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नई दिल्लीः भीमा कोरेगांव केस में मंगलवार को गिरफ्तार किए गए पांच लोगों को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी आरोपी 6 सितंबर तक अपने घर पर ही नजरबंद रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में 5 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। इस दौरान कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने भी हाउस अरेस्ट की बात स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने सरकार से बुधवार तक जवाब दाखिल करने को भी कहा है।

इससे पहले मंगलवार को पुणे पुलिस ने देशभर के कथित नक्सल समर्थकों के घरों व कार्यालयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। छापे के बाद कवि वरवरा राव, अरुण पेरेरा, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस और सुधा भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों पर पुलिस ने 153 गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

इससे पहले इनकी गिरफ्तारी के विरोध में इतिहासकार रोमिला थापर और चार अन्य कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। अपनी याचिका में इन कार्यकर्ताओं की रिहाई का अनुरोध किया है। इसके अलावा, इन गिरफ्तारियों के मामले की स्वतंत्र जांच कराने का भी अनुरोध किया गया। 

पुलिस ने इन लोगों के घरों से उनके लैपटॉप, मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज़ ज़ब्त किए हैं। पुणे पुलिस का दावा है कि इस लोगों के तार कई बड़े नक्सलियों से जुड़े हो सकते हैं।

भीमा-कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने महाराष्ट्र के डीजीपी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस याचिका का जिक्र कर इस पर आज ही सुनवाई करने का अनुरोध किया था। 

पुणे के निकट कोरेगांव-भीमा गांव में पिछले साल 31 दिसंबर को आयोजित एलगार परिषद के बाद दलितों और सवर्ण जाति के पेशवाओं के बीच हिंसा की घटनाओं के सिलसिले में चल रही जांच के दौरान कल देश के कई हिस्सों में छापे मारे गए थे। महाराष्ट्र पुलिस ने कल गिरफ्तार किए गए इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर माओवादियों से संपर्क होने का शक है।

 

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