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चौथी बार बिहार के मुख्‍यमंत्री के रुप में 22 फरवरी को शपथ लेंगे नीतीश

पटना: नीतीश कुमार रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और इस दौरान वे अपनी कैबिनेट में भी कुछ लोगों को शामिल करेंगे। इससे पहले राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने उन्हें आज शाम साढ़े चार बजे राजभवन आमंत्रित किया। उनके साथ रामचंद्र पूर्वे, सदानंद सिंह, वशिष्ट नारायण सिंह और अशोक चौधरी भी राजभवन पहुंचे थे। गौरतलब है, नीतीश चौथी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे। उन्हें राजद, कांग्रेस, भाकपा व एक निर्दलीय विधायक का समर्थन प्राप्त है।
राजभवन से बाहर आने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि हम अपने समर्थक दलों के नेताओं के साथ राज्यपाल से मिले और आठ फरवरी को अपन विधानमंडल की बैठक में लिये गये फैसले के आधार पर आज की परिस्थिति में अपना दावा फिर से दोहराया। उन्होंने हमारे दावे को स्वीकार किया और सरकार बनाने के लिए हमे आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि राजभवन में रविवार को राजेंद्र मंडप पर शाम पांच बजे शपथ ग्रहण होगा। उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए तीन सप्ताह यानी 16 मार्च से पहले तक का वक्त दिया है। नीतीश कुमार ने कहा कि सरकार गठन के बाद हम विधानसभा के मौजूदा सत्र का अवसान करेंगे और नये सिरे से विधानसभा सत्र की बैठक बुलायेंगे, जिसमें राज्यपाल का अभिभाषण, विश्वास मत हासिल करने सहित सभी प्रक्रिया पूरी होगी। उन्होंने कहा कि नये सिरे से जो सत्र आहूत करेंगे और वह पूरा बजट सत्र होगा।
 
इसके पहले दिन में उन्होंने जीतन राम मांझी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद एक प्रेस कान्फ्रेंस कर मांझी के आरोपों का जवाब दिया और भाजपा पर राजनीतिक षड्यंत्र करने का आरोप लगाया। नीतीश ने बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम पर अपने प्रेस कान्फ्रेंस में बिहार की जनता से माफी मांगी और कहा कि वे अब भावना में आकर अपनी जिम्मेवारियों को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अगर मुझे मौका मिला तो अपनी यूएसपी सुशासन के अनुरूप ही मैं फिर काम करूंगा। उन्होंने कहा कि मैं उसी तरह राज्य की सेवा करूंगा जिस तरह पहले साढ़े आठ साल तक किया। उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि मांझी को जिस पार्टी ने उन्हें इतना बड़ा स्थान दिया, वे उसके फैसला का सम्मान करते और जाति का कार्ड नहीं खेलते. उन्होंने कहा कि जिस महादलित शब्द का आज वे लोग बार-बार उल्लेख करते हैं, उसे उन्होंने ही इजाद किया।

नीतीश कुमार ने खुद का नैतिक समर्थन करने के लिए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और बसपा प्रमुख मायावती को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा एनडीए में रहने के बावजूद शिवसेना के मांझी-भाजपा संबंध पर लिये गये स्टैंड का स्वागत किया, इसके लिए उन्हें भी धन्यवाद. उन्होंने मीडिया का भी धन्यवाद दिया और कहा कि आपने तथ्य को वैसे ही रखा-दिखाया जैसा वह है.

