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नई दिल्ली- बिहार विधानसभा चुनावों से पहले जनता परिवार के विलय को अंतिम रूप दिये जाने को लेकर आज समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक चल रही है। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैठक में नहीं पहुंचे हैं।

सूत्रों की मानें तो, आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव ने संयुक्त पार्टी की जगह संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रस्ताव रखा है जिसमें मांझी और वामदलों को भी शामिल किए जाने की बात रखी गई हैं।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री मांझी पर दिए लालू प्रसाद यादव के बयान से नाराज बताए जा रहे नीतीश शुक्रवार को जनता परिवार की इस अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार की आंख में दर्द है जिसका आज ऑपरेशन होना है, जिसके चलते वो बैठक में नहीं पहुंचे।

आपको बता दें कि इस बैठक के दौरान बातचीत बिहार चुनाव और विलय से जुड़े मुद्दों पर केन्द्रित रहेगी। बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यद्यपि नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव से पहले बिहार केन्द्रित दो दलों के विलय के इच्छुक हैं लेकिन न तो समाजवादी पार्टी की और न ही राजद की इसमें रुचि दिखा रही है। जनता परिवार के छह दलों समाजवादी पार्टी, जेडीयू, जद (एस), राजद, इनेलो और समाजवादी जनता पार्टी ने 15 अप्रैल को अपने विलय की घोषणा की थी। लेकिन ऐसे संकेत हैं कि सपा और राजद इस पर दोबारा गौर करना चाहते हैं। इसके बाद नीतीश कुमार ने मुलायम सिंह से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। 15 अप्रैल को मुलायम सिंह को नये दल का प्रमुख घोषित किया गया था।

जनता परिवार के विलय के मार्ग में बाधाओं को दूर करने के प्रयास के तहत होने वाली बैठक से एक दिन पहले राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने जदयू के लिए यह कहकर असहज स्थिति पैदा कर दी कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को भाजपा के खिलाफ ‘व्यापक एकता’ का हिस्सा होना चाहिए। नीतीश कुमार के विरोधी समझे जाने वाले मांझी ने मुख्यमंत्री पद से अपदस्थ होने के बाद हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा बनाया है और उनका झुकाव भाजपा की ओर बताया जाता है। लालू ने पटना में संवाददाताओं से कहा कि हम भाजपा के खिलाफ दलों की व्यापक एकता चाहते हैं जिसमें मांझी सहित हर कोई आगे आये।

दिल्ली में कल होने वाली जनता परिवार के घटक दलों की बैठक में शामिल होने के लिए रवाना होने से पहले लालू ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हम भाजपा के खिलाफ दलों की व्यापक एकता चाहते हैं जिसमें मांझी सहित हर कोई आगे आएगा। राजद अध्यक्ष ने कहा कि यह विलय हो या गठबंधन, भाजपा के खिलाफ लड़ने के लिए दलों की व्यापक एकता की आवश्यकता है, मांझी और अन्य इसके लिए आगे आएंगे। पिछले साल के लोकसभा चुनाव में शर्मनाक पराजय के बाद खुद इस्तीफा देकर मांझी को उत्तराधिकारी बनाने वाले नीतीश ने लालू के इस बयान पर मीडिया से बात नहीं की। भाजपा के खिलाफ ‘व्यापक एकता’ के लिए मांझी को दिए गए लालू के आमंत्रण से जद यू खुश नहीं है जो इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले विलय की औपचारिकताओं को पूरा करने को उत्सुक है।

जनता परिवार के विलय को लेकर भ्रम तब और बढ़ गया जब सपा महासिचव राम गोपाल यादव ने हाल में कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विलय होने की ‘संभावना नहीं है।’ उनके इस बयान को विलय पर सपा में असहज स्थिति के रूप में देखा गया। सपा में कई नेताओं का मानना है कि पार्टी को इस विलय से कोई फायदा नहीं होगा, इससे बस बिहार में चुनाव में भाजपा एवं उसके सहयोगियों से टक्कर लेने में वहां के दो दलों जदयू और राजद का आधार मजबूत होगा। इस साल सितंबर अक्तूबर में बिहार विधानसभा चुनाव होने की संभावना है।

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