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मुंबई सहित देश के कई शहरों में आतंकी हमले का अलर्ट

खुफिया एजेंसियों ने मुंबई सहित देश के कई शहरों में आतंकी हमले को लेकर अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों ने इस बाबत दिल्ली पुलिस को अलर्ट भी जारी किया है।

आईबी को एक चिट्ठी मिली है जिसके मुताबिक 2 से 3 महीने के अंदर मुंबई में बड़े पैमाने पर हमला हो सकता है। इसके मुताबिक लश्कर के आतंकी समंदर के रास्ते मुंबई में हमला करने की फिराक में है। 

आईबी को मिली चिट्ठी के मुताबिक लश्कर के 8-10 आतंकी हमला करने की तैयारी में है। ये लोग मुबंई के होटल और रेलवे स्टेशन को निशाना बना सकते हैं। फिलहाल जारी इस अलर्ट के बाद मुंबई की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सभी होटलों पर भी नजर रखी जा रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक लश्कर 26/11 के आतंकवादी हमले को दोहराना चाहता है। आईबी के अलर्ट को सभी सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं।

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा यह अलर्ट 26/11 हमले के मुख्य़ आरोपी ज़की-उर-रहमान लखवी की रिहाई के तुरंत बाद जारी किया गया। दरअसल, लखवी को पिछले हफ्ते ही लाहौर की एक कोर्ट से जमानत मिली थीए हालांकि भारत ने लखवी की रिहाई के खिलाफ अपना विरोध भी दर्ज कराया है।

डॉ. भीमराव आंबेडकर की आज मनाई जाएगी 125वीं जयंती

भारत को संविधान देने वाले डॉ. भीमराव आंबेडकर का मंगलवार को 125वां जन्मदिवस मनाया जाएगा। अनन्य कोटि के नेता, आंबेडकर ने अपना समस्त जीवन समग्र भारत के कल्याण के लिए न्यौछावर कर दिया। भारत के 80 फीसदी दलित सामाजिक व आर्थिक तौर से अभिशप्त थे, उन्हें अभिशाप से मुक्ति दिलाना ही डॉ. आंबेडकर के जीवन का संकल्प था। आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू में हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था।
 
उनके व्यक्तित्व में स्मरण शक्ति की प्रखरता, बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सच्चाई, नियमितता, दृढ़ता, प्रचंड संग्रामी स्वभाव का मेल था। बाबा साहब ने कहा, वर्गहीन समाज गढ़ने से पहले समाज को जातिविहीन करना होगा। समाजवाद के बिना दलित-मेहनती इंसानों की आर्थिक मुक्ति संभव नहीं। उनका मकसद समाज को श्रेणीविहीन और वर्णविहीन करना था। वह मानते थे कि इसी श्रेणी ने इंसान को दरिद्र और वर्ण ने इंसान को दलित बना दिया हैं। जिनके पास कुछ भी नहीं है, वे लोग दरिद्र माने गए और जो लोग कुछ भी नहीं है वे दलित समझे जाते थे।
 
हम हैं दरिया, हमें अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ निकल जाएंगे, वहीं रास्ता बना लेंगे।
 
यही उक्ति डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन संघर्ष का प्रतीक है। फिर बाबा साहेब ने संघर्ष का बिगुल बजाकर आह्वान किया, "छीने हुए अधिकार भीख में नहीं मिलते, अधिकार वसूल करना होता है। उन्होंने कहा - हिन्दुत्व की गौरव वृद्धि में वशिष्ठ जैसे ब्राह्मण, राम जैसे क्षत्रिय, हर्ष की तरह वैश्य और तुकाराम जैसे शूद्र लोगों ने अपनी साधना का प्रतिफल जोड़ा है। उनका हिन्दुत्व दीवारों में घिरा हुआ नहीं है, बल्कि ग्रहिष्णु, सहिष्णु व चलिष्णु है।
 
ऐसे संघर्षवादी भीमराव आंबेडकर को मेधावी छात्र के नाते छात्रवृत्ति देकर 1913 में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भेज दिया। अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, दर्शन और अर्थ नीति का गहन अध्ययन बाबा साहेब ने किया। वहां पर भारतीय समाज का अभिशाप और जन्मसूत्र से प्राप्त अस्पृश्यता की कालिख नहीं थी। इसलिए उन्होंने अमेरिका में एक नई दुनिया के दर्शन किए।
 
डॉ. आंबेडकर ने अमेरिका में एक सेमिनार में "भारतीय जाति विभाजन" पर अपना मशहूर शोध-पत्र पढ़ा, जिसमें उनके व्यक्तित्व की सर्वत्र प्रशंसा हुई। डॉ. आंबेडकर के अलावा भारतीय संविधान की रचना हेतु कोई अन्य विशेषज्ञ भारत में नहीं था। अतः सर्वसम्मति से डॉ. आंबेडकर को संविधान सभा की प्रारूपण समिति का अध्यक्ष चुना गया। 26 नवंबर 1949 को डॉ. आंबेडकर द्वारा रचित (315 अनुच्छेद का) संविधान पारित किया गया।

