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इशरत जहां केस: पूर्व अंडर सेक्रटरी आरवीएस मणि के खुलासे ने यूपीए सरकार की भूमिका पर खड़े किए सवाल

इशरत जहां केस में जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस केस में अब एक नया खुलासा हुआ है। पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई के बाद अब आंतरिक सुरक्षा विभाग में अंडर सेक्रेटरी रहे आरवीएस मणि के खुलासे ने यूपीए सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरवीएस मणि ने कहा है कि, एफिडेविट पर दस्तखत करने के लिए उनपर दबाव डाला गया। आरवीएस मणि ने यहां तक कहा कि बात नहीं मानने पर SIT चीफ सतीश वर्मा ने उन्हें सुलगती हुई सिगरेट से दागा, जिसके बाद से उनके परिवार में खौफ था।

गौरतलब है कि इशरत केस में दो हलफनामा दायर किया गया था। जिसमें से एक में इशरत को आतंकी बताया गया था और दूसरे हलफनामे में सबूतों के अभाव की बात कही गई। दूसरे हलफनामे के लिए आरवीएस मणि ने पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम की ओर इशारा किया है। इस नए खुलासे के बाद से एक बार फिर से इशरत केस पर नई बहस शुरू हो गई है।

इशरत जहां केस में मणि के खुलासे से पी. चिदंबरम को लेकर कांग्रेस मुश्किल में फंस गई है। कांग्रेस इस मामले में चिदंबरम के बचाव में तो उतर आई है लेकिन कांग्रेसी खेमे में इस बात पर एक राय नहीं बन पा रही है कि आखिरकार इस मामले में चिंदबरम का बचाव कैसे किया जाए।

वहीं, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को शीर्ष मंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में इशरत जहां और केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया के विवादित बयान पर चर्चा की गई। इस बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, संसदीय मामलों के मंत्री वेंकैया नायडू और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मौजूद हैं।

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