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रुद्रपुरः मैं भी रोता जब...ये पंक्ति उस वक्त रुद्रपुर के एक नवयुवक की डायरी में अटल बिहारी वाजपेयी ने लिखी थी जब वे भाजपा के प्रचार प्रसार के लिए उधम सिंह नगर के बाजपुर आए थे। इसके बाद उन्हें रुद्रपुर होते हुए रामपुर को जाना था। इस बीच पवन अग्रवाल के आवास रुद्रपुर में उनका टी ब्रेक था, तो कार्यकर्ता भी इक्कठा हो गए।

1980 में भाजपा का गठन किया गया था। इस दौरान भाजपा के प्रचार प्रसार के लिए 1981 में अटल बिहारी वाजपेयी देशव्यापी दौरे पर निकले थे। बाजपुर में सभा को संबोधित करने के बाद वो रुद्रपुर में पवन अग्रवाल के कार्यालय में चाय पीने के लिए रुके। इस दौरान वहां पर कार्यकर्ताओं ने छोटा सा मंच बनाया था।

अटलजी से सभा को संबोधित करने का आग्रह किया गया। अटलजी ने ये कह कर मना कर दिया कि उन्हें सुनने के लिए लोग पार्टी को पोटली देते हैं। इस पर 22 साल के युवक पवन अग्रवाल ने पेन ओर डायरी दे कर अटलजी से अपनी कविता की कुछ पंक्तियां लिखने का आग्रह किया। लेकिन अटलजी ने उस युवक को भी मना कर दिया। 

बाद में किसी कार्यकर्ता ने बताया कि ये आपकी कविताओं के प्रसंसक है। अटलजी ने युवक को पास बुला कर पूछा कि क्या आप को मेरी कोई कविता याद है। युवक ने हामी भरते हुए डायरी में कुछ पंक्ति लिख डाली, पंक्ति इस प्रकार है-  

मैं रो लेता जब आसपास कोई नहीं होता है, दूर कहीं कोई रोता है........

पवन अग्रवाल ने बताया जिसके बाद मैंने डायरी को आगे बढ़ाया और अटलजी ने डायरी ले ली। उन्होंने पंक्तियों को पढ़कर मुझ से पेन मांगा ओर उन पंक्तियों के आगे लिखा- 

मैं भी रोता आसपास जब कोई कहीं नहीं होता है.......अटल बिहारी वाजपेयी

आज पवन अग्रवाल 59 साल की उम्र की दहलीज में पहुंच गए हैं लेकिन उस एक दिन की मुलाकात को पवन अग्रवाल ने संजोकर रखा है। भारतरत्न प्राप्त अटल जी की मौत की खबर के बाद वो भी आहत है। उन्होंने कहा कि अटलजी जैसी शख्सियत के चले जाने से इस देश को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। 

 

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