गोली का शिकार हुए दिग्गज कम्युनिस्ट नेता गोविंद पी. पंसारे का मुंबई में निधन

मुंबई- महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पांच दिन पहले एक हमले में घायल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता गोविंद पंसारे का शुक्रवार की रात मुम्बई में निधन हो गया। हाल ही में पंसारे पर हमला किया गया था जिसके बाद उन्हें मुंबई में अस्तपाल में भर्ती करवाया गया था। पंसारे टोल के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे।

आज दस बजे उनका पार्थिव शरीर कोल्हापुर ले जाया जाएगा| जहां उनका अंतिम सस्कार किया जाएगा|

श्री पंसारे, 82,  को शुक्रवार सुबह एयर एंबुलेंस के जरिये कोल्हापुर से मुंबई के ब्रीच केंडी अस्पताल लाया गया। श्री पंसारे के फेफडे में रक्त बहने से हालत और बिगड गई तथा रात 12 बजकर 45 मिनट पर यहां उनका निधन हो गया।
अस्पताल में मौजूद सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि श्री पंसारे के निधन से महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के लोगो को आघात पहुंचा है।
इस बीच श्री पंसारे के निधन की सूचना मिलते ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस अस्पताल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने श्री पंसारे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उनके शोकाकुल परिजनों से मिलकर उन्हें सभी तरह से सहयोग का आश्वासन दिया।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया नेता रामदास आठवले ने श्री पंसारे के हमलावरों को तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और कहा कि ऐसा न होने पर उनकी पार्टी पूरे प्रदेश में आंदोलन छेडेगी.
बता दें, कि गत सोमवार को दो अज्ञात मोटरसाइकिल सवार लोगों ने श्री पंसारे और उनकी पत्नी उमा पर उस समय गोलियां चलाई जब वे मार्निंग वाक कर लौट रहे थे।
गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल दंपति को एस्टर आधार अस्पताल में भर्ती कराया गया था। श्री पंसारे के फेफडे में सूजन आ गयी थी जिसकी वजह से उन्हें बेहतर इलाज के लिए मुंबई ले जाया गया।
डाक्टरों के मुताबिक श्रीमती पंसारे भी एस्टर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थी लेकिन उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।




विधायकों की जान बचान के लिए छोड़ी सीएम की कुर्सी- मांझी

जीतन राम मांझी ने बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा उनको सौंप दिया। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया और नई सरकार बनने तक उन्हें कार्यभार संभालने को कहा है।

मांझी ने बिहार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद जेडीयू से निष्कासित मांझी ने प्रेस काॅफ्रेंस की। उन्होंने स्पीकर के आचरण पर सवाल उठाए और अपने मंत्रियों-विधायकों को धमकी दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘विधानसभा में हाथापाई का खतरा था, हमने अपने विधायकों की जान और सदस्यता बचाने के लिए मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ी।’

मांझी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने गुप्त मतदान की इजाजत नहीं दी इसलिए मैंने इस्तीफा दिया। अगर गुप्त मतदान हो तो आज भी मुझे बहुमत है। जेडीयू के 40-50 विधायक मेरे साथ थे। स्पीकर ने नियमों की अनदेखी की।

मांझी ने नीतीश और लालू यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि,  नीतीश कुमार ही मेरी सरकार को कंट्रोल कर रहे हैं। जब मैंने नीतीश के कहे पर चलने से इनकार किया तो ये सब किया गया। मेरा लगातार अपमान होता रहा और नीतीश भीष्म पितामह की तरह चीरहरण देखते रहे। अगर वो कहते तो मैं इस्तीफा दे देता। लालू भी कहते थे कि सत्ता सबसे निचले तबके के लोगों को मिलनी चाहिए, पर ऐसा होने नहीं दिया गया। 

 

 

 

केंद्र ने कांग्रेस को जारी किया नोटिस, 24- अकबर रोड स्थित कार्यालय करें खाली

सत्ता के सर्वोच्च शिखर से लेकर दिल्ली के विधानसभा चुनाव में पूरी तरह कांग्रेस का सफाया हो गया है। कांग्रेस ने अपने 130 साल के इतिहार में बहुत उतार- चढ़ाव देखें हैं, लेकिन इस बार तो एति हो गई है। कांग्रेस के हाथों से सरकार चलाने की बागडोर तो छीन गई और अब उनका आशियाना भी उजड़ने वाला है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने कांग्रेस को नोटिस जारी करते हुए 24 अकबर रोड स्थित मुख्य कार्यालय को हटाने के आदेश दिए हैं। शहरी विकास मंत्रालय ने 22 जनवरी को कांग्रेस महासचिव के नाम से एक नोटिस जारी किया है। इसमें साफ तौर पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के 24 अकबर रोड स्थित मुख्यालय को खाली करने के आदेश दिए गए हैं।

