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‘जमीन वापसी’ को लेकर कांग्रेस का जंतर- मंतर पर आंदोलन

भूमि अधिग्रहण बिल में हुए बदलाव को लेकर कांग्रेस आज दिल्ली के जंतर- मंतर पर आंदोलन कर रही है। इस आंदोलन में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता हिस्सा ले रहे  हैं। बताया जा रहा है कि, पहले इस आंदोलन का नेतृत्व राहुल गांधी करने वाले थे। जिसका आधिकारिक एलान पार्टी पहले की कर चुकी थी। लेकिन संसद के बजट सत्र से ठीक एक दिन पहले राहुल गांधी छुट्टी पर चले गए। जिसके कारण अब इस आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के अन्य नेता कर रहे हैं।

आज कांग्रेस के जो नेता इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे, उसमें सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, अजय माकन, सलमान खुर्शीद, मधुसूदन मिस्त्री, जितेन्द्र सिंह, राज बब्बर, दीपेन्द्र हुड्डा और सुष्मिता देव शामिल हैं।

कांग्रेस का कहना है कि 2013 में जिस भूमि अधिग्रहण कानून को यूपीए सरकार ने पास किया था, उसे बीजेपी की भी मंजूरी थी। अब कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने इसमें अध्यादेश के जरिए बदलाव लाने की कोशिश की है, लेकिन कांग्रेस इसे कामयाब नहीं होने देगी।

बता दें कि, समाजसेवी अन्ना हजारे जंतर- मंतर पर भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। पहले कांग्रेस भी अन्ना के साथ इस धरने में शामिल होना चाहती थी,  लेकिन बाद में कांग्रेस को लगा कि कहीं उसका मुद्दा उसके ही हाथ से न छूट जाए।

प्रदीप जैन हत्याकांड में गैंगस्टर अबू सलेम को उम्रकैद की सजा

1995 में बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के दोषी अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई हैपिछले हफ्ते प्रदीप जैन की हत्या के मामले में सलेम को दोषी ठहराया गया था सलेम के साथ साथ उसके ड्राइवर मेंहदी हसन और बिल्डर विरेंद्र को भी दोषी ठहराया था

2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाए जाने के बाद सलेम की संलिप्तता वाला यह पहला मामला है, जिसमें उसे सजा सुनाई गई है। प्रत्यर्पण करार के कारण उसे फांसी की सजा नहीं दी जा सकती है।

गौरतलब है कि सलेम के साथ प्रॉपर्टी विवाद के कारण सात मार्च, 1995 को हमलावरों ने बिल्डर प्रदीप जैन की उनके जुहू स्थित बंगले के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में सलेम, बिल्डर झांब और हसन के खिलाफ मुकदमा चल रहा था।

 

 

 

 

 

 

भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में विपक्ष का वाॅकआउट, तो जंतर- मंतर पर अन्ना और केजरीवाल का हुआ मिलन 

संसद के बाहर और अंदर भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर धमासान मचा हुआ है। आज संसद में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण बिल पर राज्यसभा और लोकसभा में सता पक्ष और विपक्ष में जमकर जुबानी जंग हुई। तो वहीं संसद के बाहर दिल्ली के जंतर- मंतर पर अन्ना हजारें बिल को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर बीजेपी संसदीय दल की बैठक खत्म हो गई है। मोदी सरकार ने मंगलवार को भूमि अधिग्रहण बिल लोकसभा में पेश किया। बिल को लोकसभा में ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. चैधरी बीरेंद्र सिंह ने पेश किया. बिल का विरोध कर रही कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, टीएमसी, सपा, आरजेडी और बीजेडी ने लोकसभा से वॉक आउट किया।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने किसानों से सुझाव लेने के लिए आठ सदस्यों की कमेटी गठित की। ये कमेटी किसानों से बिल को लेकर उनका पक्ष जानने की कोशिश करेगी। जेटली ने भूमि अधिग्रहण बिल पर बीजेपी प्रवक्ताओं और मंत्रियों के साथ बैठक की। जेटली ने कहा कि बहस के दौरान जो भी अच्छे सुझाव आएंगे, उन्हें अध्यादेश में लागू किया जाएगा। वेंकैया नायडू ने कहा कि अल्पमत बहुमत को नहीं झुका सकता।

तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर मंगलवार सुबह संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। ममता बनर्जी की पार्टी मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल पर लाए जाने वाले अध्यादेश का खुलकर विरोध कर रही है। याद रहे कि टीएमसी के लोकसभा में 34 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं।

वहीं दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे अन्ना हजारे का साथ देने के लिए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पहुंचे। केजरीवाल ने अन्ना हजारे को दिल्ली सचिवालय ‘शुद्ध’ करने के लिए बुलाया है। जंतर मंतर पर उन्होंने कहा, ‘अन्ना को मैं हमेशा अपना गुरु मानता हूं, अपना पिता समान मानता हूं। एक और निवेदन मैं अन्नाजी से करना चाहता हूं कि अन्नाजी 10 मिनट के लिए हमारे सचिवालय में चरण रखें तो हमारा सचिवालय शुद्ध हो जाएगा। वह 10 मिनट के लिए आएं और सभी विभाग के इंचार्जों से मिलें, हमें प्रेरणा मिलेगी।’

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे एक बार फिर एक साथ उसी तरह नजर आए, जैसे 2010 में लोकपाल आंदोलन के वक्त आए थे । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने 66 विधायकों के साथ अन्ना के लैंड बिल विरोधी आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंचे। केजरीवाल मंच पर अन्ना के बगल में बैठे थे। 

 

 

 

जम्मू कश्मीर में पीडीपी- बीजेपी के सरकार गठन पर आज शाह से मिलेंगी महबूबा मुफ्ती

जम्मू- कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन पर सरकार बनाने को लेकर आज अंतिम फैसला हो सकता है। दोनों दलों के बीच समझौते को लेकर आज आखिरी दौर की बातचीत होगी, जिसमें सरकार बनाए जाने को एलान किया जाएगा।

जानकारी के मुतबिक, जम्मू कश्मीर में मुफ्ती मुहम्मद सईद के नेतृत्व में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार एक मार्च को शपथ ले सकती है और दोनों दलों ने अफस्पा और अनुच्छेद 370 पर मतभेदों समेत अन्य सभी मुद्दों पर सहमति का रास्ता निकाल लिया है।

गठबंधन को औपचारिकता प्रदान करने के लिए पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगी। बता दें कि, दोनों दलों के बीच सात हफ्तों से सरकार बनाने की बातचीत चल रही है। 

वहीं पीडीपी संरक्षक सईद इस हफ्ते के आखिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे।दोनों दलों के बीच चल रही बातचीत से जुड़े सूत्रों ने यहां कहा कि शपथ ग्रहण समारोह एक मार्च को हो सकता है। 

सूत्रों के अनुसार एक मार्च की तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि यह एक शुभ दिन है।

सूत्रों ने कहा कि सईद छह साल तक राज्य के मुख्यमंत्री होंगे वहीं भाजपा के निर्मल सिंह उप मुख्यमंत्री हो सकते हैं। 

गौरतलब है कि, पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में पीडीपी को 87 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें मिली हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। भाजपा को 25 सीटें मिली हैं।

 

 

 

अन्ना का मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला- बोल, भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर जंतर- मंतर पर धरना

 संसद का बजट सत्र सोमवार से शुरू हुआ हो रहा है। इस बार बजट सत्र में भूमि अधिग्रहण समेत कई विधेयक पर विपक्ष मोदी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर चुका है ,तो वहीं बाहर भी मोदी सरकार को घेरने की तैयारी की जा रही है। समाजसेवी अन्ना हजारे आज से मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने वाले हैं। 

अन्ना के साथ इस धरने में 17 राज्यों के किसान आज दिल्ली पहुंच रहे हैं। खबर है कि, पांच हजार से ज्यादा किसान जंतर मंतर पर अन्ना के साथ धरना में शामिल होंगे।

भूमि अधिग्रहण विधेयक को किसान विरोधी बताने वाले अन्ना सोमवार से जंतर.मंतर पर दो दिन का विरोध प्रदर्शन करेंगे। 

उन्होंने कहा है कि उनके प्रदर्शन में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हो सकते हैं लेकिन वे उनके साथ मंच साझा नहीं करेंगे। 

यूपीए सरकार के दौरान अनना लोकपाल बिल लागू कराने को लेकर अन्ना 2011 में आंदोलन कर चुके हैं। इस दौरान उनके साथ अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी जैसे अहम सहयोगी थे। लेकिन अब दोनों राजनीति में प्रवेश कर चुके हैं। इस

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