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फर्रुखाबादः सरकार वन डिस्ट्रीक्ट वन टूरिज्म योजना लागू कर हर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है, पर बौद्ध सर्किट के प्रमुख तीर्थ स्थल संकिसा में जो वाकया सामने आया है वह निहायत दुखद और शर्मनाक है। एक विदेशी पर्यटक की मौत पर प्रशासन उसके शव को सील करने के लिए महिला सिपाहियों तक की व्यवस्था नहीं कर पाया। पुरुष सिपाही ने हाथ से फ्राक खींचकर जिस तरह श्रीलंकाई बुद्ध उपासिका के शव को निर्वस्त्र किया उससे न केवल एक भक्त के शव की बेअदबी हुई है बल्कि प्रशासन की सतर्कता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा है।

अस्पताल के पास सरकार द्वारा संचालित शव वाहन हैं लेकिन श्रीलंका के इस दुखी परिवार को महंगे रेट पर प्राइवेट एम्बुलेंस से शव को पोस्टमार्टम हाउस और बाद में दिल्ली ले जाना पड़ा। 

श्रीलंका के रांडी रिचमंडवथू दुआटेंपल कलूतारा साउथ निवासी एलएल रांदिमा समेत 83 बौद्ध श्रद्धालुओं का दल 12 अगस्त को भारत में चेन्नई पहुंचा था। यह दल देश भर में स्थित बौद्ध स्थलों के दर्शन कर रहा है।  

श्रद्धालुओं को लेकर टूरिस्ट बस श्रावस्ती से संकिसा पहुंची। यहां बस से उतरते ही युवती की हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले पीएचसी ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर यहां से लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। लोहिया अस्पताल में युवती को मृत घोषित कर दिया गया।

श्रीलंकाई तीर्थयात्री के शव के पंचनामा की कार्रवाई हो रही थी उस दौरान पुरुष सिपाही ने तो हद कर दी। महिला सिपाही दूर हाथ बांधे खड़ी रही और सिपाही ने महिला के शव को फ्राक पकड़कर लटकाया ।

जिससे शव निर्वस्त्र होते होते बचा। एक महिला सिपाही मौजूद तो थी पर उसने शव में हाथ तक नहीं लगाया।  बौद्ध श्रद्धालुओं के दल के गाइड शिशिर कुमार ने बताया कि अचानक तबियत बिगड़ने से मौत हो गई है।

श्रीलंकाई तीर्थ यात्री के शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने के लिए शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी। जानकारी के अनुसार शव वाहन न मिलने पर मृतका के परिजनों ने प्राइवेट अस्पताल की एम्बुलेंस को दिल्ली तक ले जाने के लिए बुक किया है।

 

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