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नहाय-खाय के साथ छठ पर्व आज से शुरू, जानें क्या हैं इस त्योहार का महत्व

यूं तो छठ का त्योहार पूरे देश में ही मनाया जाता है। लेकिन इस त्योहार के मायने बिहार और यूपी के लोगों के लिए कुछ खास ही हैं।

यह सिर्फ एक त्योहार नही बल्कि बिहार,यूपी के लोगों के लिए एक महापर्व है। छठ का यह त्योहार नहाय खाय से शुरु होकर 4 दिनों तक चलता हैं। इस त्योहार का समापन भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर किया जाता हैं।

आपको बता दें कि छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व को बताने वाली कई पौराणिक और लोक कथाएं भी काफी प्रचलित हैं। माना जाता हैं कि सबसे पहले छठ पूजा सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी।

इतना ही नही कहा जाता हैं कि छठ की पूजा माता सीता और द्रौपदी के भी द्वारा की गई थी। गौरतलब हैं कि आज 'नहाय-खाय' के साथ इस महापर्व छठ का आरंभ हो गया है।

इस बार पहला अर्घ्य 6 नवम्बर को संध्या काल में दिया जाएगा और अंतिम 7 नवम्बर को अरुणोदय में। पहले दिन की पूजा के बाद से नमक का त्याग कर दिया जाता है।

छठ के दूसरे दिन को खरना के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रती खीर का प्रसाद तैयार करती है। खीर गन्ने के रस की बनी होती है।

इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं होता। शाम के वक्त इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद फिर निर्जल व्रत कि शुरुआत होती है। छठ के तीसरे दिन शाम के वक्त डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

साथ में विशेष प्रकार का पकवान 'ठेकुवा' और मौसमी फल चढ़ाए जाते हैं। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है। छठ के चौथे और आखिरी दिन उगते सूर्य की पूजा होती है।

सूर्य को इस दिन अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है।

छठ पर्व पर महिलाओं के साथ-साथ कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाली महिला को परवैतिन कहा जाता है। चार दिन के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है।

छठ का महत्व-

-कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है
-शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को इस पूजा का विशेष विधान है
-कार्तिक मास में सूर्य नीच राशि में होता है इसलिए विशेष उपासना होती है
-षष्ठी तिथि का सम्बन्ध संतान की आयु से होता है
-सूर्य देव और षष्ठी की पूजा से संतान प्राप्ति और और उसकी आयु रक्षा दोनों होते हैं
-सूर्य उपासना से अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का बेहतर स्तर बनाये रख सकते हैं

छठ व्रत के लाभ

-जिन लोगों को संतान न हो रही हो  उन्हे इस व्रत से लाभ होता
-अगर संतान पक्ष से कष्ट हो तो भी ये व्रत लाभदायक माना जाता है
-कुष्ठ रोग या पाचन तंत्र की गंभीर समस्या हो तो भी इस व्रत को रखना शुभ है
-जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति खराब हो उन्हे भी व्रत रखना चाहिए
-राज्य पक्ष से समस्या हो ऐसे लोगों को भी इस व्रत को जरूर रखना चाहिए

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