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आजादी के लगभग 72 सालाेें बाद भी मसूरी शहर के स्थानीय निवासी और पर्यटक सीजन में आने वाले लाखों सैलानी ब्रिटिश काल की पेयजल पम्पिंग योजना पर निर्भर हैं। भिलाडू पम्पिंग योजना ब्रिटिश काल से शहर की जलापूर्ति पूर्ण कर रही है लेकिन अब धीरे-धीरे इसका स्वरुप बदलता नज़र आ रहा है। भिलाडू के जल श्रोतों में गन्दगी पसरने लगी हैं। शहर की तमाम पेयजल पम्पिंग योजनाएं ब्रटिश काल की हैं और अधिकांश आज भी सुचारू रूप से काम कर रही हैं।

ब्रिटिश काल में पेयजल पम्पिंग के लिए मशीने इंग्लैंड से लायी गयी थी। और पैदल मार्ग होने की वजह से भारी-भरकम मशीने मजदूरों द्वारा पंप स्टेशनों तक पहुंचाई गयी थी। कुछ वर्षों से गद्दी खाने का कूड़ा-करकट जल श्रोतों तक पहुँच रहा है। जल श्रोतों मे गन्दगी का अम्बार बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन जल संस्थान के अधिकारी इस पर बात करने के लिए तैयार नही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है की प्रशासन को इस ओर जल्द सुध लेने की जरुरत है।

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