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गोंडाः भगवान आशुतोष महादेव की आराधना के पावन माह सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में शिव भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।

शिवभक्तों ने गोंडा जिले के तमाम शिव मंदिरों समेत पौराणिक कष्टहर्ता दुःखहरणनाथ और पृथ्वीनाथ मंदिर में जलाभिषेक कर पुण्य कमाया। जहां भोले बाबा दुःखहरणनाथ का वर्णन त्रेतायुग से ही मिलता है। शिवभक्तों की मान्यता है कि , बाबा दुःखहरण नाथ मंदिर त्रेतायुग से यहां विद्यमान है।

 

कहते है कि अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के यहां जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने जन्म लिया तत्पश्चात उनके बाल स्वरूप का पवित्र दर्शन के लिये महादेव देवाधिदेव भगवान शंकर साधू के भेष में अयोध्या आये और श्रीराम के दिव्य बाल रूप का दर्शन कर स्वयं को वशीभूत किया। 

महादेव ने  कैलाश वापस लौटते समय दुःखहरण नाथ मंदिर के स्थान पर विश्राम किया और लोगों का कष्ट हर उनके दुःख दूर किये स तभी से बाबा दुःख हरण नाथ की पिंडी का दर्शन कर श्रद्धालु मनोकामना मांगते है और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।

वहीं भगवान पृथ्वीनाथ की द्वापरयुग से आराधना की जा रही है और महाभारत काल में इन्होने पांडवों के कष्टों का निवारण किया था। ऐसा माना जाता है कि पृथ्वीनाथ शिवलिंग की स्थापना महाबली भीम ने की थी और कलांतर में भगवान शिव के इन रूपों को पूजा गया और तभी से ये मानव जाति और अखिल ब्रह्माण्ड की रक्षा कर रहे हैं।

गोंडा और आसपास के जनपदों से आये श्रद्धालुओं नें महादेव जलाभिषेक कर पुण्य कमाया और हर हर महादेव की जय जयकार करते अपने घर की ओर रवाना हो गए। 

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