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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिक्षा का भगवाकरण हो रहा है। उन्होंने खेल और राजनीति में करियर को बढ़ावा देने वाली शिक्षा प्रणाली का समर्थन किया है।

 स्मृति ने कहा, ‘‘मैं कभी छात्रों के धर्म के विषय में नहीं पूछती क्योंकि हम जाति या धर्म के आधार पर विद्यार्थी के शिक्षा के अधिकार में भेदभाव नहीं करते।’’ शिक्षा में धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं किया जा रहा है, अपने इस वाक्य का पुष्टि के लिए स्मृति ने गुजरात के केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में सैयद बारी की नियुक्ति का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा सिर्फ परिसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें पर्याप्त अवसर होने चाहिए जहां छात्र खेल में दिलचस्पी बढ़ा सकें या फिर एक दिन मेरी तरह नेता बन सकें।’’

देश की 19 यूनिवर्सिटीज में वाइस चांसलर की नियुक्ति न होने के सवाल पर स्मृति ईरानी ने कहा कि कोई भी संस्थान बिना नेतृत्व के नहीं है। वीसी की नियुक्ति जल्दबाजी में नहीं की जा सकती है, क्योंकि यह फैसला आगामी 5 साल तक संस्थान का भविष्य निर्धारित करता है। उन्होंने इन यूनिवर्सिटीज में काम-काज पर असर पडऩे के आरोप का खंडन किया। उन्होंने कहा कि जब वीसी की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही होती है तो एक वरिष्ठ अधिकारी को कार्यकारी रूप से अधिकृत किया जाता है।

स्मृति ईरानी ने अपने मंत्रालय की उपलब्धियां भी गिनाई। उन्होंने कहा कि कक्षा आठ के बाद पढ़ाई छोडऩे वालों के लिए बाद में शिक्षा के क्षेत्र में लौटने का विकल्प दिया गया है और इसके लिए नई व्यवस्था शुरू की गई है। साथ ही पहली बार कक्षा 1 से लेकर 12 तक एनसीईआरटी की किताबें ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। बहुत जल्द पढ़ाई के निर्देश भी ऑनलाइन उपलब्ध कराएंगे।

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