कश्मीरी पंडितों के लिए घाटी में बने नई स्मार्ट सिटीरू अनुपम खेर

बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने रविवार को कहा कि भारतीय संविधान की धारा 370 जो कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देती है उसे निरस्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विस्थापित हुए पंडित समुदाय के लिए कश्मीर घाटी में स्मार्ट सिटी बनाई जानी चाहिए।

‘रूट्स इन कश्मीर’ द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में अनुपम खेर ने कहा, “निजी तौर पर मुझे लगता है कि धारा 370 को निरस्त कर देना चाहिए।” अनुपम खेर स्वयं एक कश्मीरी पंडित हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित अब अपनी उन कालोनियों में वापस नहीं लौट सकते जहां पर वह पहले रह रहे थे, क्योंकि ज्यादातर जगह को या तो जला दिया गया है या फिर उस पर कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि कश्मीरी पंडितों के लिए एक नई स्मार्ट सिटी बनाई जाए।

बॉलिवुड ऐक्टर ने कहा, 'मैं सरकार से गुजारिश करता हूं कि वहां स्मार्ट सिटी बनाई जाए। देश के बेस्ट डॉक्टर्स, एजुकेशनिस्ट और आईटी प्रफेशनल पंडित कम्यूनिटी से ही आते हैं। अगर टाउनशिप को स्मार्ट सिटी के तौर पर बसाया जाएगा, तो पूरी कश्मीर घाटी को फायदा होगा।'

उन्होंने अलगाववादियों और कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे कश्मीरी पंडितों की वापसी को लेकर झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कश्मीरी पंडित भारत के आजाद नागरिक हैं और उन्हें यह अधिकार है कि वे कहां और कैसे रहेंगे। किसी और को शर्तें थोपने का अधिकार नहीं है। कम से कम उन अलगाववादियों और आतंकियों को तो बिल्कुल नहीं, जो हमें बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार हैं।'

पीएम मोदी बर्लिन पहुंचे, आज एंजेला मर्केल के साथ करेंगे बातचीत पीएम मोदी बर्लिन पहुंचे, आज एंजेला मर्केल के साथ करेंगे बातचीत

बर्लिन- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों की यात्रा पर सोमवार को जर्मनी के हैनोवर बिजनेस समिट में निवेश का न्योता देकर बर्लिन पहुंचे। इस दौरान जब पीएम मोदी बर्लिन एयरपोर्ट पहुंचे तो उनके लिए प्रवासी भारतीयों का क्रेज देखते बन रहा था। प्रवासी भारतीयों के बीच प्रधानमंत्री ने बदलते भारत की तस्वीर पेश की। पीएम ने कहा कि भारतीयों में अलग तरीके से सोचने की शक्ति है।


प्रवासी भारतीयों को संबोधि‍त करते हुए पीएम मोदी ने विकास का फंडा रखा। पीएम ने कहा, 'कृषि, निर्माण और सर्विस सेक्टर में संतुलन बनाकर भारत विकास के पथ पर आगे बढ़ सकता है।' आईटी क्षेत्र में भारतीय मूल के लोगों की धाक का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, 'हमारे देश के लोग विदेश जाकर गूगल और तमाम बड़ी कं‍पनियों में काम करते हैं, मैं पूछता हूं कि गूगल हमारे यहां क्यों नहीं पैदा हुआ? हिंदुस्तान मैनुफैक्चरिंग हब बन सकता है। भारत में कम खर्च में निर्माण की कूवत है।'

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के साथ विस्तृत बातचीत करेंगे। इसमें इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि जर्मनी भारत के विकास एजेंडे में उसके साथ कैसे काम कर सकता है। मर्केल के साथ हैनोवर फेयर में भारतीय पवेलियन का संयुक्त उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री जर्मनी की राजधानी पहुंचे हैं।

बर्लिन पहुंचने के बाद मोदी ने सीमेंस टेक्निकल एकेडमी का दौरा किया। यहां मोदी ने विद्यार्थियों से उनके कार्यों के बारे में उनकी बातें सुनीं। पीएम ने जर्मनी के वाइस चांसलर सिगमार गाब्रिएल से भी मुलाकात की। सिगमा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के अध्यक्ष एवं जर्मनी के आर्थिक और ऊर्जा मंत्री भी हैं।

इससे पहले हैनोवर में पीएम मोदी ने इंडो-जर्मन बिजनेस समिट को भी संबोधित किया। मोदी ने कहा कि जर्मनी और भारत के आपसी सहयोग की असीम संभावनाएं हैं। पीएम ने विदेशी निवेशकों को भारत आने का न्योता दिया और कहा कि थ्रीडी यानी डेमोग्रॉफी, डेमोक्रेसी और डिमांड दुनिया को भारत की ओर आकर्ष‍ित कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मनी के एक समाचार पत्र फ्रैंकफर्ट अलगेमीन जीटंग के लिए लेख भी लिखा। सोमवार को प्रकाशित आलेख में मोदी ने कहा, 'हमारे 'एक्ट ईस्ट' और 'लिंक वेस्ट' नीति से भारत में एक विनिर्माण केंद्र के रूप में पूर्व और पश्चिम का सेतु बनने की संभावना है।' मोदी ने लिखा कि वह भारत को वैश्विक विकास का एक इंजन बनाना चाहते हैं।

