Headline • महिला सांसदों पर किये गए टिपण्णी से घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प• सुप्रीम कोर्ट ने की आसाराम की जमानत याचिका खारिज • धोनी को संन्यास देने की तयारी में है चयनकर्ता, बहुत जल्द कर सकते है फैसला • तकनीकी कारणों की वजह से 56 मिनट पहले रोकी गयी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग, इसरो ने कहा - जल्द नई तरीक करेंगे तय • भविष्य के टकराव ज्यादा घातक और कल्पना से परे होंगे : सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत • इसरो के चेयरमैन ने बताई चंद्रयान-2 मिशन के लांच होने की तरीक, चाँद पर पहुंचने में लगेगा 2 महीने का समय • झाऱखंड के स्वास्थ मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी का रिशवत लेते वीडीयो वायरल, पुलिस ने की FIR दर्ज • राफेल भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम साबित होगी : एयर मार्शल भदौरिया• उत्तराखंड : विधायक प्रणव सिंह चैंपियन BJP से बहार • चारा घोटाला मामले में लालू को मिली जमानत• आइटी पेशेवरों के लिए अमेरिका से अच्छी खबर• कर्नाटक संकट : बागी विधायक बोले इस्तीफे नहीं लेंगे वापस• 'अब बस' जाने क्या है मामला• सबाना के सपोर्ट में स्वरा• कर्नाटक का सियासी संग्राम जारी • भारत और न्यूजीलैंड का 54 ओवर का खेल आज• भारत बनाम न्यूजीलैंड• कर्नाटक संकट का असर राज्यसभा में• अहमदाबाद की अदालत  में राहुल गांधी• व्हाइट हाउस में भरा बारिश का पानी • क्या अनुपमा परमेसरन को डेट कर रहे जसप्रीत बुमराह• पाकिस्तान को आंख दिखाता नाग• यूएई और भारत के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर होगी बात• कर्नाटक में सियासी संकट• सभी चोरों का उपनाम मोदी क्यों है: राहुल गांधी


नई दिल्ली। (सुब्रत भट्टाचार्य) देश के करीब 60 फीसदी हिस्से पर भगवा झंडा फहराने के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती हाथ में ली है। यह चुनौती है वामपंथियों के गढ़ को भेदने की। पश्चिम बंगाल में मिली कामयाबी के बाद अब अमित शाह सुदूर केरल में भी भाजपा की उपस्थिति दर्ज करना चाहते हैं। केरल और त्रिपुरा ही दो ऐसे राज्य हैं जहां वामपंथियों की सरकारें हैं।

-जिन राज्यों में वामपंथी पार्टियों की सरकारें हैं वहां राजनीति हिंसा का लंबा इतिहास है। आजादी के बाद से ही आरएसएस केरल में जड़े जमाने में लगा हुआ है लेकिन आशातीत सफलता नहीं मिल सकी है। संघ के लिए केरल का क्या महत्व है, इसे इस बात से पता लगाया जा सकता है कि घनत्व के हिसाब से पूरे देश में संघ की सबसे ज्यादा शाखाएं केरल में है। और, केरल में ही संघ ने अपने सबसे ज्यादा संख्या में कार्यकर्ताओं को खोया है।

-अब जब अमित शाह ने केरल में बीजेपी की आमदगी की चुनौती को हाथ में लिया है, संघ इस बात से खुश है गाहे बगाहे राज्य में हो रही राजनीतिक हिंसा पर दुनिया की नजर जाएगी। इससे पार्टी को जड़े जमाने में मदद मिल सकती है।

-अमित शाह ने 15 दिनों तक चलने वाले जनरक्षा यात्रा का अगाज कर दिया है। आज इस यात्रा में यूपी के सीएम और हिन्दुत्व के पोस्टरबाॅय योगी आदित्यनाथ भी जुड़ंेगे। आदित्यनाथ कीचेरी से कन्नूर के बीच करीब 10 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। यह क्षेत्र केरल के सीएम पिनाराई विजयन का क्षेत्र है। कहा जाता है  िकइस क्षेत्र में कोई भी विपक्ष नहीं है। वामपंथियों का यहां एकछत्र राज है। केरल में विचारधाराओं की लड़ाई अक्सर खूनी संघर्ष में तब्दील हो जाती है।

-शाह अपने कार्यकाल के दौरान ही बंगाल और केरल को फतह करना चाहते हैं ताकि वह संघ के उस सपने को पूरा कर सके जिसमें वामपंथियों के गढ़ में भगवा झंडे को फहराते हुए देखा जाता है।
लेकिन जानकार मानते है कि शाह का यह प्रयास बेहद मुश्किल है, क्योंकि केरल में सीपीएम की गली-गली समितियां है। इसका मुकाबला करने के लिए बीजेपी को पहले अपने कॉडर खड़े करने पड़ेंगे।
बंगाल और केरल में बीजेपी ने अलग नीति अपनाई है। यहां फिल्मी सितारों और क्रिकेटरों को साथ लेकर चलने का इरादा है। क्रिकेटर श्रीसंत को पार्टी चुनाव लड़ा चुकी है। अब जॉन इब्राहीम के माध्यम से युवाओं को जोड़ने की कोशिश है। यहीं कारण है कि दिल्ली की रामलीला में अमित शाह के साथ जॉन इब्राहीम भी दिखे थे।

संबंधित समाचार

:
:
: