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यूएन- पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलियाई संसद में आतंकवाद को इंटरनेट से दूर करने के संबोधन के एक दिन बाद ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी इसी मसले को उठाया है। बताया जा रहा है कि 2008 के मुंबई हमले में इंटरनेट टेक्नॉलजी के हुए इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए भारत ने आतंकवादियों को इसके जरिए आतंक फैलाने से रोकने के लिए इंटरनेट के प्रबंधन में बदलाव की बात की।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से संबंधित सत्र में भारतीय राजदूत अशोक कुमार मुखर्जी ने कहा कि प्रौद्योगिकी और संचार का और अधिक बर्बर आतंकी कृत्य में इस्तेमाल आसानी से बढ़ रहा है। उन्होंने मुंबई हमले को याद करते हुए कहा, यह पहला मौका था जब हमने आतंकी गतिविधियों को निर्देश देने वाले वॉइस ओवर प्रोटोकॉल का सामना किया।

ऑस्ट्रेलियाई संसद में पीएम ने अपने संबोधन में कहा था कि आतंकवाद आज दुनिया में इंटरनेट के जरिए भर्ती, धन शोधन, मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के जरिए अपने पैर तेजी से पसार रहा है जिसे रोके जाने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग किये जाने की सख्त जरूरत है।

इसी के बाद संयुक्त राष्ट्र में मुखर्जी ने कहा, हम मानते हैं कि अगर हम प्रभावी तरीके से इसका सामना करने को लेकर गंभीर हैं, तो हमें आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट के दुरुपयोग को रोकने के लिए मौजूदा वैश्विक इंटरनेट अधोसंरचना प्रबंधन में आवश्यक बदलाव के लिए सहमत होना होगा।

परिषद में यह चर्चा उस खुलासे के बाद हुई है, जिसमें कहा गया है कि यूरोप सहित 80 देशों के 15,000 विदेशी लड़ाके सीरिया, इराक और अन्य पड़ोसी देशों में आतंकवादी संगठन से जुड़ गए हैं। परिषद की तरफ से बयान जारी करते हुए बिशप ने कहा कि सभी देशों को इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हिंसक कट्टरपंथ के प्रचार का विरोध करना चाहिए।

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