पीएम मोदी ने लिखा, 'हमारा लोकतांत्रिक सिद्धांत और व्यवहार स्थायित्व का भरोसा दिलाने वाला है। हमारे पास एक स्वतंत्र मीडिया और स्वतंत्र न्यायपालिका है जो सभी प्रकार की मुक्त अभिव्यक्ति को जगह देता है। अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की भारत की चाह में जर्मनी विशेष स्थान रखता है और भारत की जरूरतें जर्मन उद्योग जगत के लिए कारोबारी अवसर बन सकती हैं।'

पीएम मोदी ने जर्मन निवेशकों को दिया 'मेक इन इंडिया' का न्योता

यूरोप दौरे पर जर्मनी पहुंचे पीएम मोदी हनोवर में हैं। हनोवर में मोदी ने जर्मनी की कंपनियों को भारत में निवेश करने का न्योता दिया है, वहीं पूरे शहर में ‘मेक इन इंडिया’ का लोगों ‘शेर’ छाया हुआ है।

जर्मनी और शेष दुनिया के निवेशकों को लुभाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में ‘पूर्व अनुमान लगाने योग्य, स्थिर और प्रतिस्पर्धी’ कर व्यवस्था के साथ स्वागत करने वाले व्यापारिक वातावरण का वादा किया और कहा कि ‘शेष अनिश्चितताओं’ का निराकरण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत में व्यवस्था का कायापलट करने का काम ‘बड़ा’ है और इसे रातों-रात पूरा नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि सरकार उस दिशा में दृढ़ता से बढ़ रही है और इसे किया जाएगा।

जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ हनोवर व्यापार मेले का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार अनावश्यक नियमनों को हटा रही है और प्रक्रियाओं को सरल बना रही है ताकि देश में व्यापार करना आसान हो सके और विदेशी कंपनियां ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में भागीदारी करने में सक्षम हो सकें।

उन्होंने जर्मनी और दुनिया के अन्य हिस्सों के शीर्ष व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए कहा, आज, मैं भारत की निर्बाध आर्थिक संभावनाओं को खोलने के मेरे अपने मिशन के लिए जर्मनी की भागीदारी मांगने आया है।

मोदी ने कहा, मेरा आपको (विदेशी निवेशकों को यह संदेश है) आप ऐसा माहौल पाएंगे, जो न सिर्फ खुला बल्कि स्वागत करने वाला भी होगा। हम भारत में व्यापार करने को आसान बनाएंगे और हम आपकी प्रतिक्रिया सुनने को हमेशा उत्सुक रहेंगे। अपने देश को आर्थिक मंदी से निकालने वाली मर्केल ने जवाब में कहा कि वह चाहती हैं कि न सिर्फ जर्मन कंपनियां ‘मेक इन इंडिया’ में हिस्सा लें बल्कि ‘मेक इन जर्मनी’ में भारतीय कंपनियां भी हिस्सा ले सकें।

भारत में व्यापार की स्थिति में सुधार के बारे में मोदी के दावे के संबंध में उन्होंने कहा कि दोनों देश इस साल के उत्तरार्ध में अंतर सरकारी स्तर की वार्ता करेंगे। उस वक्त इस बात की समीक्षा की जा सकती है कि क्या ‘समस्याओं’ का निराकरण किया गया है।

मर्केल ने कहा, भारत और जर्मनी को व्यापार करने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 16 अरब यूरो के आकार वाला व्यापार शुरुआत के लिए अच्छा है।

मर्केल ने कहा कि फ्रांस भी भारत के साथ व्यापार करने को उत्सुक हैं। उन्होंने जर्मन व्यापारिक नेताओं से कहा, मैं जानती हूं कि इसमें प्रतिस्पर्धा है, लेकिन अधिक प्रतिस्पर्धा से आप बेहतर हासिल करते हैं। गौरतलब है कि मोदी फ्रांस की यात्रा समाप्त करने के बाद ही जर्मनी की यात्रा पर आए हैं।

मोदी ने कहा, हम दीर्घावधि के कोष के लिए नई वित्तीय लिखत (इन्सट्रूमेंट) शुरू कर रहे हैं। हम ऊर्जा के स्वच्छतम और सर्वाधिक प्रभावशाली इस्तेमाल से अपने विकास को बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अगले सात वर्षों में 75 गीगा वाट नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा, निवेश का सफर दिल्ली में शुरू हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता राज्यों की राजधानियों और जिलों पर निर्भर करेगी।

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