोह हरेली रामनगर से रामगंगा में 8418 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा की बाढ़ के पानी से कलिका नगला, करनपुर घाट, मंझा की मड़ैया, आशा की मड़ैया, उदयपुर, कंचनपुर, लायकपुर, जोगराजपुर, तीसराम की मड़ैया, बंगला, भुड़रा, सुंदरपुर, सैदापुर, पट्टी भरखा गांव घिरे हुए हैं। ग्रामीण बाढ़ के पानी से निकलने को मजबूर हैं।

तीसराम की मड़ैया संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की तेज धार से कई जगह कट गया है। तटवर्ती गांव के ग्रामीणों को खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने से मवेशियों के चारे की समस्या बढ़ गई है। ग्रामीण चारे के लिए काफी दूर तक भटकते हैं। रामगंगा के जलस्तर में कमी आने से कटान तेज हो गया है। तटवर्ती गांव के लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं।

अहलादपुर भटौली में कटान होने से ग्रामीणों की रात की नींद हराम हो गई है। लोग रात जागकर काट रहे हैं। गांव के अधिकांश ग्रामीण नदी की धार से बेघर हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि नदी से कटान तेज हो गया है। ग्रामीण मकान तोड़ने में जुट गए हैं। नदी की धार का रुख गांव की ओर हो गया है और कटान तेज होने से ग्रामीण भयभीत हैं। गांव से नदी सौ मीटर दूर रह गई है।

राजेपुर के पूर्व ब्लाक प्रमुख बलवीर सिंह ने बताया कि स्थिति बहुत ख़राब है। सरकार की सारे राहत प्रयास कागजों पर चल रहे हैं। डीएम किसी बड़ी योजना का जिक्र करते हुए एक साल का इन्तजार करने की बात कह रही हैं पर यहां एक रात काटना मुश्किल हो रहा है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष मृत्युन्जय शर्मा ने अहलादपुर भटोली का कटान देखने के बाद कहा कि सरकार की मंशा हो तो उसके लिए चुटकियों के काम हैं पर हकीकत यह है कि बाढ़ पीड़ितों के लिए केवल कागजी कार्रवाई चल रही है। कटान के कारण अधिकांश ग्रामीण बेघर हो गए हैं।

भाजपा के पूर्व सांसद राम बख्श वर्मा ने बताया कि पिछली और यह सरकार बाढ़ के प्रति संवेदनशील नहीं रहे।यह सही है कि प्रशासन के कुछ लोग चाहते हैं कि हर साल बाढ़ आती रहे तो उनका कुछ भला होता रहे।

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