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कानपुर देहात: कुत्ता न बनो अगर बनना है तो कुत्ते जैसा वफादार बनो, जैसा श्यामलाल ने कर दिखाया आज उसकी मौत से पूरा गांव गमगीन है। श्यामलाल की मौत के बाद उसके अंतिम दर्शन करने के लिये गांव में लोगों का तांता लगा रहा।

बाद में गांव के लोगों ने हिन्दू रीति रिवाज से सेंगर नदी में ले जाकर उसका अंतिम संस्कार किया। श्यामलाल मनुष्य नहीं था लेकिन इंसानों को इंसानियत की सीख दे गया। शायद यहीं वजह थी कि श्यामलाल का नाम हर व्यक्ति की जुबान है।

अकबरपुर थाना क्षेत्र के मुरीदपुर गांव में एक कुत्ते की मौत पर पूरे गांव में गमगीन माहौल हो गया। 

दरअसल श्यामलाल एक कुत्ता था लेकिन वो कभी कुत्तों के साथ नहीं रहा।  पूरे गांव का दुलारा था। गांव के लोगों ने उसका नाम श्यामलाल रख दिया था। श्यामलाल 12 वर्षों से गाँव में रह रहा था।

अगर कोई भी गांव का आदमी रात या दिन में लेटलतीफ आता था तो श्यामलाल उसे घर के अंदर छोड़कर ही वहां से आता था।

श्यामलाल कुत्ता होकर कभी कुत्तों के साथ नहीं रहा। हमेशा घर के बाहर देहरी में बैठा रहता था कभी किसी पर न तो भौंकता था और न ही काटता था। गांव के लोग जो खाने को देते थे उसे वो खा लिया करता था। 

गांव के लोग बताते हैं कि श्यामलाल के रहते गांव में कभी कोई घटना नहीं हुई। सोमवार को हाइवे पार करते समय किसी अज्ञात वाहन ने श्यामलाल को टक्कर मार दी थी, जिससे श्यामलाल गम्भीर रूप से घायल हो गया।

आज इलाज के दौरान श्यामलाल की मौत हो गयी जिससे गांव में शोक का माहौल है। गांववासियों ने हिन्दू रीति रिवाज के साथ अर्थी बनाकर फूल चढ़ाए  और उसकी शव यात्रा निकाली। बाद में सेंगर नदी में जाकर जल प्रवाह कर दिया।

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