इस नोटिस में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने रोज इवेन्यू स्थित 9-। प्लॉट में कांग्रेस दफ्तर शिफ्ट करने की बात भी कही है। साथ ही मंत्रालय ने 26 जून 2013 के बाद से अब तक का किराया भी कांग्रेस पार्टी से वसूलने का मन बनाया है।

बता दें कि,  24, अकबर रोड 1978 से ही कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय रहा है, जबकि 26, अकबर रोड पार्टी की शाखा सेवा दल का कार्यालय है। 5, रायसीना रोड में युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यालय हैं। चाणक्यपुरी बंगले का इस्तेमाल आवास के रूप में किया जा रहा है। वोरा ने कहा कि पार्टी ने नोटिस का जवाब दे दिया है।

शहरी विकास मंत्रालय ने कांग्रेस को निर्देश दिया है कि बंगले को खाली किए जाने तक वह दंड शुल्क का भुगतान करे। एक बयान में इसने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने कार्यालय बनाने के लिए आवंटित जमीन की नीति के तहत कांग्रेस को जून, 2013 में ही चारों बंगले खाली करने की आवश्यकता थी।

मंत्रालय ने कहा कि इसलिए कांग्रेस को जून, 2010 में 9-ए रोज एवेन्यू में जमीन आवंटित की गई और नीति के मुताबिक इसे तीन वर्ष यानी जून, 2013 तक चारों बंगले खाली करने थे, जो नहीं किए गए।

डीआईजी बीके लोशाली पर उठे सवाल, कारण बताओ नोटिस जारी

पाकिस्तानी नाव को उड़ाने के मामले ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कोस्ट गार्ड के डीआईजी बीके लोशाली के खुलासे ने पाकिस्तान को भारत पर पलटवार करने का मौका दे दिया। पाकिस्तान ने नाव को उड़ाने इस घाटना को भारत का क्रुर चेहरा बताया है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया है कि इस घटना ने फिर साबित कर दिया है कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। भारत ने पाकिस्तान पर समझौता एक्सप्रेस जैसे मामले में न सिर्फ गलत और निराधार आरोप लगाए बल्कि अब चार निर्दोष पाकिस्तानियों की जान ले ली। भारत ने फिर अपना क्रूर चेहरा दिखा दिया है। पाकिस्तान इस क्षेत्र में शांति और सहयोग चाहता है, लेकिन इसे भारत की कमजोरी नहीं समझी जानी चाहिए।

बता दें कि पिछले साल 31 दिसंबर की रात गुजरात में पोरबंदर बंदरगाह के पास अरब सागर में पाकिस्तानी नाव के धमाके में उड़ जाने के मामले में कोस्ट गार्ड के डीआईजी ने एक कार्यक्रम में खुलासा किया था कि उनके आदेश पर ही इसे उड़ाया गया था।
हालांकि डीआईजी ने बाद में इसका खंडन भी कर दिया। लेकिन अखबार ने इसका वीडियो जारी कर लोशाली को मुश्किल में डाल दिया। इसके बाद सरकार ने बी लोशाली को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

गौरतलब है कि, ये घटना 31 दिसंबर की है जब कोस्ट गार्ड ने एक पाकिस्तानी नाव का पता लगाया था जो गुजरात में भारतीय जल सीमा में प्रवेश कर गई थी। उस समय कोस्ट गार्ड द्वारा नाव को रोकने से पहले ही एसमें धमाका हो गया साथ ही आग लग गई और पूरी तरह पानी में डूब गई। नाव में चार लोग सवार थे और कोस्ट गार्ड की चेतावनी के बाद भी नाव नहीं रुकी, जिसके बाद इसमें धमाका हो गया। तब कहा गया था कि आतंकियों ने खुद नाव को उड़ाया।


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